Kulbhushan Jadhav: क्या कुलभूषण जाधव पाकिस्तान से वापस नहीं आएंगे?

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Kulbhushan Jadhav

Kulbhushan Jadhav: क्या कुलभूषण जाधव को अपील का अधिकार नहीं था? क्या पाकिस्तानी नागरिकों को भी ऐसे ही अधिकारों से वंचित किया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट में उठे कई संवेदनशील सवाल.

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Kulbhushan Jadhav: पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस बार खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में यह बयान दिया है कि जाधव को अपील करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं दिया गया था. पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के अनुसार, मंत्रालय ने अदालत को बताया कि जाधव को सिर्फ राजनयिक पहुंच (काउंसलर एक्सेस) की सुविधा मिली थी, लेकिन अदालत में फैसले के खिलाफ अपील करने का हक नहीं दिया गया.

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यह बयान उस वक्त आया है जब सुप्रीम कोर्ट में उन पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ चल रही सैन्य अदालती कार्यवाही की सुनवाई हो रही है, जिन्हें 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के विरोध में हिंसा में शामिल होने के आरोप में दोषी ठहराया गया है. इन नागरिकों को भी सैन्य अदालतों द्वारा सजा दी गई है, लेकिन उन्हें उच्च न्यायालयों में अपील का अधिकार नहीं दिया गया. इसी संदर्भ में कुलभूषण जाधव का मामला सामने लाया गया, ताकि दिखाया जा सके कि विदेशी नागरिक को कुछ सीमित अधिकार दिए गए थे, जो अपने ही देश के नागरिकों को नहीं मिले.

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कुलभूषण जाधव भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी हैं. वे समय से पहले सेवानिवृत्त होकर ईरान के चाबहार में अपना व्यापार कर रहे थे. भारत का दावा है कि जाधव को ईरान से अगवा कर पाकिस्तान ले जाया गया और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया. अप्रैल 2017 में पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी और देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में मौत की सजा सुनाई. भारत ने इस पर आपत्ति जताते हुए हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का रुख किया. भारत का तर्क था कि पाकिस्तान ने विएना कन्वेंशन के अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया है क्योंकि उसे राजनयिक पहुंच से वंचित रखा गया.

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2019 में ICJ (अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय International Court of Justice) ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया और पाकिस्तान को जाधव को काउंसलर एक्सेस देने का निर्देश दिया. हालांकि, अब पाकिस्तान ने यह स्पष्ट किया है कि राजनयिक पहुंच तो दी गई थी लेकिन अपील का अधिकार नहीं.

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पाकिस्तान सरकार के वकील ख्वाजा हारिस अहमद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस समय अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या 9 मई की हिंसा के आरोपियों को अपील करने का अधिकार दिया जा सकता है या नहीं. यह मामला वहां की न्याय प्रणाली, नागरिक अधिकारों और सैन्य अदालतों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

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