ईरान ने ट्रंप को दी चेतावनी, बोला- 'जमीनी हमला किया तो सैनिकों के ताबूत भी नहीं ले जा पाओगे'

तस्वीर में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची.
Iran Warns Trump: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तल्खी अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. शनिवार को तसनीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में एक ईरानी सैन्य सूत्र ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका ने उसकी जमीन पर कदम रखा, तो यह उनकी 'रेड लाइन' होगी और इसके बदले ट्रंप को ऐसा 'सरप्राइज' मिलेगा जिसे उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा. ईरानी सूत्र ने तो यहां तक कह दिया कि अगर 'आतंकवादी ट्रंप' ने गलती की, तो अमेरिकी सैनिक अपने साथियों के ताबूत भी वापस नहीं ले जा पाएंगे.
Iran Warns Trump: ईरान ने सिर्फ अमेरिका को ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगियों को भी लपेटे में लिया है. सैन्य सूत्र के मुताबिक, अगर अमेरिका ने ईरान के द्वीपों (आईलैंड) को नुकसान पहुंचाया, तो इसका अंजाम यूएई के तटीय इलाकों को भुगतना होगा. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि हमले की स्थिति में दुबई और अबू धाबी भी सुरक्षित नहीं रहेंगे. इससे पहले जब ईरान के एनर्जी सेक्टर पर हमला हुआ था, तो पूरे इलाके की बिजली और ईंधन की सप्लाई ठप हो गई थी. ईरान का कहना है कि वे इस बार भी पूरी तरह तैयार हैं.
ईरान का न्यूक्लियर मटेरियल निकालना चाहते हैं ट्रंप
दूसरी तरफ, शुक्रवार को सीबीएस न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु भंडार (न्यूक्लियर मटेरियल) को वहां से निकालने की प्लानिंग कर रहा है. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस पर आखिरी फैसला नहीं लिया है, लेकिन चर्चा तेज है. इस काम के लिए अमेरिका की सबसे खास ‘जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड’ की मदद ली जा सकती है, जो बेहद सीक्रेट मिशनों के लिए जानी जाती है.
972 पाउंड यूरेनियम और ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल की गर्मियों तक ईरान के पास करीब 972 पाउंड 60% तक संवर्धित (इंरिच्ड) यूरेनियम जमा हो चुका था. आईएईए (IAEA) के मुताबिक, यह हथियार बनाने के स्तर से बस एक कदम दूर है. इसमें से ज्यादातर यूरेनियम उन साइट्स के नीचे दबा है, जिन्हें पिछले साल अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के दौरान बमबारी करके तबाह कर दिया था. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी माना है कि इस स्टॉक को कब्जे में लेना ट्रंप के लिए एक विकल्प है.
आईएईए ने बताया मिशन को बेहद रिस्की
आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने सीबीएस न्यूज से कहा कि ईरान से यूरेनियम निकालना असंभव तो नहीं, लेकिन इसके लिए बहुत ही एडवांस मिलिट्री ताकत चाहिए होगी. उन्होंने बताया कि यह गैस के सिलेंडरों में भरा होता है जिसे संभालना बहुत मुश्किल और खतरनाक है. हालांकि, अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन 60% लेवल तक यूरेनियम रखने वाला वह इकलौता गैर-परमाणु देश है.
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में ईरान को भारी नुकसान
अमेरिका के ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ ने जानकारी दी है कि पिछले एक हफ्ते में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के हजारों ठिकानों को निशाना बनाया गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के 120 से ज्यादा जहाजों और उनकी सभी 11 पनडुब्बियों (सबमरीन) को या तो तबाह कर दिया है या डुबो दिया है. इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने भी अपने कुछ सैनिक खोए हैं, जिन्हें ट्रंप और जनरल डैन केन ने श्रद्धांजलि दी.
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सीजफायर के मूड में नहीं हैं ट्रंप
इस पूरे तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे युद्ध रोकने (सीजफायर) के पक्ष में नहीं हैं. व्हाइट हाउस के बाहर उन्होंने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन सीजफायर नहीं करेंगे. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि जब आप दूसरी तरफ वाले को पूरी तरह खत्म कर रहे हों, तब सीजफायर नहीं किया जाता. ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और यूरेनियम को कम खतरनाक स्तर पर लाने की कोशिश की थी, लेकिन फिलहाल हालात युद्ध जैसे ही बने हुए हैं.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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