ट्रंप की 'अर्माडा' Vs चीन की टेक्नीक: ईरान ने तैयार किया प्लान; क्या ड्रैगन के दम पर अमेरिका को चुनौती देंगे खामेनेई?

चीन की मदद से ईरान का मिसाइल प्लान, ट्रंप की अर्माडा पर नजर. इमेज एआई के मदद से बनाई गई है.
ईरान अपनी मिसाइल ताकत को चीन की मदद से बढ़ा रहा है. शॉर्ट और मीडियम रेंज मिसाइलें अमेरिकी और खाड़ी देशों के लिए खतरा हैं. इजरायल हमलों के बाद साइट्स की मरम्मत और नई मिसाइल टेक्नीक पर काम जारी है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जनवरी को धमकी दी कि अमेरिका की एक बड़ी नौसैनिक ताकत (अर्माडा) फारस की खाड़ी की तरफ बढ़ रही है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर कड़ी नजर रखे हुए है, भले ही ईरान ने हाल ही में प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी हो.
वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उस पर हमला होता है, तो वह इसे पूरा युद्ध समझेगा. एक ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि इस सैन्य बिल्डअप का उद्देश्य अगर असली लड़ाई नहीं है, तो ठीक है, लेकिन हमारी सेना सबसे खराब हालात के लिए पूरी तरह तैयार है. इसीलिए ईरान में हर चीज हाई अलर्ट पर है.
इस अधिकारी ने आगे कहा कि इस बार हम किसी भी तरह के हमले चाहे लिमिटेड हो, अनलिमिटेड हो, सर्जिकल हो, या किसी भी तरह का उसे पूरा युद्ध मानेंगे और जवाब भी उसी तरह सबसे कड़े तरीके से देंगे.
ईरान के मिसाइलें अपनी ताकत दिखा चुकी हैं
विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ईरान के पास अब भी मजबूत रक्षा क्षमता है. खासकर उसके मिसाइल सिस्टम काफी सक्षम हैं. जून में इजरायल पर मिसाइल हमले के दौरान ये मिसाइलें काफी हद तक अपनी ताकत दिखा चुकी हैं.
सैंकड़ों मिसाइलों में से दर्जनों इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम को पार कर गईं और इसमें आम नागरिक भी मारे गए.
हालांकि इजरायल ने ईरान के मध्यम दूरी की मिसाइल सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचाया, लेकिन ईरान के शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल जो अमेरिका और खाड़ी देशों को मारने में सक्षम हैं को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ.
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चीन से मदद: ईरान की मिसाइल शक्ति बढ़ रही
अब ईरान अपनी मिसाइल प्रोग्राम को फिर से मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है. इसके लिए वह चीन से केमिकल सब्स्टांसेस मंगवा रहा है, जिससे सॉलिड-फ्यूल प्रोपेलेंट तैयार होंगे.
रिपोर्ट के अनुसार, चीन से ईरान के बंदरगाह बंदर अब्बास पर पिछले साल इम्पोर्ट की गई अमोनियम पेरक्लोरेट की खेप सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए पर्याप्त है.
द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, समुद्री इंटेलिजेंस ने देखा कि चीन और ईरान के बीच बार-बार मालवाहक जहाजों का छोटा बेड़ा यात्रा कर रहा है. साथ ही, सेटेलाइट इमेज से पता चला कि इमाम खोमेनी स्पेसपोर्ट में मिसाइल टेस्ट हो रहे हैं और लांचपैड पर जलने के निशान हैं, जो थर्मल गतिविधि दिखाते हैं.
लंबी दूरी की सुरक्षा और मिसाइल साइट्स की मरम्मत
ईरान चीन से HQ-9B लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम लेने की भी बातचीत कर रहा है. इसके अलावा, जून में इजरायल द्वारा मारे गए 21 बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स में से 16 को ईरान ने फिर से बहाल कर लिया है. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह दिखाता है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को तेजी से फिर से मजबूत कर रहा है और किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए तैयार है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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