सीजफायर के बाद ईरान को सबसे बड़ा नुकसान, जंजान में भीषण विस्फोट; IRGC के 14 जवानों की मौत

Published by :Anant Narayan Shukla
Published at :02 May 2026 8:40 AM (IST)
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Iran 14 IRGC members killed cleaning left over bombs exploded in Zanjan.

सफाई अभियान के दौरान हादसे का शिकार हुए आईआरजीसी के जवान. फोटो- कैनवा.

Iran Zanjan Blast IRGC: ईरान के जंजान में एक भीषण धमाका हो गया, जिसमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के 14 सदस्यों की मौत हो गई. ये सभी एक एक्सपर्ट टीम का हिस्सा थे, जो अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान बचे हुए बमों की सफाई कर रहे थे.

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Iran Zanjan Blast IRGC: ईरान के उत्तर-पश्चिमी जंजान प्रांत में हुए एक विस्फोट में आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के 14 सदस्यों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए.  ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, यह विस्फोट शुक्रवार को उस समय हुआ, जब आईआरजीसी की बम निष्क्रिय करने वाली टीमें जंजान शहर के पास एक इलाके में सफाई अभियान चला रही थीं. टीमें हाल ही अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद बचे गोला-बारूद की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए वहां पहुंची थीं, तभी यह धमाका हो गया. 

जंजान में आईआरजीसी की अंसार अल-महदी यूनिट के बयान के मुताबिक, यह विस्फोट किसी अज्ञात गोला-बारूद के कारण हुआ. रिपोर्ट में कहा गया कि मारे गए लोग बल के सबसे अनुभवी और विशेष प्रशिक्षित कर्मियों में शामिल थे. इलाके में मौजूद गोला-बारूद में क्लस्टर बम और हवाई हमलों में गिराई गई बारूदी सुरंगें शामिल होने की आशंका है. यानी ये वैसे गोला-बारूद थे, जो बिना फटे जिंदा हालात में वहां पड़े हुए थे. 

यह घटना 8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद आईआरजीसी के कर्मियों की अब तक की सबसे बड़ी रिपोर्टेड जनहानि है. लड़ाई खत्म होने के बाद (8 अप्रैल से सीजफायर) भी युद्ध के अवशेष कितना बड़ा खतरा बने हुए हैं, यह इस घटना से साफ नजर आ रहा है. आईआरजीसी के अनुसार, उसकी टीमों ने अब तक प्रभावित क्षेत्रों में 15,000 से अधिक बिना फटे गोला-बारूद की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय किया है.

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युद्ध से बिगड़े हालात के बाद सीजफायर पर राजी दोनों पक्ष

28 फरवरी को यूएस और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए.  इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के क्षेत्र और इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इस त्रिदेशीय युद्ध में अब तक 4000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से दुनिया में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है. ग्लोबल लेवल पर भारी नुकसान और मृतकों की बढ़ती संख्या के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की गई, जो खबर लिखे जाने तक जारी है. 

सीजफायर के बाद भी खतरा बरकरार

हालांकि युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान अभी भी जारी है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बिना फटे गोला-बारूद अब भी सैन्य कर्मियों और आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं. ये बम सिविल एरिया में और कृषि भूमि के इलाके में भी हैं. ऐसे में यह नागरिकों के लिए लगातार सुरक्षा खतरा पैदा कर रहे हैं. फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, बिना फटे क्लस्टर बमों की वजह से लगभग 1,200 हेक्टेयर कृषि भूमि में जोखिम बना हुआ है. 

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बातचीत की टेबल पर आने का प्रयास कर रहे ईरान-US

फारस की खाड़ी में दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्ग-होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही अब भी बाधित है. 8 अप्रैल को सीजफायर की घोषणा के बाद से अमेरिका ने होर्मुज से ईरान से आने-जाने वाले जहाजों के आवागमन पर रोक लगा दी है. वैश्विक संकट अब भी बरकरार है. इसी बीच शुक्रवार को ईरान ने दो महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा. हालांकि, ईरान के नये प्रस्ताव के बारे में कोई खास जानकारी सामने नहीं आई है. 

ट्रंप ने ठुकराया ईरान का प्रस्ताव

वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के नवीनतम प्रस्ताव से ‘संतुष्ट नहीं’ हैं. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘वे (ईरान) एक समझौता करना चाहते हैं, मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं, इसलिए देखते हैं कि आगे क्या होता है.’ हालांकि, ट्रंप ने प्रस्ताव की कमियों के बारे में नहीं बताया.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पिछले सप्ताह अमेरिकी दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द होने के बाद भी बातचीत फोन पर जारी है. इसके साथ ही उन्होंने ईरानी नेतृत्व के प्रति निराशा व्यक्त की. ट्रंप ने कहा, ‘वहां एक बेहद बिखरा हुआ नेतृत्व है. वे सभी समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उनमें आपस में ही मतभेद है.’

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ईरान को न्यूक्लियर पावर नहीं बनने देगा US

इससे पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने की पेशकश की थी, लेकिन वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद की तारीख तक स्थगित करना चाहता था. हालांकि, ट्रंप ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. उन्होंने वार्ताकारों से परमाणु मुद्दे को मसौदा पाठ में फिर से शामिल करने के लिए कहा था. अमेरिका ने जिन संशोधनों के लिए कहा था, उनमें यह मांग शामिल थी कि ईरान इस बात के लिए कमिट करे कि जब तक बातचीत जारी रहेगी, वह बमबारी से क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्रों से इनरिच्ड यूरेनियम बाहर ले जाने या उन स्थानों पर कोई भी नई गतिविधि शुरू करने का प्रयास नहीं करेगा.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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