INSV Kaundinya Muscat Voyage: भारतीय नौसेना का नौकायन पोत INSV कौंडिन्य अपनी पहली विदेशी यात्रा पर है. यह पोत गुजरात के पोर्बंदर से ओमान के मस्कट के लिए रवाना हुआ है और आखिरी जानकारी के अनुसार यह अपने गंतव्य से लगभग 880 नौसैनिक मील दूर है. यह यात्रा सिर्फ एक नौकायन अभियान नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा और इतिहास को याद करने और नया जीवन देने का प्रयास है.
INSV Kaundinya Muscat Voyage in Hindi: क्रू की यात्रा और अनुभव
इस पोत पर सवार प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजय सान्याल ने बताया कि समुद्र की स्थिति शांत है और उत्तर-पूर्वी हवा बनी हुई है. उन्होंने साझा किया कि रात में यात्रा अच्छी रही और हलचल कम होने पर उन्होंने सोने की कोशिश की. हालांकि ठंडी हवाओं और रस्सियों की आवाज सोने में मुश्किलें खड़ी कर रही थीं. उनका अनुमान है कि आज वे कुल दूरी का लगभग 1/3 तय कर लेंगे और आशा है कि आने वाली पश्चिमी हवा उन्हें मार्ग से भटका न दे.
INSV Kaundinya Muscat Voyage: नौसेना प्रमुख की सराहना
इस अभियान में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने क्रू की पेशेवर योग्यता और मेहनत की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह यात्रा राष्ट्रीय समुद्री चेतना को जागृत करने का प्रतीक है. एडमिरल ने बताया कि इस अभियान से भारत की हजारों साल पुरानी जहाज निर्माण और समुद्री परंपराओं को पुनर्जीवित करने में मदद मिल रही है.
पोत का निर्माण और फ्लैग ऑफ
INSV कौंडिन्य को परंपरागत भारतीय सिलाई तकनीक से बनाया गया है. यह तकनीक सदियों पुरानी है और इसमें प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. पोत को औपचारिक रूप से वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने हरी झंडी दिखाई. इस अवसर पर ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अल शीबानी और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री मोदी ने पोत और क्रू की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और इतिहास को उजागर करता है.
प्राचीन समुद्री मार्ग और भारत-ओमान संबंध
INSV कौंडिन्य की यात्रा पश्चिमी भारत और ओमान के प्राचीन समुद्री मार्गों को दोबारा चलाती है. यह मार्ग सदियों से व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम रहा है. इस यात्रा से भारत और ओमान के बीच मित्रता, विश्वास और सहयोग मजबूत होंगे. पोत का मस्कट पहुंचना दोनों देशों की समुद्री साझेदारी और साझा इतिहास का प्रतीक होगा.
यह अभियान गुजरात और ओमान के लंबे ऐतिहासिक संबंधों को भी दर्शाता है. यह यात्रा दिखाती है कि कैसे सदियों पुरानी दोस्ती और सहयोग आज भी जारी है. भारतीय नौसेना इस अभियान के माध्यम से समुद्री कूटनीति, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय सहयोग में अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है.
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