यूक्रेन युद्ध में इंडियन आर्मी बने पीस फोर्स, जेडी वेंस ने दिया था सुझाव; भारत का नाम सुनते ही तपाक से बोले ट्रंप
ट्रंप ने हंसते हुए कहा कि भारत ऐसा कभी नहीं करेगा.
India Peace Force Ukraine: नई किताब Regime Change में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में यूक्रेन युद्ध खत्म करने की रणनीति पर चर्चा के दौरान भारत और सऊदी अरब की शांति सेना की भूमिका पर विचार हुआ था. यह सुझाव उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दिया था. इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति ट्रंप ने किया खारिज कर दिया था.
India Peace Force Ukraine: रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की काफी कोशिशें की जा चुकी हैं. लेकिन अभी तक कोई भी योजना परवान नहीं चढ़ पाई है. कुछ पर काम किया गया कुछ ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया. ऐसी ही एक कभी न आकार ले पाने वाली योजना में भारत को घसीटने का प्लान बना था. इसके बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआती रणनीति को लेकर एक नई किताब में बड़ा दावा किया गया है. किताब के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के भीतर इस बात को लेकर मतभेद था कि यूक्रेन में संभावित युद्धविराम की निगरानी के लिए किन देशों की सेना भेजी जा सकती है. इसी चर्चा में भारत और सऊदी अरब के सैनिकों की तैनाती का विकल्प भी सामने आया था.
यह दावा द न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब रिजीम चेंज ( पूरा नाम- Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump) में किया गया है, जो 23 जून को जारी हुई. किताब के अनुसार, 30 जनवरी 2025 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई एक बैठक के दौरान भारतीय सेना को यूक्रेन में युद्धविराम के लिए तैनात करने पर चर्चा हुई थी.
यह बैठक डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शपथ लेने के करीब 10 दिन बाद हुई थी. बैठक का आयोजन रिटायर्ड आर्मी लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग ने किया था, जिन्हें ट्रंप ने रूस और यूक्रेन मामलों के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था.
केलॉग ने इस बैठक में प्रशासन की युद्ध खत्म करने की रणनीति पेश की थी. उन्होंने एक ड्राफ्ट योजना रखी थी, जिसका शीर्षक था- ‘An America First Plan: Trump’s Historic Peace Deal for Russia-Ukraine War’ यानी ‘अमेरिका फर्स्ट’ प्लान: रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए ट्रंप की ऐतिहासिक शांति डील.
यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती का था प्रस्ताव
किताब के मुताबिक, इस योजना में अमेरिका द्वारा रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों को आधिकारिक मान्यता नहीं देने की बात कही गई थी. वहीं, यूक्रेन से यह उम्मीद जताई गई थी कि वह इन क्षेत्रों को दोबारा सैन्य ताकत से हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा. इस प्रस्ताव में युद्धविराम की निगरानी के लिए यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी का भी सुझाव दिया गया था.
नाटो देशों की सेना पर जेडी वेंस ने जताई चिंता
Regime Change में दावा किया गया है कि कीथ केलॉग की योजना में फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों की सेनाओं को शांति मिशन में शामिल करने का विकल्प था. किताब के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रस्ताव के इस हिस्से पर आपत्ति जताई.
वेंस का कहना था कि अगर नाटो देशों की सेनाएं यूक्रेन में तैनात होती हैं तो रूस इसे उकसावे की कार्रवाई मान सकता है. इससे तनाव बढ़ सकता है और अमेरिका के सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने का खतरा भी बढ़ सकता है.
इसके बाद वेंस ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वॉल्ट्ज से पूछा कि क्या यूरोप से बाहर के किसी देश की सेना युद्धविराम की निगरानी कर सकती है. किताब के अनुसार, वॉल्ट्ज ने इस विचार को बेहतर विकल्प बताया.
भारत और सऊदी अरब का नाम आया सामने
इसके बाद जेडी वेंस ने भारत और सऊदी अरब को संभावित विकल्प के तौर पर सुझाया. हालांकि, किताब के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की भागीदारी के विचार को तुरंत खारिज कर दिया. किताब में दावा किया गया है कि ट्रंप ने हंसते हुए कहा, ‘भारतीय ऐसा नहीं करेंगे. वे इस तरह की किसी चीज के लिए तैयार नहीं होंगे.’
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मोदी उन्हें ‘बहुत पसंद करते हैं और उनसे मिलने आना चाहते हैं.’ इसके बावजूद ट्रंप ने कथित तौर पर भारत की भागीदारी को लेकर कहा कि ‘भारतीय कभी किसी चीज के लिए भुगतान नहीं करते.’
ब्रिटेन और फ्रांस को लेकर ट्रंप तैयार थे
किताब के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अगर ब्रिटेन या फ्रांस अपने सैनिक भेजना चाहते हैं तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होगी. लेकिन उनकी शर्त थी कि अमेरिका को किसी तरह की आर्थिक या सैन्य जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़े.
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ट्रंप ने जेलेंस्की पर भी साधा निशाना
किताब में दावा किया गया है कि बैठक के दौरान ट्रंप यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को लेकर काफी नाराज नजर आए. दावे के मुताबिक, ट्रंप ने कई बार बीच में बोलते हुए जेलेंस्की को ‘खराब बातचीत करने वाला’ बताया और कहा कि उन्होंने अपने देश को बर्बाद कर दिया. किताब में यह भी दावा किया गया है कि ट्रंप ने यूक्रेन को दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश बताया.
ट्रंप सबके सामने ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को अपने ऑफिस में काफी खरी खोटी सुना चुके हैं. उन्होंने अपनी ओर से रूस और यू्क्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने का काफी प्रयास भी किया है, लेकिन अभी तक वह सफल नहीं हो पाए हैं. हालांकि, बीते कुछ दिनों से यूक्रेन रूस के अंदर तक हमले कर रहा है. इससे दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में संघर्ष कम होने की उम्मीद नहीं है.
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By Anant Narayan Shukla
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