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Rafale F4 fighter Jet: भारत की वायुसेना को मिलेगा नया दम, 90 राफेल F4 और 97 तेजस से मजबूत होंगे स्क्वाड्रन

Updated at : 30 Aug 2025 1:46 PM (IST)
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AI IMAGE OF Rafale F4 fighter Jet

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Rafale F4 fighter Jet: भारत ने वायुसेना की स्क्वाड्रन कमी दूर करने के लिए 97 तेजस-1 जेट्स के उत्पादन को मंजूरी दी और 90 राफेल F4 लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है. यह सौदा मेक इन इंडिया को मजबूती देगा, लेकिन 27 अरब डॉलर का बजट दबाव डालेगा.

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Rafale F4 fighter Jet: भारतीय वायुसेना लंबे समय से स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है. ऐसे में सरकार और सेना दोनों ही मिलकर तेजी से इस कमी को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. भारत ने जहां 97 तेजस-1 फाइटर जेट्स के उत्पादन को हरी झंडी दी है, वहीं अब फ्रांस से सीधे 90 राफेल F4 लड़ाकू विमानों की खरीद की तैयारी भी तेज हो गई है. डिफेंस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना ने सरकार को इस डील की सिफारिश भेज दी है.

वायुसेना में स्क्वाड्रन की बड़ी कमी (Rafale F4 fighter Jet)

भारतीय वायुसेना के पास इस समय केवल 31 स्क्वाड्रन सक्रिय हैं, जबकि अधिकृत संख्या 42 स्क्वाड्रनों की है. आने वाले सितंबर 2025 में आखिरी मिग-21 स्क्वाड्रन भी रिटायर हो जाएगा, जिससे यह संख्या घटकर केवल 29 रह जाएगी. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि भारत को एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर लड़ाई के लिए तैयार रहना पड़ता है. “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी भारतीय वायुसेना ने राफेल जेट्स से गहरे हमले किए थे. हालांकि उस समय विमान की संख्या कम होने के कारण सीमाओं पर एक साथ कार्रवाई करने में मुश्किलें महसूस हुई थीं. यही वजह है कि अब अतिरिक्त राफेल की खरीद जरूरी मानी जा रही है.

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राफेल F4: और ज्यादा ताकतवर वैरिएंट (Rafale F4 fighter Jet)

फ्रांस का राफेल F4 वर्जन मौजूदा F3-R की तुलना में कहीं अधिक एडवांस है. इसमें बेहतर AESA रडार, अपग्रेडेड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताएं हैं. भारत इसे और भी ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए इसमें स्वदेशी हथियार जोड़ने की योजना बना रहा है.

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यदि ये इंटीग्रेशन सफल होता है तो राफेल F4 एक असली मल्टी-रोल फाइटर के रूप में उभरेगा. भारत ने पहले ही नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन का सौदा किया है. ऐसे में अगर 90 राफेल F4 विमानों की खरीद होती है तो भारतीय वायुसेना, फ्रांसीसी वायुसेना के बाद सबसे ज्यादा राफेल जेट्स रखने वाली ताकत बन जाएगी.

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भारत में ही बनेगा “सुपर राफेल”

भारत-फ्रांस डील का सबसे बड़ा फायदा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को होगा. अगर समझौता पक्का होता है तो राफेल जेट्स का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. नागपुर की डसॉल्ट-रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) फैक्ट्री पहले से राफेल के कई पुर्जे बना रही है और वह अंतिम असेंबली की जिम्मेदारी भी संभाल सकती है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) को एयरफ्रेम बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है.

सेफ्रॉन (Safran) कंपनी भारत में राफेल इंजनों के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा तैयार कर रही है. अगर यह डील पूरी तरह से अमल में आती है तो भारत में इंजन असेंबली तक संभव होगी. यानी भारतीय एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बड़ी मजबूती मिलेगी.

टू-फ्रंट वॉर के लिए मजबूती

भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों से चुनौती का सामना करना पड़ता है. दोनों देशों की एयर फोर्स की संख्या भारत से ज्यादा है. ऐसे में राफेल F4 जैसे एडवांस फाइटर मिलने से भारतीय वायुसेना को बड़ा फायदा होगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के पास फिलहाल इस डील को टालने का विकल्प नहीं है. आधुनिक युद्ध में हवा से मिली बढ़त निर्णायक साबित होती है और राफेल F4 की तैनाती से भारत की सामरिक क्षमता दोगुनी हो जाएगी.

27 अरब डॉलर की भारी-भरकम डील

हालांकि इस सौदे की कीमत भी कम नहीं है. अनुमान है कि 90 राफेल विमानों की कीमत लगभग 27 अरब डॉलर होगी. यह भारत के रक्षा बजट पर बड़ा दबाव डालेगा.सिर्फ विमान ही नहीं, बल्कि इसमें भारतीय मिसाइलों का इंटीग्रेशन और अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी शामिल है. इसके लिए अलग बजट की व्यवस्था करनी होगी. इसके बावजूद सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पड़ोसी देशों से बढ़ते खतरे के बीच यह सौदा भारत के लिए मजबूरी है. भारतीय वायुसेना को अगले कुछ वर्षों में अपनी स्क्वाड्रन संख्या बढ़ानी ही होगी, वरना स्थिति और गंभीर हो जाएगी. राफेल F4 की खरीद और तेजस जेट्स का उत्पादन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. अगर डील पर सहमति बन जाती है तो भारत न केवल दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेनाओं में शुमार होगा बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा.

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Aman Kumar Pandey

लेखक के बारे में

By Aman Kumar Pandey

अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।

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