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Iran: ईरान में कितने हैं सिख और कहां हैं उनके गुरुद्वारे? जहां पर पीएम मोदी ने किया था दर्शन

Updated at : 20 Jun 2025 7:31 PM (IST)
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Iran: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत सरकार ऑपरेशन सिंधु चला रही है. इसी बीच NAPA ने SGPC से तेहरान के गुरुद्वारों में रखे गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित भारत लाने की अपील की है. ईरान में करीब 2000 सिख और तीन प्रमुख गुरुद्वारे मौजूद हैं.

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Iran: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष के मद्देनजर भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ के जरिए वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस बीच नॉर्थ अमेरिका पंजाबी एसोसिएशन (NAPA) ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से अपील की है कि तेहरान स्थित गुरुद्वारों में रखे गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप को भी सुरक्षित भारत लाया जाए.

ईरान की राजधानी तेहरान में दो प्रमुख गुरुद्वारे मौजूद हैं और वहां करीब 60 से 100 सिख परिवार रहते हैं. पूरे ईरान में सिखों की कुल संख्या लगभग 2000 है. इनमें से अधिकांश तेहरान और जाहेदान जैसे शहरों में बसे हैं. जाहेदान में स्थित गुरुद्वारा 1921 में स्थापित किया गया था और इसे पश्चिमी एशिया का पहला गुरुद्वारा माना जाता है.

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तेहरान में मौजूद ‘भाई गंगा सिंह सभा’ नामक गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण 1966 में हुआ था. ऐसा भी कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी इस स्थान पर आए थे. इसके अलावा तेहरान में ही ‘मस्जिद-ए-हिंदां’ नामक एक अन्य गुरुद्वारा भी है, जिसका नाम भले ही इस्लामिक प्रतीत होता है, पर यह वास्तव में सिखों का पूजनीय स्थल है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2016 में जब ईरान के दौरे पर गए थे, तब उन्होंने भाई गंगा सिंह सभा गुरुद्वारे में मत्था टेका था. इससे पहले 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी तेहरान में सिख समुदाय के प्रतिनिधियों से मिल चुके हैं.

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इतिहास बताता है कि भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद पंजाब से बड़ी संख्या में सिख ईरान पहुंचे थे, खासकर जाहेदान और तेहरान जैसे शहरों में. हालांकि 1979 की इस्लामिक क्रांति और फिर ईरान-इराक युद्ध ने वहां सिख समुदाय को गहरा झटका दिया. नतीजतन सिखों की संख्या धीरे-धीरे घटती गई और कई परिवार ब्रिटेन या अन्य देशों में बस गए. अब जब युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, तो भारत में सिख संगठनों ने न सिर्फ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की बात की है, बल्कि ईरान में बसी सिख विरासत को भी सुरक्षित रखने की मांग तेज कर दी है.

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Aman Kumar Pandey

लेखक के बारे में

By Aman Kumar Pandey

अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।

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