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Nobel Prize in Medicine: डेविड जूलियस, आर्डम पातापुतियन को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार

Updated at : 04 Oct 2021 9:34 PM (IST)
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Nobel Prize in Medicine: डेविड जूलियस, आर्डम पातापुतियन को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार

Nobel Prize in Medicine: तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टरों की खोज की खातिर डेविड जूलियस, आर्डम पातापुतियन को वर्ष 2021 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है.

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Nobel Prize in Medicine: तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टरों की खोज की खातिर डेविड जूलियस, आर्डम पातापुतियन को वर्ष 2021 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है. कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट में द नोबेल असेंबली ने सोमवार (4 अक्टूबर) को इसकी घोषणा की. जूलियस और पातापुतियन को संयुक्त रूप से मेडिसीन का नोबेल पुरस्कार दिया जायेगा.

चिकित्सा का नोबेल जीतने वाले दोनों वैज्ञानिक अमेरिका से हैं. डेविड जूलियस का जन्म 4 नवंबर 1955 को हुआ था. अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में उनका जन्म हुआ. डेविड जूलियस इस वक्त सैनफ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में पदस्थापित हैं.

वहीं, आर्डम पातापुतियन का जन्म लेबनान की राजधानी बेरुत में वर्ष 1967 में हुआ था. आर्डम पातापुतियन वर्तमान में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित होवार्ड ह्यूजेज मेडिकल इंस्टीट्यूट के स्क्रिप्स रिसर्च, ला जोला में अनुसंधान कर रहे हैं.

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अमेरिकी वैज्ञानिकों डेविड जूलियस और आर्डम पातापुतियन को तापमान और स्पर्श के लिए ‘रिसेप्टर’ की खोज के लिए यह सम्मान दिया गया है. इन ‘रिसेप्टर’ से इंसान तापमान और स्पर्श को महसूस करता है. दोनों वैज्ञानिकों का अध्ययन ‘सोमैटोसेंसेशन’ क्षेत्र पर केंद्रित था, जो आंख, कान और त्वचा जैसे विशेष अंगों की क्षमता से संबंधित है.

नोबेल समिति के महासचिव थॉमस पर्लमैन ने कहा, ‘इससे वास्तव में प्रकृति के रहस्यों में से एक का खुलासा होता है. यह वास्तव में ऐसा कुछ है, जो हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए यह एक बहुत ही अहम और गहन खोज है.’ समिति ने कहा कि जूलियस (65) ने तंत्रिका सेंसर की पहचान करने के लिए मिर्च के घटक कैप्साइसिन का इस्तेमाल किया. तंत्रिका सेंसर से त्वचा पर तापमान की प्रतिक्रिया होती है.

उसने कहा कि पातापुतियन ने कोशिकाओं में अलग दबाव-संवेदनशील सेंसर का पता लगाया. पिछले साल इसी जोड़ी को ‘न्यूरोसाइंस’ के लिए प्रतिष्ठित कवली पुरस्कार दिया गया था. नोबेल समिति के पैट्रिक अर्नफोर्स ने कहा, ‘कल्पना कीजिए कि आप गर्मी के मौसम में किसी दिन सुबह मैदान में नंगे पांव चल रहे हैं. आप सूरज की गर्मी, सुबह की ओस की ठंडक, हवा और अपने पैरों के नीचे घास को महसूस कर सकते हैं. तापमान, स्पर्श और हरकत के ये प्रभाव सोमैटोसेंसेशन पर निर्भर भावनाएं हैं.’

उन्होंने कहा, ‘त्वचा और अन्य गहरे ऊतकों से इस तरह की सूचना लगातार निकलती है और हमें बाहरी और आंतरिक दुनिया से जोड़ती है. यह उन कार्यों के लिए भी आवश्यक है, जिन्हें हम सहजता से और बिना ज्यादा सोचे-समझे करते हैं.’

चिकित्सा के नोबेल से जुड़ी बड़ी बातें

नोबेल पुरस्कार की स्थापना 1901 से 2021 तक 112 बार मेडिसीन का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. 224 लोगों को विश्व के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है. 12 महिलाओं को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. फ्रेडरिक जी बांटिंग ने वर्ष 1923 में मात्र 32 साल की उम्र में नोबेल पुरस्कार जीता था. वह नोबेल पाने वाले सबसे युवा वैज्ञानिक थे. वहीं, वर्ष 1966 में 87 साल की उम्र में पेटॉन रूस यह पुरस्कार पाने वाले सबसे बुजुर्ग नोबेल विजेता थे.

121 साल के इतिहास में 9 बार (1915, 1916, 1917, 1918, 1921, 1925, 1940, 1941 और 1942) ऐसे मौके आये, जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा नहीं की गयी. प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बहुत कम नोबेल पुरस्कार दिये गये.

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नोबेल पुरस्कार के इतिहास पर नजर डालेंगे, तो पायेंगे कि सिर्फ 39 बार सिर्फ एक वैज्ञानिक को उनकी खोज के लिए चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया. 34 बार दो वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि 39 बार तीन-तीन वैज्ञानिकों ने विश्व के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को साझा किया.

आज तक किसी भी व्यक्ति को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दो बार नहीं मिला. यानी अब तक जितने भी वैज्ञानिकों ने चिकित्सा का नोबेल जीता है, उन्हें दूसरी बार यह पुरस्कार नहीं मिला. मरणोपरांत किसी वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाता. हां, अगर पुरस्कार की घोषणा के बाद किसी की मौत हो जाती है, तो उसे नोबेल विजेता माना जाता है.

पिता-पुत्र, दंपती और भाईयों ने जीते हैं नोबेल

नोबेल विजेता पिता-पुत्र की जोड़ी

आर्थर कोर्नबर्ग ने 1959 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जीता था, जबकि वर्ष 2006 में उनके बेटे रोजर डी कोर्नबर्ग ने रसायन (केमिस्ट्री) का नोबेल जीता.

नोबेल विजेता पति-पत्नी की जोड़ी

दो विवाहित दंपतियों ने चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जीता है. वर्ष 1947 में गर्टी कोरी और कार्ल कोरी की जोड़ी ने चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जीता था. वहीं, वर्ष 2014 में मे-ब्रिट मोजर और एडवर्ड आई मोजर दंपती ने यह पुरस्कार अपने नाम किया था.

नोबेल जीतने वाले भाई

जेन टिनबर्गन और निकोलास टिनबर्गन दो ऐसे भाई हैं, जिन्होंने नोबेल पुरस्कार जीता है. जैन ने अर्थशास्त्र का नोबेल जीता था, जबकि उनके भाई निकोलास ने चिकित्सा का नोबेल जीता.

11.4 लाख अमेरिकी डॉलर मिलता है पुरस्कार में

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार में एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (करीब 11.4 लाख अमेरिकी डॉलर) दिये जाते हैं. पुरस्कार की राशि स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल द्वारा छोड़ी गयी वसीयत से दी जाती है. नोबेल का 1895 में निधन हो गया था. नोबेल पुरस्कार चिकित्सा के अलावा भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिये जाते हैं.

Posted By: Mithilesh Jha

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