दुनिया को कोरोना महामारी के मुंह में धकेलने वाले चीन ने मंगल ग्रह पर उतारा पहला रोवर, युद्ध के देवता के नाम पर समर्पित है झुरोंग

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि रोवर झुरोंग का नाम चीन की पौराणिक कथा में अग्नि और युद्ध के देवता के नाम पर रखा गया है. यह रोवर मंगल ग्रह पर यूटोपिया प्लैनिशिया में पहले से चयनित इलाके में उतारा गया है. मंगल ग्रह पर पहुंचने वाले रोवर का वजन करीब 240 किलोग्राम है, उसमें छह पहिए और चार सौर पैनल लगे हुए हैं और वह प्रति घंटे 200 मीटर तक घूम सकता है.
नई दिल्ली : भारत समेत पूरी दुनिया को कोरोना महामारी के मुंह में धकेलने वाले चीन ने शनिवार के तड़के अपने पहले लैंड रोवर झुरोंग को मंगल ग्रह की सतर पर उतारने में कामयाबी हासिल की है. चीन की अंतरिक्ष एजेंसी चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएनएसए) ने शनिवार सुबह इस बात की पुष्टि की है कि मंगल ग्रह के लिए देश का पहला रोवर लेकर एक अंतरिक्ष यान लाल ग्रह पर उतर गया है. इसके साथ ही, चीन अमेरिका के बाद मंगल ग्रह पर रोवर उतारने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है.
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि रोवर झुरोंग का नाम चीन की पौराणिक कथा में अग्नि और युद्ध के देवता के नाम पर रखा गया है. यह रोवर मंगल ग्रह पर यूटोपिया प्लैनिशिया में पहले से चयनित इलाके में उतारा गया है. मंगल ग्रह पर पहुंचने वाले रोवर का वजन करीब 240 किलोग्राम है, उसमें छह पहिए और चार सौर पैनल लगे हुए हैं और वह प्रति घंटे 200 मीटर तक घूम सकता है.
इसमें छह वैज्ञानिक उपकरण मौजूद हैं, जिनमें बहु-वर्णीय कैमरा, रडार और एक मौसम संबंधी मापक यंत्र लगा है. इसके मंगल ग्रह पर करीब तीन महीने तक काम करने की संभावना है. एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर लेकर गए अंतरिक्ष यान तिआनवेन-1 का प्रक्षेपण 23 जुलाई 2020 को किया गया था. सौर मंडल में और अन्वेषण के मकसद से एक मिशन में ही ऑर्बिटिंग (कक्षा की परिक्रमा), लैंडिंग और रोविंग पूरा करने के उद्देश्य से मंगल ग्रह पर पहुंचने की दिशा में यह चीन का पहला कदम है.
सीएनएसए ने एक बयान में बताया कि उसका रोवर नौ मिनट की कठिन यात्रा के बाद शनिवार को मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतर गया. अभी तक केवल अमेरिका को मंगल ग्रह पर उतरने में महारत हासिल है. इसके साथ ही, चीन मंगल ग्रह पर रोवर के साथ पहुंचने वाला दूसरा देश बन गया है. नासा का परसीवरेंस रोवर करीब सात महीने की यात्रा के बाद 18 फरवरी को मंगल ग्रह पर पहुंचा था. इससे पहले अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ तथा भारत को मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने में कामयाबी मिल चुकी है.
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posted by : Vishwat Sen
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