Bangladesh updates: शेख हसीना के कट्टर विरोधी व नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस को बनाया गया अंतरिम सरकार का मुखिया
Published by : Prerna Kumari Updated At : 07 Aug 2024 12:12 PM
मोहम्मद यूनुस
बांग्लादेश में तख्तापलट हो चुका है और शेख हसीना देश छोड़कर निकल गईं हैं. अब प्रदर्शनकारियों की मांग को स्वीकार करते हुए बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया है.
Bangladesh updates: पिछले कई दिनों से बांग्लादेश में चल रहे सियासी संकट के बीच अब अंतरिम सरकार का गठन होने वाला है. बांग्लादेशी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव ने मंगलवार रात को यह जानकारी दी कि शेख हसीना के कट्टर विरोधी व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का मुखिया बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. बांग्लादेश के संसद भवन में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के नेतृत्व में एक मीटिंग के दौरान यह फैसला लिया गया. इस मीटिंग में आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र नेताओं के साथ-साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल थे. प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है.
कौन हैं मोहम्मद यूनुस ?
मोहम्मद यूनुस का जन्म 28 जून 1940 में हुआ था. यूनुस बांग्लादेश के एक सामाजिक उद्यमी, एक बैंकर, अर्थशास्त्री और सामाजिक नेता हैं. 2006 में इन्हें गरीबी उन्मूलन के विशेष प्रयासों के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था. इनके कारण बांग्लादेश में बड़ी संख्या में लोगों का जीवनस्तर सुधर गया था. यूनुस को शेख हसीना का कट्टर आलोचक और विरोधी माना जाता है. शेख हसीना का इस्तीफा देने और देश छोड़कर भागने की स्थिति को इन्होंने “दूसरा मुक्ति दिवस” बताया है.
मोहम्मद यूनुस पर लग चुके हैं कई आरोप
मोहम्मद यूनुस को इसी साल के जनवरी में श्रम कानून का उल्लंघन करने के आरोप में 6 महीने के लिए जेल की सजा भी सुनाई गई थी, हालांकि उन्हें जेल नहीं भेजा गया. जून में बांग्लादेश की एक अदालत में यूनुस और 13 अन्य लोगों पर उनके द्वारा बनाए गए एक दूर संचार कंपनी में काम कर रहे लोगों ने कल्याण कोष से 252.2 मिलियन टका (बांग्लादेशी करन्सी) के घपले का आरोप भी लगाया था. यूनुस पर भ्रष्टाचार के अन्य कई मुकदमे चल रहे हैं, हालांकि यूनुस ने सभी आरोपों से इनकार किया है. इसी साल यूनुस ने अपने बयान में कहा था कि ‘बांग्लादेश में कोई राजनीति नहीं बची है, केवल एक पार्टी है जो सक्रिय है जो गैर कानूनी तरीकों से चुनाव जीतती है.’
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