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तालिबान के शासन में हुआ चौंकाने वाला कमाल! अफगान अफगानी अब भारतीय रुपये से भी मजबूत

Updated at : 16 Oct 2025 2:56 PM (IST)
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Afghanistan Afghani Stronger Than Indian Rupee

अफगान अफगानी भारतीय रुपये से भी मजबूत

Afghanistan Afghani Stronger Than Indian Rupee: अफगानिस्तान, जो दशकों से आर्थिक और राजनीतिक संकट झेलता रहा है, अब अपनी मजबूत और स्थिर रुपया अफगान अफगानी (AFN) की वजह से दुनिया का ध्यान खींच रहा है. जानें कैसे तालिबान की नीतियों और स्थानीय लेन-देन ने इसे भारतीय रुपये से भी मजबूत बना दिया है.

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Afghanistan Afghani Stronger Than Indian Rupee: अफगानिस्तान जो दशकों से युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट झेलता रहा है. इस समय अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध का भी दंश झेल रहा है, जिसने दोनों देशों को हिलाकर रख दिया है. लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है कि किसने कितनी चौकियां हथिया लीं और किसने कितने सैनिक मारे. लेकिन आज किसी नई लड़ाई या आतंकवाद की वजह से नहीं, बल्कि अपनी मजबूत रुपया की वजह से दुनिया के सामने आया है. हां, वही अफगानिस्तान, जिसे हम आमतौर पर गरीबी और संकट के लिए जानते हैं, अब दुनिया की सबसे स्थिर मुद्राओं में से एक बन गया है. और इसका सबसे बड़ा कारण है तालिबान की सख्त नीतियां और स्थानीय लेन-देन का तरीका.

अफगानी की ताकत, भारतीय रुपये से भी आगे

पैसों के मामले में अफगान अफगानी (AFN) अब भारतीय रुपये से भी आगे निकल चुका है. मुद्रा विनिमय वेबसाइट XE.com के अनुसार, 1 अफगान अफ़ग़ानी = 1.33 भारतीय रुपये है यानी अगर अफगानिस्तान में कोई 1,00,000 अफगानी कमाता है, तो इसका भारतीय रुपये में मूल्य लगभग 1.33 लाख के बराबर है. यह आंकड़ा सच में आश्चर्यजनक है, खासकर उस देश के लिए जिसकी अर्थव्यवस्था दशकों से संघर्षरत रही है.

तालिबान की सख्त मॉनेटरी पॉलिसी

अफगानिस्तान की पैसे की यह मजबूती सीधे तालिबान सरकार की मॉनेटरी पॉलिसी से जुड़ी है. 2021 में सत्ता में आने के बाद, तालिबान ने अमेरिकी डॉलर और पाकिस्तानी रुपये के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया और ज्यादातर लेन-देन को अफगानी में करने का नियम लागू किया. इस कदम ने विदेशी मुद्रा की मांग को लगभग खत्म कर दिया और स्थानीय मुद्रा का महत्व बढ़ा दिया.

Afghanistan Afghani Stronger Than Indian Rupee : रुपए की स्थिरता के पीछे का राज

अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था छोटी होने के बावजूद, इसकी रुपए स्थिर बनी हुई है. इसका कारण है कि सीमित आयात, बहुत कम विदेशी निवेश, लगभग ठप पड़े अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और घरेलू लेन-देन का स्थानीय पैसों में होना. इन कारणों से अफगानी का मूल्य गिरने के बजाय स्थिर बना हुआ है. यही कारण है कि आज अफगान अफगानी दुनिया भर का ध्यान आकर्षित कर रहा है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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