कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भारत के चुनावों पर शुरु की वेबसाइट

न्यूयॉर्क : कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों के एक समूह ने एक वेबसाइट शुरु की है जो खासकर भारत के आगामी आम चुनावों पर केंद्रित है. यह आमजन की भाषा में होगी. द ‘फाइव फॉर्टी फाइव डॉट कॉम’ ‘‘एकल विषय वाली वेबसाइट’’ है जिसकी स्थापना कोलंबिया पत्रकारिता स्कूल के छह छात्रों द्वारा की गई है. […]
न्यूयॉर्क : कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों के एक समूह ने एक वेबसाइट शुरु की है जो खासकर भारत के आगामी आम चुनावों पर केंद्रित है. यह आमजन की भाषा में होगी.
द ‘फाइव फॉर्टी फाइव डॉट कॉम’ ‘‘एकल विषय वाली वेबसाइट’’ है जिसकी स्थापना कोलंबिया पत्रकारिता स्कूल के छह छात्रों द्वारा की गई है. इसे छात्रों, शिक्षाविदों, पेशेवरों, नौकरशाहों, पत्रकारों और ‘‘विवेकी राजनीतिक नेताओं’’ सहित ‘‘विभिन्न आवाजों’’ के लिए एक मंच के रुप में करार दिया जा रहा है. इस पर इस बारे में बात होगी कि इन लोगों के लिए चुनाव का क्या मतलब है.
एक दिन पहले बनी इस वेबसाइट के संस्थापकों में देवज्योत घोषाल, आनंद कातकम, इवा दीक्षित, इंद्राणी बसु, रिषि अयंगर और अर्पणा अलुरी शामिल हैं. इन लोगों ने 545 की संख्या को इसलिए चुना क्योंकि यह भारत में लोकसभा सीटों की संख्या है.साइट को केवल 26 घंटे के भीतर फेसबुक पर 500 लाइक मिल चुके हैं और माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर इसके 400 से अधिक फॉलोअर हैं.
वेबसाइट के ब्यौरे में कहा गया, ‘‘वेबसाइट चुनाव से जुड़ी चीजें और समाचार कठिन भाषा तथा राजनीतिक रुप से प्रेरित पत्रकारिता के बिना मुहैया कराएगी.’’ यह ऑनलाइन उपयोग के अनुरुप चार्ट्स, ग्राफिक्स और दृश्यों का इस्तेमाल करेगी.
वेबसाइट पर पहले से ही लोकतंत्र के साथ भारत के पहले अनुभव, एक टीवी चैनल के साथ राहुल गांधी के पहले साक्षात्कार और यहां तक कि प्रधानमंत्री पद के भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जैसे लोकप्रिय नेताओं के कपड़ों की शैली से संबंधित पोस्ट्स हैं.
अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. यह इसी तरह के संपर्क से जुड़ा एक प्रयास है.’’ जेन ने कहा, ‘‘हम भारत और दुनिया भर के ढेर सारे देशों के विभिन्न पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों के साथ व्यापक पहुंच बनाते हैं. और यह बस उसकी एक मिसाल है.’’
उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका किसी देश में चुनाव में कोई रुख नहीं लेता. उन्होंने कहा कि मोदी के साथ नैंसी की मुलाकात चुनाव में अमेरिका का कोई रुख अपनाने का कोई उदाहरण नहीं है.
अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम कोई रुख नहीं लेते. सो, यह उसकी कोई अभिव्यक्ति नहीं होगी. जैसा हम कई बार कह चुके हैं, यह विभिन्न पृष्ठभूमि वाले, विभिन्न राजनीतिक जुड़ाव वाले अधिकारियों की एक श्रंखला तक हमारी पहुंच का प्रतिबिंब है जो हम दुनिया भर के देशों में करते हैं.’’ जेन ने कहा कि अमेरिका की वीजा नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.
उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई व्यक्ति किसी :अमेरिकी: वीजा के लिए आवेदन करता है, उनके आवेदनों की समीक्षा अमेरिकी कानून और नीति के अनुरुप की जाती है.’’
अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह किसी बदलाव का प्रतिबिंब नहीं है..यह महज हिंदुस्तानी सरजमीन पर एक बैठक हो रही है. यह अधिकारियों की व्यापक श्रंखला तक पहुंच के अलावा किसी चीज का प्रतिबिंब नहीं है.’’जेन ने सवालों का जवाब देते हुए इन आरोपों का खंडन किया कि ओबामा प्रशासन का यह फैसला अमेरिका के कुछ मोदी समर्थक समुहों और कारोबारी समुदाय के लाबीइंग प्रयासों से हुआ है.
अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा कि यह निश्चित रुप से दुनिया भर में मानवाधिकारों की अमेरिका की दीर्घकालीन और दृढ़ वकालत में किसी भी तब्दीली का प्रतिबिंब नहीं है.
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