‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ में ब्रिटेन ने की थी भारत की मदद

Published at :04 Feb 2014 6:15 PM (IST)
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‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ में ब्रिटेन ने की थी भारत की मदद

लंदन : ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने आज संसद को बताया कि 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ में ब्रिटिश सेना की भूमिका ‘सीमित’ और ‘बिल्कुल सलाहकार की’ थी. हेग ने कहा कि ब्रिटेन ने स्वर्ण मंदिर में चलाए गए वास्तविक अभियान […]

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लंदन : ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने आज संसद को बताया कि 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ में ब्रिटिश सेना की भूमिका ‘सीमित’ और ‘बिल्कुल सलाहकार की’ थी. हेग ने कहा कि ब्रिटेन ने स्वर्ण मंदिर में चलाए गए वास्तविक अभियान में कोई भूमिका नहीं निभाई.

तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर द्वारा कथित तौर पर ब्रिटिश सहायता मुहैया किए जाने की जांच के निष्कर्ष पर एक बयान में हेग ने कहा, ‘‘रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ब्रिटेन की सहायता की प्रकृति बिल्कुल सलाहकार की और सीमित थी तथा भारत सरकार को उसकी योजना के शुरुआती चरण में यह (सलाह) मुहैया करायी गयी थी.’’

करीब 200 फाइल और 23,000 दस्तावेजों के विश्लेषण से इस बात की पुष्टि हुई है कि ब्रिटिश सेना के एक परामर्शदाता ने 8 फरवरी और 19 फरवरी 1984 के बीच भारत की यात्रा की थी. उनकी यह यात्रा मंदिर परिसर में मौजूद सशस्त्र लोगों के खिलाफ अभियान की रुप रेखा तैयार करने की आकस्मिक योजना पर भारतीय खुफिया सेवा को सलाह देने के लिए हुई थी, जिसमें उस स्थान (स्वर्ण मंदिर) की जमीनी टोह लेना भी शामिल था.हेग ने बताया कि कैबिनेट सचिव की रिपोर्ट में मौजूदा सैन्य कर्मी का एक विश्लेषण भी शामिल है, जिसके मुताबिक जून 1984 का वास्तविक अभियान फरवरी में ब्रिटिश सैन्य परमार्शदाता द्वारा दिए गए सुझाव से अलग था. ऑपरेशन ब्लूस्टार एक जमीनी हमला था. इसमें चौंकाने वाली कोई चीज नहीं थी.

कैबिनेट सचिव की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ब्रिटिश सैन्य अधिकारी की सलाह का ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ पर सीमित प्रभाव था. इस साल 15 जनवरी को ऑपरेशन कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बरार द्वारा दिए गए बयान के यह अनुरुप है, जिन्होंने कहा था कि किसी ने भी न ही हमारी योजना में हमारी मदद की और न ही इसमें अंजाम देने में. हेग ने कहा कि ये निष्कर्ष भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और थैचर के बीच 14 जून तथा 29 जून 1984 को हुए पत्रचार के अनुरुप है जिसमें ऑपरेशन पर चर्चा की गई थी. मंत्री ने सांसदों से कहा कि कैबिनेट सचिव जेरमी हेवुड की रिपोर्ट में पांच अतिरिक्त दस्तावेजों के प्रासंगिक खंडों के प्रकाशन भी शामिल किए गए हैं जिसने उस अवधि पर प्रकाश डाला है.

हेग ने बताया, ‘‘परमार्शदाता ने स्पष्ट कर दिया था कि एक सैन्य अभियान आखिरी उपाय के रुप में तभी प्रभावी होगा जब वार्ता की सारी कोशिशें नाकाम हो जाएं.’’ उन्होंने सुझाव दिया था कि हताहतों की संख्या कम रखने के लिए और शीघ्र हल के लिए हेलीकॉप्टर बलों का इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने बताया, ‘‘सैन्य सलाह देने का यह काम दोहराया नहीं गया और कैबिनेट सचिव ने उपकरण या प्रशिक्षण जैसी किसी अन्य सहायता का कोई सबूत नहीं पाया. ’’ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गोपनीय दस्तावेजों को ‘30 साल बाद सार्वजनिक किए जाने के नियम’ के तहत इस घटना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद जांच के आदेश दिये थे. दस्तावेज में कहा गया है कि एलीट स्पेशल एयर सर्विस के एक अधिकारी ने दिल्ली की यात्रा की थी और फरवरी 1984 में आतंकवादियों को निकालने की योजना तैयार करने में भारत सरकार को सलाह दी थी. इस कार्रवाई में 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे.

ब्रिटेन के सिख संगठनों ने ऑपरेशन ब्लूस्टार में ब्रिटेन की कथित भूमिका की जांच की गुंजाइश की आलोचना की है. ब्रिटेन के एकमात्र सिख सांसद पॉल उप्पल ने आज हाउस ऑफ कामंस में कहा कि रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटेन ने ऑपरेशन ब्लूस्टार में कोई ‘दुर्भावनापूर्ण’ भूमिका नहीं निभाई. वहीं, कैमरन को लिखे एक पत्र में सिख फेडरेशन यूके के अध्यक्ष भाई अमरीक सिंह ने कहा कि हम इस बात से निराश हैं कि समीक्षा की घोषणा किए जाने के तीन हफ्ते बाद और समीक्षा के नतीजों की घोषणा संसद में होने से महज कुछ दिन पहले समीक्षा की शर्तों को औपचारिक तौर पर उपलब्ध कराया गया.

पत्र में कहा गया है..ऐसा लगता है कि समीक्षा में काफी कम अवधि पर गौर किया गया और 1984 की दूसरी छमाही की अवधि को इसमें शामिल नहीं किया गया तथा पिछले तीन हफ्तों में ब्रिटेन के कुछ नेताओं द्वारा जताई गई चिंताओं पर गौर नहीं किया गया, जैसे कि प्रवासी सिखों से सहानुभूति को लेकर ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका के खिलाफ भारत द्वारा प्रतिबंध की धमकी दिया जाना. लंदन के राष्ट्रीय अभिलेखागार से दो पत्र सार्वजनिक किए गए हैं, दोनों अति गोपनीय और निजी दस्तावेज की श्रेणी में रखे गए थे. एसएएस द्वारा भारतीय अधिकारियों को दी गई सलाह के ब्योरे का इससे खुलासा हुआ है.

एक दस्तावेज वह पत्र है जिसे तत्कालीन विदेश मंत्री ज्योफ्री होव के निजी सचिव ने ‘होम ऑफिस’ में अपने समकक्ष पदाधिकारी को लिखा है. इसमें चेतावनी दी गई है कि ऑपरेशन से ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय में तनाव फैल सकता है, खासतौर पर उस वक्त, जब एसएएस की संलिप्तता सार्वजनिक हो जाएगी. ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ महीने बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने संभवत: बदले की भावना से हमला कर हत्या कर दी थी. ब्रिटेन के लोग इस योजना के बारे में कितना जानते हैं और 30 साल पहले हुई इस घटना के लिए कितनी मदद की गई, इस मुद्दे पर विवाद से कंजरवेटिव पार्टी द्वारा सिख मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिशों पर पानी फिर सकता है. ब्रिटिश सिख लंदन और लीस्टर सीट पर किसी भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

ऑपरेशन ब्लूस्टार के बारे में ब्रिटेन ने अपनी जांच के नतीजों को साझा किया: भारत

भारत ने आज कहा कि ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ पर उसने ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट और बयान को देखा है. दरअसल, ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ की योजना बनाने में ब्रिटेन की मदद ‘बिल्कुल सलाहकारी’ और ‘सीमित’ थी. विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने यहां कहा, ‘‘ब्रिटिश सरकार इस विषय के बारे में भारत सरकार को सूचना देती रही है और उसने अपनी जांच के नतीजों को भी साझा किया है. हमने रिपोर्ट और बयान देखा है.’’

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