मोदी को अमेरिका ने दिया भारतवंशियों को संबोधित करने का निमंत्रण

वाशिंगटन :अंतत: नरेंद्र मोदी को लेकर अमेरिका के रुख में परिवर्तन आया है और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस को निर्देश जारी किया है कि वह मोदी को लेकर नरम रुख अपनाये. मोदी के वीजा को लेकर जारी विवाद को अमेरिका ने मीडिया की देन बताया है और कहा है कि अगर मोदी वीजा […]
वाशिंगटन :अंतत: नरेंद्र मोदी को लेकर अमेरिका के रुख में परिवर्तन आया है और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस को निर्देश जारी किया है कि वह मोदी को लेकर नरम रुख अपनाये.
मोदी के वीजा को लेकर जारी विवाद को अमेरिका ने मीडिया की देन बताया है और कहा है कि अगर मोदी वीजा चाहते हैं, तो वे आवेदन करें उसपर विचार किया जायेगा. इसके साथ ही अमेरिका ने नरेंद्र मोदी को कैपिटल हिल में अमेरिकी कांग्रेस के नेताओं और भारतवंशियों को सैटेलाइट के जरिए संबोधित करने का न्योता भी भेजा है.
रिपब्लिकन पार्टी की नेता और सांसद कैथी मैकमॉरिस रोजर ने मोदी को भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर बधाई भी दी है. अमेरिकी सांसद का बयान 19 नवंबर को कैपिटल हिल में मनाये जाने वाले भारत दिवस से पहले आया है. इस कार्यक्रम में अमेरिका में रहे सभी प्रमुख भारतवंशी हिस्सा लेते हैं. मोदी को इसी कार्यक्रम में भाषण देने का निमंत्रण भेजा गया है.
ओबामा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका भारत में अगले आम चुनावों में भाजपा के सत्ता में आने पर प्रधानमंत्री पद के उसके उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के साथ काम करने के लिए तैयार होगा. अधिकारियों ने साथ ही कहा कि चुनाव के नतीजों से अलग दोनों देशों के मजबूत द्विपक्षीय संबंध जारी रहेंगे.
प्रधानमंत्री पद के भाजपा के उम्मीदवार के नेतृत्व में भारत की सरकार के साथ काम करने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने कल कहा, हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता के साथ काम करेंगे, इसमें कोई शक नहीं है. वीजा मामले को कोई मुद्दा न बताते हुए अधिकारी ने कहा कि यह मुख्यत: भारतीय मीडिया की देन है और अमेरिकी सरकार के लिए यह कोई मुद्दा नहीं है.
पहचान गुप्त रखने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, वीजा मामला मीडिया की देन है. उन्हें (मोदी को) आवेदन करना है और हमें समीक्षा करनी है. उन्होंने (वीजा के लिए) आवेदन नहीं किया है. अधिकारी से पूछा गया, आप कहते हैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अमेरिका के मजबूत संबंध हैं. अगर मोदी अगले साल प्रधानमंत्री बनते हैं तो क्या अमेरिका के लिए दिक्कत नहीं होगी? इसके जवाब में अधिकारी ने कहा, मुझे लगता है कि पिछली सरकार के साथ भी अमेरिका के बहुत मजबूत संबंध थे जो भाजपा के नेतृत्व में बनी थी.
अमेरिकी अधिकारी ने कहा, मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच बहुत मजबूत संबंध हैं, अमेरिका में द्विदलीय व्यवस्था है, चाहे कोई भी सत्ता में हो, ऐसा ही रहता है. हमें लगता है कि भारत की बहुदलीय व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों का समर्थन होता है और इस व्यवस्था में हम इन संबंधों के जारी रहने की उम्मीद कर सकते हैं.
एक अन्य अमेरिकी अधिकारी के अनुसार उनके देश की सरकार में मोदी को लेकर बहुत अधिक चिंताएं नहीं हैं लेकिन ऐसा समझा जाता है कि प्रशासन ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है क्योंकि इसे भारत की अंदरुनी राजनीति में हस्तेक्षेप के तौर पर देखा जा सकता है.
सूत्रों के अनुसार यथास्थिति में किसी तरह का बदलाव होने पर राजनीतिक दल चुनाव से पहले इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले साल आम चुनावों के बाद भारत का प्रधानमंत्री बनने वाले किसी भी नेता के साथ काम को तैयार है.
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