UN में मानवाधिकार का मुद्दा उठाने पर भारत से भड़का नेपाल

Updated at : 06 Nov 2015 7:49 PM (IST)
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UN में मानवाधिकार का मुद्दा उठाने पर भारत से भड़का नेपाल

काठमांडो : नेपाल के नये प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने आज कहा कि भारत से लगी सीमा के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर कथित नाकेबंदी ‘‘युद्ध से भी ज्यादा अमानवीय’ है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में नेपाल में कथित मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाने को लेकर भी भारत की आलोचना की. ओली […]

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काठमांडो : नेपाल के नये प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने आज कहा कि भारत से लगी सीमा के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर कथित नाकेबंदी ‘‘युद्ध से भी ज्यादा अमानवीय’ है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में नेपाल में कथित मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाने को लेकर भी भारत की आलोचना की.

ओली ने नेपाली पत्रकार संघ (एफएनजे) के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में कहा, ‘‘किसी युद्ध के दौरान भी मानवीय पहलू के तहत खाद्य सामग्री एवं संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है. प्रवेश बिंदुओं पर नाकेबंदी करके पडोसी देश ने हमारे देश को और मुश्किल में डाल दिया है जबकि यह 25 अप्रैल को तबाही लेकर आए भूकंप से पहले ही बुरी तरह प्रभावित है.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह आपत्तिजनक है.’ उन्होंने कहा कि नाकेबंदी की मौजूदा समस्या ‘‘कुछ तत्वों द्वारा आयातित एजेंडा’ का नतीजा है. स्थानीय मीडिया ने प्रधानमंत्री को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘नेपाल अभी अनाधिकारिक नाकेबंदी का शिकार है. लेकिन यह हमारे लिए विकल्प तलाशने का समय है.’ ओली ने इस बात पर भी असंतोष जाहिर किया कि भारत ने कथित मानवाधिकार हनन को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में नेपाल को निशाना बनाया. उन्होंने कहा, ‘‘पडोसी देश एक तरफ तो हम पर धौंस दिखा रहा है और दूसरी तरफ मानवाधिकार के मुद्दे उठा रहा है.’

ओली ने कहा, ‘‘हमारे करीबी पडोसी ने हमारी आंखें खोल दी हैं. अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता, गरिमा एवं राष्ट्रीय अखंडता को बरकरार रखकर मैं अपने देश को मौजूदा संकट से बाहर निकालने की पूरी कोशिश करुंगा.” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नाकेबंदी और उसके बाद हुई हिंसा ने नेपाली जनता में राष्ट्रवाद की भावना का संचार फिर से कर दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार तराई में प्रदर्शन कर रहे संगठनों के साथ बातचीत कर समस्याएं सुलझा लेगी.

ओली ने कहा, ‘‘मैं व्यक्तिगत तौर पर बहुत दुखी हूं और इस बात को लेकर संवेदनशील हूं कि इस संकट के कारण लोगों को बहुत कुछ सहना पड़ रहा है.” बुधवार को भारत ने यूएनएचसीआर में नेपाल से अपील की थी कि वह ‘‘सभी वर्गों” को साथ लेकर संविधान को ठोस रुप प्रदान करे. भारत ने दूसरे यूनिवर्सल पीरियाडिक रिव्यू ऑफ नेपाल में एक बयान में कहा था कि वह ‘‘देश में हिंसा, न्यायेत्तर हत्याओं और जातीय भेदभाव की घटनाओं” की जांच करे और ऐसे विश्वसनीय उपाय करे जिनसे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पहली बार नेपाल का मुद्दा उठाया था.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नेपाल में लागू किए गए नए संविधान का विरोध भारतीय मूल के मधेसियों द्वारा किया जा रहा है. मधेसी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने भारत से लगी नेपाल सीमा के प्रमुख व्यापारिक प्रवेश द्वारों पर नाकेबंदी कर दी है जिसके कारण पिछले करीब एक महीने से ईंधन एवं रसोई गैस सहित जरुरी वस्तुएं नेपाल नहीं जा पा रही हैं. दबाव का सामना कर रहे नेपाल ने त्योहारों के मौसम से पहले जरुरी सामानों की आपूर्ति के लिए चीन से लगी सीमा के व्यापारिक रास्ते खोलने का मन बनाया है.

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