मलाला ने कहा,मैंने नोबेल पुरस्कार पाने लायक काम नहीं किया

न्यूयार्क :कल नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की गयी. पाकिस्तान की मलाला युसुफजई को इस पुरस्कार का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला. इस संबंध में टिप्पणी करते हुए मलाला ने कहा कि यह बिलकुल सही फैसला है. मुझे अभी काफी काम करना है. मैंने नोबेल पुरस्कार पाने लायक […]
न्यूयार्क :कल नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की गयी. पाकिस्तान की मलाला युसुफजई को इस पुरस्कार का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला. इस संबंध में टिप्पणी करते हुए मलाला ने कहा कि यह बिलकुल सही फैसला है. मुझे अभी काफी काम करना है. मैंने नोबेल पुरस्कार पाने लायक काम नहीं किया है.
पाकिस्तानी किशोरी सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई का कहना है कि वह अपनी आदर्श बेनजीर भुट्टो के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए प्रधानमंत्री बनना चाहती है और इस पद का इस्तेमाल अपने देश की सेवा करने के लिए करना चाहती हैं.
16 वर्षीय मलाला ने सीएनएन को दिये साक्षात्कार में यहां कहा, मैं पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनना चाहती हूं, इस वर्ष शांति के लिए नोबेल पुरस्कार की शीर्ष दावेदार मलाला ने उस दिन के बारे में बात की जब तालिबान के बंदूकधारी उसकी स्कूल बस में चढ गए थे और उसके सिर पर गोली मारी थी.
मलाला ने बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने के अपने सपने, देशों और संगठनों से मिली वैश्विक पहचान, नोबल के लिए शीर्ष दावेदार होने संबंधी विचारों और पॉप स्टार जस्टिन बीबर एवं सेलेन गोमेज के गानों की अपनी पसंद के बारे में भी बात की.
मलाला पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर को अपने आदशरें में से एक मानती है और उसका कहना है कि वह उन्हें सबसे ज्यादा पसंद करती हैं.
उसने कहा कि वह पहले चिकित्सक बनने का सपना देखा करती थी लेकिन अब वह राजनीति में आना चाहती है.
मलाला ने कहा, ‘‘ मुझेलगता है कि यह बहुत अच्छा होगा क्योंकि राजनीति के जरिए मैं अपने पूरे देश की सेवा कर सकती हूं, पूरे देश की चिकित्सक बन सकती हूं, बच्चों को शिक्षित करने में मदद कर सकती हूं, स्कूल जाने में उनकी मदद कर सकती हूं, शिक्षा का स्तर सुधार सकती हूं.’’ उसने कहा, ‘‘ मैं देश की प्रधानमंत्री के तौर पर बजट से शिक्षा पर अधिक फंड खर्च कर सकती हूं और विदेशी मामलों को भी देख सकती हूं.’’
मलाला ने कहा कि तालिबान के हमले का शिकार बनने और मौत का सामना करने के बावजूद उसने सपने देखना बंद नहीं किया है और वह शिक्षा के लिए काम करना चाहती है.
मलाला ने कहा, ‘‘ तालिबान मेरे शरीर को गोली मार सकता है लेकिन वे मेरे सपनों को नहीं मार सकते.’’ उसने कहा कि तालिबान ने उसे मारने और चुप कराने की कोशिश करके अपनी ‘सबसे बड़ी’ गलती की है.
मलाला ने कहा, ‘‘ यह अभियान कभी समाप्त नहीं होने वाला. एक दिन ऐसा आयेगा जब हर बच्चा, लड़की और लड़का, काला और गोरा, इसाई और मुस्लिम स्कूल जाएगा.’’
मलाला ने कहा, ‘‘ उन्होंने मुङो गोली मारी, उन्होंने सबसे बड़ी गलती की, उन्होंने सुनिश्चित कर दिया कि मौत भी मेरा समर्थन कर रही है. मौत भी मुङो नहीं मारना चाहती और अब मुङो मरने से डर नहीं लगता. पहले मुङो मौत से डर जरुर लगता होगा लेकिन अब मुङो मौत का भय कतई नहीं है.’’
नोबेल शांति पुरस्कार के शीर्ष दावेदारों में शामिल होने के बारे में मलाला ने कहा कि खुद को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के योग्य समझने से पहले उन्हें बहुत काम करना है. उसने कहा कि उसने अपने स्कूल के पाठ्यक्रम में पहली बार इस पुरस्कार के बारे में पढा था.
मलाला ने कहा, ‘‘ जिसने भी नोबल शांति पुरस्कार जीता है, वह उसके योग्य था. लेकिन जब मैं मेरे बारे :नोबल शांति पुरस्कार जीतने के बारे: में सोचती हूं तो मुझेलगता है कि मुझेअब भी बहुत कुछ करना है, अभी मेरी उम्र काफी कम है.’’
उसने कहा, ‘‘ मैं जब शिक्षा के लिए काम करुंगी तब मैं गौरवान्वित महसूस करुंगी. मैं तब गौरवान्वित महसूस करुंगी जब मैं कुछ कर लूंगी, जब मैं स्कूल बनाउंगी और कई बच्चों को वहां भेज दूंगी. उसके बाद यदि मैं यह पुरस्कार जीतूंगी तो मैं कहूंगी कि मैं इसकी हकदार हूं.’’
मलाला ने कहा कि नोबल पुरस्कार एक बड़ा सम्मान होगा और यह बड़ी जिम्मेदारी भी होगी. यह पुरस्कार उसे लड़कियों की शिक्षा की मुहिम आगे ले जाने में मदद करेगा.
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