भारत नहीं, चीन के पक्ष में है असंतुलित व्यापार: वी के सिंह

Published at :11 Jun 2015 10:20 PM (IST)
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भारत नहीं, चीन के पक्ष में है असंतुलित व्यापार: वी के सिंह

बीजिंग: भारत ने आज कहा कि चीन के साथ असंतुलित व्यापार से पैदा हुए 47 अरब डॉलर के व्यापार घाटे के मुद्दे को सक्रियता से सुलझाने की जरुरत है और इसके लिए आईटी व कृषि जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रतिस्पर्धी भारतीय उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देनी होगी. विदेश राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी के […]

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बीजिंग: भारत ने आज कहा कि चीन के साथ असंतुलित व्यापार से पैदा हुए 47 अरब डॉलर के व्यापार घाटे के मुद्दे को सक्रियता से सुलझाने की जरुरत है और इसके लिए आईटी व कृषि जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रतिस्पर्धी भारतीय उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देनी होगी.

विदेश राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी के सिंह ने यहां इंडिया चाइना इकनामिक एंड टूरिज्म कॉपरेशन फोरम में यह बात कही. उन्होंने कहा,ह्य इस तरह का अंसतुलित व्यापार दीर्घकालिक स्तर पर किसी भी देश के हित में नहीं है. दोनों सरकारें इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कदम उठाने व कठोर प्रयास करने को प्रतिबद्ध हैं.उन्होंने कहा, इस घाटे को सक्रियता से दूर किए जाने की जरुरत है.

उल्लेखनीय है कि इस मंच का आयोजन कुनमिंग शहर में व्यापार मेले (चाइना साउथ एशिया फेयर) के साथ किया गया. सिंह ने कहा कि बढते व्यापार घाटे का जवाब आईटी व कृषि जैसे क्षेत्रों में उन भारतीय उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देना है जो कि बेहतर प्रतिस्पर्धी हैं.

हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि द्विपक्षीय व्यापार संतुलित तरीके से नहीं बढा है. सिंह ने कहा, द्विपक्षीय व्यापार बढा है लेकिन यह संतुलित नहीं है. दोनों पक्षों ने बढते व्यापार असंतुलन से उपजी चुनौती तथा इसके द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभावों को माना है.

वी के सिंह ने कहा कि पिछले साल व्यापार घाटा बढकर 70.59 अरब डालर के कुल व्यापार में 47 अरब डालर से अधिक हो गया. अधिकारियों का कहना है कि यह भारत के कुल व्यापार घाटे का एक तिहाई है.इस बैठक में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, चीन में भारत के राजदूत अशोक के कंठ व चीन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. उल्लेखनीय है कि पांच दिन के इस मेले में इस बार भारत को सम्मानित देश का दर्जा दिया गया है. मेले में भारतीय दूतावास ने काफी रंगीन पैवेलियन बनाया है.

सिंह ने कहा, द्विपक्षीय निवेश हमारी चीन भारत आर्थिक भागीदारी की अगुवा बन सकती है. उन्होंने कहा कि वे चीन की कंपनियों को भारत की आर्थिक वृद्धि व विकास में भागीदार बनने का निमंत्रण देते हैं.मंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया अभियान से चीन की कंपनियों के पास भारत के विकास में चीन के योगदान के बारे में जागरुकता फैलाने का स्वर्णिम अवसर है.

उन्होंने कहा, चीन द्वारा निवेशित, मेड इन इंडिया को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. इसके साथ ही सिंह ने सुझाव दिया कि भारत व चीन को बांग्लादेश, चीन, भारत व म्यांमा (बीसीआईएम) आर्थिक गलियारे में तीव्र सहयोग को बढावा देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत पर्यटन के क्षेत्र में मौजूदा अवसरों का फायदा उठाना चाहेगा. उन्होंने इस संबंध में ई वीजा सुविधा का भी जिक्र किया और कहा मैं चीन में अपने दोस्तों से इस सुविधा का फायदा उठाने को कहूंगा.

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