क्या होता है बॉलरूम, व्हाइट हाउस शूटिंग के बाद ट्रंप ने इसकी जरूरत पर क्यों दिया बल ?

डोनाल्ड ट्रंप
Donald Trump : व्हाइट हाउस में हुई फायरिंग के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि इस फायरिंग के केंद्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही थे. अमेरिका में उनपर हमले की पहले भी कोशिश हो चुकी है. यही वजह है कि ट्रंप ने एक बार फिर सुरक्षित बॉलरूम की मांग को मजबूती से दोहराया है.
Donald Trump : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस डिनर में हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर व्हाइट हाउस परिसर में अत्याधुनिक और सुरक्षित बॉलरूम बनाने की मांग दोहराई है. ट्रंप ने कहा कि अगर व्हाइट हाउस में मिलिट्री-लेवल टॉप सीक्रेट बॉलरूम मौजूद होता, तो यह घटना कभी नहीं होती.
सुरक्षित बॉलरूम की जरूरत
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि पिछले कई वर्षों से अमेरिकी राष्ट्रपति इस तरह के सुरक्षित बॉलरूम की मांग करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि नया बॉलरूम न सिर्फ खूबसूरत होगा, बल्कि उसमें उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुविधाएं होंगी और यह व्हाइट हाउस परिसर के भीतर बनेगा, जहां बाहरी लोगों की पहुंच बेहद सीमित रहेगी. ट्रंप ने कहा कि बॉलरूम के निर्माण में किसी तरह की कोई बाधा नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के डिनर का आयोजन इसी तरह के बॉलरूम में होगा.
सीक्रेट बॉलरूम क्या होता है?
मिलिट्री-लेवल टॉप सीक्रेट बॉलरूम बनाने का आइडिया ट्रंप का है.बॉलरूम एक तरह का बंकर होता है, जहां सुरक्षा सुविधाएं उच्च स्तर की होती हैं. यहां बम के हमले का कोई असर नहीं होता है.यह देखने में हाॅल की तरह होता है, लेकिन यहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम होते हैं और यहां बहुत सीमित लोगों की पहुंच होती है.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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