क्या होता है बॉलरूम, व्हाइट हाउस शूटिंग के बाद ट्रंप ने इसकी जरूरत पर क्यों दिया बल ?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 27 Apr 2026 6:57 AM
डोनाल्ड ट्रंप
Donald Trump : व्हाइट हाउस में हुई फायरिंग के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि इस फायरिंग के केंद्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही थे. अमेरिका में उनपर हमले की पहले भी कोशिश हो चुकी है. यही वजह है कि ट्रंप ने एक बार फिर सुरक्षित बॉलरूम की मांग को मजबूती से दोहराया है.
Donald Trump : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस डिनर में हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर व्हाइट हाउस परिसर में अत्याधुनिक और सुरक्षित बॉलरूम बनाने की मांग दोहराई है. ट्रंप ने कहा कि अगर व्हाइट हाउस में मिलिट्री-लेवल टॉप सीक्रेट बॉलरूम मौजूद होता, तो यह घटना कभी नहीं होती.
सुरक्षित बॉलरूम की जरूरत
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि पिछले कई वर्षों से अमेरिकी राष्ट्रपति इस तरह के सुरक्षित बॉलरूम की मांग करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि नया बॉलरूम न सिर्फ खूबसूरत होगा, बल्कि उसमें उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुविधाएं होंगी और यह व्हाइट हाउस परिसर के भीतर बनेगा, जहां बाहरी लोगों की पहुंच बेहद सीमित रहेगी. ट्रंप ने कहा कि बॉलरूम के निर्माण में किसी तरह की कोई बाधा नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के डिनर का आयोजन इसी तरह के बॉलरूम में होगा.
सीक्रेट बॉलरूम क्या होता है?
मिलिट्री-लेवल टॉप सीक्रेट बॉलरूम बनाने का आइडिया ट्रंप का है.बॉलरूम एक तरह का बंकर होता है, जहां सुरक्षा सुविधाएं उच्च स्तर की होती हैं. यहां बम के हमले का कोई असर नहीं होता है.यह देखने में हाॅल की तरह होता है, लेकिन यहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम होते हैं और यहां बहुत सीमित लोगों की पहुंच होती है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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