ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे अबोट

सिडनी : शरण लेने आईं नावों को रोकने की विवादास्पद योजना वाले टोनी अबोट आज ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री के रुप में आधिकारिक तौर पर शपथ लेंगे.55 वर्षीय इस कंजर्वेटिव नेता ने संकल्प किया है कि वे लेबर प्रशासन के दौरान कारपोरेट प्रदूषण और खनन मुनाफे पर लगाए गए करों को जल्दी ही हटा देंगे. […]
सिडनी : शरण लेने आईं नावों को रोकने की विवादास्पद योजना वाले टोनी अबोट आज ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री के रुप में आधिकारिक तौर पर शपथ लेंगे.55 वर्षीय इस कंजर्वेटिव नेता ने संकल्प किया है कि वे लेबर प्रशासन के दौरान कारपोरेट प्रदूषण और खनन मुनाफे पर लगाए गए करों को जल्दी ही हटा देंगे. इसके अलावा उन्होंने महंगी सवेतन अभिभावक अवकाश योजना और 21वीं सदी के लिए सड़कें बनाने की भी बात कही है.
उन्होंने शरण के लिए आई नावों को रोकने की योजना लागू करने का संकल्प लिया. इस योजना के तहत ये नावें आज से ही वापस इंडोनेशिया भेज दी जाएंगी. आज से ही इस योजना के लागू हो जाने से उनकी इच्छाशक्ति का शुरुआती परीक्षण हो सकता है.
ऑस्ट्रेलिया जजर्र और लदी हुई नावों में आने वाले शरणार्थियों के प्रबंधन की समस्या से दो चार हो रहा है. ये नावें अधिकतर इंडोनेशिया में भरी जाती हैं. यह मुद्दा चुनाव में मुख्य तौर पर उछाला गया. हाल के वर्षों में इन जोखिम भरी यात्रओं में सैंकड़ों लोग मारे जा चुके हैं.अबोट ने इस कदम को सहमति देते हुए ‘अपने चुनावी वादे शांतिपूर्ण तरीके से, समझबूझकर और क्रमबद्ध तरीके से पूरे करने की बात’ की और कहा कि सरकार के सामने मुख्य चुनौती जनता का विश्वास बनाए रखना है.7 सितंबर को हुए चुनावों में पड़े डाक से डाले गए वोटों की गणना अभी जारी है लेकिन 150 सीटों वाले ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स’ :प्रतिनिधि सभा: में कंजर्वेटिव 90 सीटें हासिल करने की ओर अग्रसर हैं. लेबर के हिस्से 55 सीटें आई हैं.
इससे अबोट को एक स्पष्ट बहुमत मिल जाता है. हालांकि उपरी सदन के गठन के बारे में स्थिति अभी साफ नहीं है. ऐसा लगता है कि छह छोटी पार्टियों के प्रत्याशी सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए सीटें हासिल कर सकते हैं, जिससे नई सरकार के लिए विधायी जटिलताएं हो सकती हैं.अबोट और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य केविन रड पर अपनी जीत और लेबर शासन के छह साल की समाप्ति के 11 दिन बात कैनबरा में शपथ लेंगे.
उन्हें यह शपथ गर्वनर जनरल क्वेनटिन ब्रायेस दिलवाएंगे.हालांकि चुनावों के बाद से ही अबोट ज्यादा सुर्खियों में आने से बचे लेकिन मंत्रिमंडल में सिर्फ एक महिला को लिए जाने पर वे आलोचनाओं की जद में आ गए. इनके मंत्रिमंडल में जूली बिशप एकमात्र महिला हैं, जिन्हें विदेश मंत्री बनाया गया है.पिछली लेबर सरकार के मंत्रिमंडल में छह महिलाएं थीं.
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