‘अमन के मसीहा’ भारत के सत्यार्थी और पाक की मलाला को मिला शांति का नोबेल

Published at :10 Dec 2014 6:02 PM (IST)
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‘अमन के मसीहा’ भारत के सत्यार्थी और पाक की मलाला को मिला शांति का नोबेल

ओस्लो :भारतीय उप महाद्वीप में बाल अधिकारों को बढावा देने में शानदार काम के लिए आज ‘एक भारतीय-पाकिस्तानी’, हिंदू-मुस्लिम ‘अमन के मसीहा’ कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को इस साल के शांति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया. नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद कैलाश सत्यार्थी ने अपना संबोधन हिंदी में शुरू किया.उन्होंने […]

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ओस्लो :भारतीय उप महाद्वीप में बाल अधिकारों को बढावा देने में शानदार काम के लिए आज ‘एक भारतीय-पाकिस्तानी’, हिंदू-मुस्लिम ‘अमन के मसीहा’ कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को इस साल के शांति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया.

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद कैलाश सत्यार्थी ने अपना संबोधन हिंदी में शुरू किया.उन्होंने वेद के एक श्लोक का उच्चरण किया –‘संगच्छद्वं संवद्वं सवेमणाअसि जानताम्’अर्थात हम सब मिलकर चलें, मिलकर सोचे, मिलकर संकल्प करें.

उन्होंने कहा कि मैं हर बच्चे को मुक्त कराने में स्वयं की मुक्ति देखता हूं. उन्होंने कहा कि वे महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी की धरती से पश्चिम के इस धरती पर पहुंचे हैं. उन्होंने नोबेल के मंच को पवित्रता व शांति का मंच बताया और नोबेल की प्राप्ति को अपने शहीद साथियों को समर्पित किया. इनमें कालू कुमार, आदर्श किशोर और पाकिस्तान किशोर इकबाल मसीज आदि का उन्होंने उल्लेख किया.

बचपन बचाओ आंदोलन के अगुवा कैलाश सत्यार्थी शांति नोबल पुरस्कार पाने वाले भारत के पहले व्यक्ति हैं. इसी तरह मलाला भी पाकिस्तान की तरफ से शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाली पहली शख्सियत हैं.

नार्वे की नोबेल समिति के प्रमुख थोर्बजोर्न जगलांद ने पुरस्कार प्रदान करने से पहले अपने संबोधन में कहा, ‘‘सत्यार्थी और मलाला निश्चित तौर पर वही लोग हैं जिन्हें अलफ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में शांति का मसीहा कहा था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘एक लडकी और एक बुजुर्ग व्यक्ति, एक पाकिस्तानी और दूसरा भारतीय, एक मुस्लिम और दूसरा हिंदू, दोनों उस गहरी एकजुटता के प्रतीक हैं जिसकी दुनिया को जरुरत है. देशों के बीच भाईचारा.’’ सत्यार्थी (60) ने इक्लेट्रिकल इंजीनियरिंग की नौकरी छोडकर बाल अधिकार के क्षेत्र में काम करना आरंभ किया और वह ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ नामक गैर सरकारी संगठन का संचालन करते हैं.

दूसरी ओर तालिबान के हमले में बची 17 साल की मलाला लडकियों की शिक्षा की पैरोकारी करती हैं. शांति के नोबेल के लिए दोनों के नामों का चयन नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने बीते 10 अक्तूबर को किया था.

सत्यार्थी और मलाला को नोबेल का पदक मिला जो 18 कैरेट ग्रीन गोल्ड का बना है और उस पर 24 कैरेट सोने का पानी चढा हुआ है तथा इसका कुल वजन करीब 175 ग्राम है. वे 11 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि को साझा करेंगे.

हिंसा और दमन को किसी भी धर्म में उचित नहीं ठहराए जाने का जिक्र करते हुए जगलांद ने कहा कि इस्लाम, ईसाई, जैन, हिंदू और बौद्ध जीवन की रक्षा करते हैं और जीवन लेने के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकते.

उन्होंने कहा, ‘‘जिन दो लोगों को हम आज यहां सम्मानित करने के लिए खडे हैं वे इस बिंदु पर बहुत खरे हैं. वे उस सिद्धांत के मुताबिक रहते हैं जिसकी अभिव्यक्ति गांधी ने की थी. उन्होंने कहा था: कई ऐसे उद्देश्य हैं जिनके लिए मैं अपने प्राण दे दूं. ऐसा कोई उद्देश्य नहीं हैं जिसके लिए मैं हत्या करुं.’ ’’ सत्यार्थी के गैर सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने भारत में कारखानों और दूसरे कामकाजी स्थलों से 80,000 से अधिक बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के मुताबिक दुनिया भर में 16.8 करोड बाल श्रमिक हैं. माना जाता है कि भारत में बाल श्रमिकों का आंकडा 6 करोड के आसपास है.

मलाला को पिछले साल भी शांति के नोबेल के लिए नामांकित किया गया था. उन्होंने तालिबान के हमले के बावजूद पाकिस्तान सरीखे देश में बाल अधिकारों और लडकियों की शिक्षा के लिए अपने अभियान को जारी रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया.

पुरस्कार ग्रहण करने के बाद सत्यार्थी ने वहां उपस्थित दर्शकों से कहा कि वे अपने भीतर बच्चे को महसूस करें और उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध के लिए सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘बच्चे हमारी अकर्मणयता को लेकर सवाल कर रहे हैं और हमारे कदम को देख रहे हैं.’’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी धर्म बच्चों की देखभाल करने की शिक्षा देते हैं.

बाल श्रमिकों की संख्या में कमी का जिक्र करते हुए सत्यार्थी ने कहा, ‘‘मेरा सपना है कि हर बच्चे को विकास करने के लिए मुक्त किया जाए..बच्चों के सपनों को पूरा नहीं होने देना से बडी हिंसा कुछ नहीं है.’’ समाज के कमजोर तबकों के लोगों के साथ के अपने अनुभव को साझा करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा, ‘‘मैं उन करोडों बच्चों का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जिनकी आवाजें दबी हुई हैं और वे कहीं गुमनामी में जी रहे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस सम्मान का श्रेय उन लोगों को जाता है जिन्होंने बच्चों को मुक्त कराने के लिए काम किया और त्याग दिया.’’ नोबेल पुरस्कार समारोह में पाकिस्तान के मशहूर गायक राहत फतेह अली खान और भारतीय संगीत जगत के चर्चित के नाम अमजद अली खान ने जलवा बिखेरा.

यहां पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी भी मौजूद थे.

गौरतलब है कि नोबेल पुरस्कार के ऐलान के बाद मलाला ने दिली इच्छा जताई थी कि दोनों मुल्कों के प्रधानमंत्री पुरस्कार प्राप्त करने के वक्त मौजूद रहें, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.आज ही नौ अन्य नोबेल विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा.

आज फ्रांस के पैट्रिक मोदियानो को नोबेल साहित्य पुरस्कार, अमेरिकी-ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन ओ-कीफ एवं नॉर्वे की पति-पत्नी की जोडी एडवर्ड और मे-ब्रिट मोजर को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार, जापानी वैज्ञानिकों इसामू अकासाकी एवं हिरोशी अमानो और जापानी मूल के अमेरिकी शुजी नाकामुरा को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा.

वहीं अमेरिका के एरिक बेटजिग एवं विलियम मोएरनर एवं जर्मनी के स्टीफन हेल को रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जबकि फ्रांस के ज्यां तिरोले को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा.

ओस्लो में सम्राट हेराल्ड वी और महारानी सोन्जा, नॉर्वे सरकार, नॉर्वे की संसद स्टॉर्टिंग के प्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथियों की मौजूदगी में नॉर्वेजियन नोबेल कमिटी के प्रमुख ने नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया.

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