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नरेंद्र मोदी : सत्ता के शीर्ष पर सादगी भरा जीवन

Updated at : 17 Sep 2016 7:12 AM (IST)
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नरेंद्र मोदी : सत्ता के शीर्ष पर सादगी भरा जीवन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जीवन के 67वें साल में कदम रखेंगे. इस उम्र में भी वे युवा जोश, अदम्य ऊर्जा और प्रतिबद्धता से लबरेज व्यक्तित्व के धनी हैं. प्रधानमंत्री के रूप में बीते करीब सवा दो बरस के कार्यकाल में उन्होंने देश का नेतृत्व करने की अपनी क्षमता और कुशलता का परिचय दिया है. उनकी […]

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जीवन के 67वें साल में कदम रखेंगे. इस उम्र में भी वे युवा जोश, अदम्य ऊर्जा और प्रतिबद्धता से लबरेज व्यक्तित्व के धनी हैं. प्रधानमंत्री के रूप में बीते करीब सवा दो बरस के कार्यकाल में उन्होंने देश का नेतृत्व करने की अपनी क्षमता और कुशलता का परिचय दिया है. उनकी राजनीतिक धारा और प्रशासनिक नीतियों से किसी को मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता कि उनके कतिपय चारित्रिक गुण सार्वजनिक जीवन के मौजूदा वातावरण में उन्हें विशिष्ट बनाते हैं. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के निर्वाचित प्रधानमंत्री होने के बावजूद उन्होंने अपने को परिवारवाद की राजनीति से बचाये रखा है. ऐसे राजनेता न सिर्फ भारत में, बल्कि समूचे दक्षिण एशिया में गिने-चुने ही हैं. भाई-भतीजावाद ने देश के राजनीतिक परिवेश को बुरी तरह से अपने चंगुल में ले रखा है, लेकिन मोदी का परिवार आज भी मामूली आयवर्ग का है.

जनता से सीधे संवाद को बढ़ावा देकर उन्होंने सरकार और नागरिकों के बीच के बड़े फासले को काफी हद तक कम किया है. पीएम बनने के बाद भी बेहद सादगी के साथ जीवन जीनेवाले नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल पर सकारात्मक असर डाला है, बल्कि नयी पीढ़ी के लिए आदर्श बन कर भी उभरे हैं. गुजरात के ऐतिहासिक नगर वडनगर के गरीब परिवार में 17 सितंबर, 1950 को जन्मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनके व्यक्तिगत जीवन की कुछ विशिष्टताओं के साथ उनकी लोकप्रियता के विस्तार और संवादधर्मिता पर विशेष प्रस्तुति…

पीएम निवास की साज-सज्जा नहीं

यह आम परिपाटी-सी बन चुकी है कि शीर्ष पदों पर नियुक्त कोई नया व्यक्ति जब अपने आधिकारिक निवास में पहुंचता है, उसकी साज-सज्जा पर भारी रकम खर्च करता है. इस तरह के खर्च का भुगतान सरकार करती है. लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके अपवाद हैं, जबकि खुद उनके कई मंत्रियों ने अपने सरकारी दफ्तरों और आवासों को महंगी चीजों से सजाया है.

मई, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी के आधिकारिक निवास- सात, रेसकोर्स रोड- में उनके व्यक्तिगत उपयोग के लिए निर्धारित कमरों में एलइडी बल्ब लगाने और पुराने पड़ चुके एअर कंडीशनर सिस्टम को हटाने के अलावा कोई नया बदलाव नहीं किया गया है.

अंगरेजी अखबार ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर प्रधानमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर हुए खर्च का ब्योरा मांगा था. इस महीने दिये अपने जवाब में विभाग ने बताया है कि प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत कमरों में ट्यूबलाइटों की जगह कम बिजली से चलने और अधिक रोशनी देनेवाले एलइडी बल्ब लगाये गये हैं. इसके अलावा एसी सिस्टम इसलिए बदलना पड़ा, क्योंकि उसके इस्तेमाल की मियाद पूरी हो चुकी थी. इन दो मामूली बदलावों के अलावा किसी तरह की मरम्मत या नया निर्माण नहीं हुआ है, और न ही कोई नयी चीज लगायी गयी है.

अवकाश भी नहीं

सभी पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री अपने ज्यादातर काम आवास पर स्थित कार्यालय से ही निबटाते थे, लेकिन मोदी दिल्ली में होने पर साउथ एवेन्यू के प्रधानमंत्री कार्यालय में सुबह नौ बजे पहुंच जाते हैं. हालांकि उनकी ज्यादातर बैठकें सात रेस कोर्स रोड में ही होती हैं, जो अक्सर आधी रात तक चलती हैं. सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया है.

परिवार के फिक्रमंद परिवारवाद के नहीं

यह हमारे देश की राजनीति की एक विडंबना ही है कि ज्यादातर पार्टियों के प्रमुख नेता न सिर्फ परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि अपने परिजनों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखते हैं. लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में विरले नेताओं की सूची में हैं.

उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक जिम्मेवारियों से परिवार को हमेशा अलग रखा है. उनके धुर राजनीतिक विरोधी भी यह तोहमत नहीं लगा सकते कि बतौर मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री उन्होंने अपने किसी परिजनों को कोई बेजा फायदा पहुंचाया है. हालांिक प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे अपनी मां और नजदीकी िरश्तेदारों का िनयमित रूप से हालचाल लेते रहते हैं. इस महीने की छह तारीख को प्रधानमंत्री की भतीजी निकुंजबेन मोदी का देहांत हो गया. वे प्रधानमंत्री के छोटे भाई प्रह्लाद मोदी की बेटी थीं और बीते 8-9 सालों उन्हें दिल की बीमारी थी.

उनकी हालत गंभीर होने की खबर पाते ही मोदी ने चीन में जी-20 बैठक से लौटने पर परिवारजनों को फोन कर हाल पूछा. उन्होंने मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार और कर्मकांड पूरा होने की जानकारी ली. निकुंजबेन अपने पति, बेटा और बेटी के साथ किराये के मकान में रहती थीं. रिपोर्टों के मुताबिक उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. पति जगदीश कुमार मोदी प्राइवेट कंपनियों में कंप्यूटर मरम्मत का काम करते हैं तथा निंकुजबेन अतिरक्त आमदनी के लिए ट्यूशन और सिलाई का काम करती थीं.

आम दिनचर्या

जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मात्र चार घंटे की नींद लिया करते हैं और बाकी समय में अपने काम में जुटे रहना पसंद करते हैं. वे सुबह से लेकर रात तक देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहते हैं. रोज सुबह चार बजे वे बिस्तर छोड़ देते हैं और उसके बाद फिर रात को ही लेटते हैं. तड़के सुबह उठने की उनकी बहुत पुरानी आदत है. योग, व्यायाम और चहलकदमी जैसी क्रियाएं भी उन्हें भाती हैं.

सादा भोजन

उन्हें सुबह हल्के नाश्ते के साथ अदरक की चाय पीना पसंद है. मोदी कम खाते हैं और सामान्यतः उन्हें खिचड़ी, कढ़ी, उपमा, खाकरा जैसे गुजराती और उत्तर भारतीय व्यंजन भाते हैं, जिन्हें उनके रसोइये बद्री मीना द्वारा तैयार किया जाता है.

बच्चों के खतों के जवाब देते हैं पीएम

अपने व्यस्त कार्यक्रम और अलग-अलग देशों के दौरे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों के खतों का जवाब देना नहीं भूलते. रेडियो पर प्रसारित होनेवाले कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बकायदा अच्छे खतों का जिक्र भी करते हैं. मोदी ऐसे लोगों को, जो विषम परिस्थितियों में रहते हुए भी समाज के लिए रोशनी दिखाते हैं, प्रोत्साहित भी करते रहते हैं. यह सिलसिला प्रधानमंत्री बनने के बाद ही शुरू हो गया था. 2014 में अपने दूसरे ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मोदी ने कहा था कि जो नागरिक इंटरनेट व सोशल मीडिया नहीं होने से ई-मेल, फेसबुक, ट्विटर आदि का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, वे उन्हें पत्र लिख सकते हैं. इसके लिए उन्होंने अपना पता ‘मन की बात’, अकाशवाणी, संसद मार्ग, नयी दिल्ली’ बताया था.

इसके बाद पत्र-व्यवहार का सिलसिला शुरू हो गया. बच्चों के पत्रों का वह विशेष रूप से जवाब लिखते हैं. जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, चौथी क्लास में पढ़नेवाली उनकी एक ‘छुटकी बहन’ रिपल प्रजापति ने पहली बार उन्हें राखी बांधी थी. भैया मोदी ने रिपल को खूब मेहनत से पढ़ने की सलाह और उपहार में भगवद् गीता दी थी. रिपल अब बड़ी होने पर भी हर साल अपने ‘भैया’ को राखी भेजती हैं और प्रधानमंत्री उनके पत्रों का जवाब लिखते हैं.

मुंबई की रहनेवाली 16 वर्षीय ऐश्वर्या कांके भी नरेंद्र मोदी को चिट्ठियां लिखती हैं और प्रधानमंत्री ऐश्वर्या की हैंड राइटिंग की प्रशंसा भी करते हैं. नेशनल पब्लिक स्कूल, बेंगलुरु में पढ़नेवाले तीसरी क्लास के अभिनव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर शहर में बन रहे फ्लाइओवर के निर्माण की वजह से स्कूल जाने में देरी पर ध्यान दिलाया था. इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से रेल मंत्रालय को जरूरी निर्देश दिया गया था. लुधियाना की 10वीं में पढ़नेवाली जाह्नवी बहल को प्रधानमंत्री ने उत्कृष्ट सामाजिक कार्य के लिए प्रशंसा पत्र लिखा था. साथ में प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्वामी विवेकानंद की एक जीवनी भी भेंट की थी. जाह्नवी कन्या भ्रूणहत्या पर रोक, स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं.

सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय

‘भारत की विजय. अच्छे दिन आनेवाले हैं.’ मई, 2014 की एक गर्म दुपहरी में यह ट्वीट इस बात की उद्घोषणा थी कि भारत के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे. मोदी द्वारा किया गया यह ट्वीट कई दिनों तक सोशल मीडिया पर सबसे लोकप्रिय बयान बना रहा था. आज भी यह भारत का सबसे अधिक रिट्वीट किया गया ट्वीट है.

मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले से ही कंप्यूटर और इंटरनेट का खूब इस्तेमाल करते रहे हैं. अपने एक ब्लॉग में उन्होंने 2014 के चुनाव के बारे में लिखा है कि ‘यह भारत का पहला चुनाव है, जिसमें सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आनेवाले सालों में इस माध्यम का महत्व उत्तरोत्तर बढ़ता ही जायेगा.

यह सूचना का सीधा माध्यम बन गया है और इससे स्थानीय स्तर की जरूरी हलचलों का पता चलता है.’ उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ अपने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालयों और विभागों को सोशल मीडिया के भरपूर उपयोग का निर्देश भी जारी किया है. इससे जनता और सरकार के बीच सीधे संवाद का वातावरण तैयार हुआ है.

ट्वीटर और फेसबुक पर राजनेताओं में मोदी से अधिक फॉलोवर सिर्फ राष्ट्रपति ओबामा के हैं. ट्वीटर पर उनकी सक्रियता और लोकप्रियता का पता इस तथ्य से चलता है कि वे दुनिया के पांच सबसे अधिक फॉलोवरों वाले राजनेता हैं. इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के अलावा डोनाल्ड ट्रंप, अरविंद केजरीवाल और हिलेरी क्लिंटन जैसी हस्तियां शामिल हैं.

मोदी का अपना एक मोबाइल एप्प भी है, जिसे 20 लाख से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं. फेसबुक और ट्वीटर पर प्रधानमंत्री कार्यालय के पेज और हैंडल को फॉलो करनेवालों की संख्या व्हाइट हाउस और पोटस से अधिक है.

जनता से सीधा संवाद : सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के संवाद की व्यापकता का अनुमान इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि उनके पेज के जरिये लाइक, शेयर और कमेंट के रूप में हर महीने करीब चार करोड़ इंगेजमेंट फेसबुक पर और करीब 1.70 करोड़ इंगेजमेंट ट्वीटर हैंडल पर होता है. सिर्फ जुलाई के महीने में ही दो लाख नये लोग नरेंद्र मोदी मोबाइल एप्प पर सक्रिय थे.

इस एप्प पर रोजाना करीब एक लाख लोग पहुंचते हैं. औसतन 17 से 20 करोड़ लोग हर महीने उनके फेसबुक पेज को देखते हैं. सोशल मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि ओबामा के कुछ महीनों में सेवानिवृत्त हो जाने के बाद नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता बन जायेंगे और नये अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए मौजूदा फासले को पूरा कर पाना खासा मुश्किल होगा.

सबसे प्रशंसित वैश्विक व्यक्तित्वों में

पिछले साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वेक्षण में नरेंद्र मोदी को दुनिया के सबसे प्रशंसित लोगों की श्रेणी में रखा गया है. फोरम का यह सर्वेक्षण 125 देशों के 285 शहरों के 1,084 लोगों की राय पर आधारित है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को सर्वाधिक प्रशंसित व्यक्ति माना गया है. महात्मा गांधी चौथे और प्रधानमंत्री मोदी 10वें स्थान पर हैं. इस सूची में मंडेला, गांधी और स्टीव जॉब्स के अलावा सभी व्यक्ति जीवित हैं, जिनमें पोप फ्रांसिस, एल्न मस्क, बिल गेट्स, बराक ओबामा मोहम्मद युनूस और वारेन वफे जैसी हस्तियां शामिल हैं.

– कैसा लगी यह प्रस्तुित, भेजें अपनी राय- delhi@prabhatkhabar.in

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