जम्मू एवं कश्मीर पर वर्ष 1994 का संसदीय प्रस्ताव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Sep 2019 2:00 AM
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फ रवरी 22, 1994 को संसद के दोनों सदनों में जम्मू एवं कश्मीर पर यह प्रस्ताव अध्यक्षीय पदाधिकारियों द्वारा पेश किया गया, जिसे दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से अंगीकृत किया गया. अब तक भी इसे न तो निरस्त किया और न ही संशोधित किया गया है. इस प्रस्ताव का पूरा पाठ इस प्रकार है: ‘यह […]
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फ रवरी 22, 1994 को संसद के दोनों सदनों में जम्मू एवं कश्मीर पर यह प्रस्ताव अध्यक्षीय पदाधिकारियों द्वारा पेश किया गया, जिसे दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से अंगीकृत किया गया. अब तक भी इसे न तो निरस्त किया और न ही संशोधित किया गया है. इस प्रस्ताव का पूरा पाठ इस प्रकार है:
‘यह सदन’
अव्यवस्था, असामंजस्य तथा विध्वंस फैलाने के स्वीकृत उद्देश्य से पकिस्तान एवं पाकिस्तानी कब्जे के कश्मीर में स्थित शिविरों में आतंकियों को प्रशिक्षण दिये जाने, हथियारों तथा निधियों की आपूर्ति करने, भाड़े के विदेशी सैनिकों समेंत प्रशिक्षित उग्रवादियों की जम्मू एवं कश्मीर में घुसपैठ कराने में सहायता के कार्यों में पकिस्तान की भूमिका को गहरी चिंता के साथ दर्ज करता है;
इसे दुहराता है कि पकिस्तान में प्रशिक्षित उग्रवादी लोगों को बंधक बनाते हुए तथा आतंक का वातावरण बनाते हुए उनके विरुद्ध हत्या, लूट, एवं अन्य जघन्य अपराधों में संलग्न हैं;
भारतीय राज्य जम्मू एवं कश्मीर में विध्वंसक तथा आतंकी गतिविधियों को पकिस्तान द्वारा दिये जा रहे सतत समर्थन तथा प्रोत्साहन की कड़ी निंदा करता है;
पकिस्तान से मांग करता है कि वह आतंकवाद को अपना समर्थन तत्काल बंद करे, जो शिमला समझौते एवं अंतर-राज्यीय बर्ताव के अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकृत मानदंडों का उल्लंघन और दोनों देशों के बीच तनाव का मूल कारण है; यह दुहराता है कि भारतीय राजनीतिक और लोकतांत्रिक संरचना तथा संविधान इसके सभी नागरिकों के मानवाधिकारों को प्रोत्साहन तथा सुरक्षा प्रदान करने की दृढ़ गारंटी मुहैया करता है; मिथ्या आरोपों एवं असत्यता की पाकिस्तान द्वारा संचालित भारत-विरोधी मुहिम को अस्वीकार्य एवं निंदनीय मानता है;
पाकिस्तान से जारी होनेवाले अत्यंत उकसावापूर्ण बयानों को गहरी चिंता के साथ दर्ज करते हुए पाकिस्तान से यह अनुरोध करता है कि वह वातावरण विषाक्त करनेवाले एवं लोकमत भड़कानेवाले बयानों से बाज आये, भारतीय राज्य जम्मू एवं कश्मीर के पाकिस्तान के अवैध कब्जेवाले क्षेत्रों के लोगों की दयनीय स्थिति, मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा लोगों की लोकतांत्रिक आजादी के हनन पर खेद एवं चिंता प्रकट करता है;
भारत के लोगों की ओर से, दृढ़तापूर्वक घोषणा करता है कि: जम्मू एवं कश्मीर का राज्य भारत का अविभाज्य अंग रहा है, है और रहेगा तथा शेष भारत से इसे पृथक करने की किसी भी कोशिश का सभी आवश्यक साधनों से प्रतिरोध किया जायेगा;
भारत के पास इसकी एकता, संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध सभी षड्यंत्रों के दृढ़तापूर्ण मुकाबले हेतु इच्छाशक्ति एवं क्षमता मौजूद है.
और मांग करता है कि : पाकिस्तान जम्मू एवं कश्मीर के भारतीय राज्य के उन क्षेत्रों को अवश्य ही खाली कर दे, जिस पर उसने आक्रमण के द्वारा कब्जा कर लिया है; तथा संकल्प करता है कि : भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के सभी प्रयासों का दृढ़तापूर्वक मुकाबला किया जायेगा.
यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से अंगीकृत किया गया, अध्यक्ष महोदय: यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया.
फरवरी 22, 1994
(स्रोत – संसदीय बहसें: आधिकारिक प्रतिवेदन, खंड 170, अंक 2,
1994, पृ. 237 )
चीनी कब्जे वाला क्षेत्र
कश्मीर के 42,685 वर्ग किलोमीटर हिस्से पर चीन का कब्जा है. इस हिस्से में 5,180 वर्ग किलोमीटर का वो हिस्सा भी शामिल है, जिसे 1963 में पाकिस्तान ने चीन को दे दिया था. पाक ने जिस हिस्से को चीन को दिया था उसमें हुन्जा-गिलगित के एक हिस्से रक्साम और बाल्टिस्तान की शक्सगाम घाटी क्षेत्र शामिल थे. इस क्षेत्र को सीडेड एरिया या ट्रांस काराकोरम ट्रैक के नाम से भी जाना जाता है.
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