खुशमिजाज और नरमदिल थीं सुषमा
Updated at : 08 Aug 2019 8:08 AM (IST)
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एसवाइ कुरैशी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुषमा स्वराज कोई सामान्य नेता नहीं थी, उनके व्यक्तित्व में कई विशेषताएं थीं. वे नरम दिल, खुशमिजाज और मानवीय थीं तथा किसी की बात बहुत ध्यान से सुनती थीं. ब्यूरोक्रेसी के उनके शुरुआती संपर्कों में होने का अवसर मुझे तब मिला था, जब 1977 में वे हरियाणा की संस्कृति […]
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एसवाइ कुरैशी
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त
सुषमा स्वराज कोई सामान्य नेता नहीं थी, उनके व्यक्तित्व में कई विशेषताएं थीं. वे नरम दिल, खुशमिजाज और मानवीय थीं तथा किसी की बात बहुत ध्यान से सुनती थीं. ब्यूरोक्रेसी के उनके शुरुआती संपर्कों में होने का अवसर मुझे तब मिला था, जब 1977 में वे हरियाणा की संस्कृति मंत्री बनी थीं. उस समय उनकी उम्र मात्र 25 साल थी. इससे पहले और बाद में कोई भी देश में इस उम्र में मंत्री नहीं बना. उस मंत्रालय में मैं संस्कृति निदेशक के रूप पहले से ही कार्यरत था.
कुछ दिनों तक तो वे अनुभवहीन और सीधी-सादी दिखती रहीं, पर स्वाभाविक रूप से तेजतर्रार होने और तुरंत सीखने की प्रवृत्ति के कारण बहुत जल्दी ही अनुभवी हो गयीं. हालांकि, मैं उनसे उम्र में छह साल बड़ा था, पर उन्होंने अपनापन में मुझे मेरे पहले नाम याकूब से बुलाना शुरू कर दिया.
हाल ही मेरी शादी हुई थी और मेरी पत्नी उभरती हुई पत्रकार थीं. सुषमाजी ने उन्हें ‘संडे’ पत्रिका के आखिरी पन्ने के लिए एक इंटरव्यू दिया, जो दोनों के लिए ही पहला इंटरव्यू था. वे मेरी पत्नी को भीउनके पहले नाम से ही बुलाती थीं.
बाद में हम दोनों अलग-अलग विभागों में चले गये, पर हमारा आत्मीय संबंध बना रहा. दो दशक बाद जब वे केंद्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थीं और मैं हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का प्रधान सचिव था, एक दिन उनका फोन आया. उन्होंने मुझे दूरदर्शन का महानिदेशक बनाने का प्रस्ताव रखा.
उनसे मेरी आखिरी मुलाकात नयी सरकार के गठन के बाद उनके निवास पर 13 जून को हुई थी. हालांकि, ऐसा कहा जा रहा था कि उन्हें सरकार से अलग कर दिया गया है, पर वे बहुत खुश और निश्चिंत दिख रही थीं. मैंने उनके चेहरे पर अजीब रौनक देखी थी.
विदेशी हस्तियों ने याद किया सुषमा स्वराज को
गजब की प्रतिबद्धता
सुषमा स्वराज भारत की प्रतिष्ठित नेताओं में से एक थीं. अपने देश के नागरिकों की सेवा के लिए उन्होंने गजब की प्रतिबद्धता प्रदर्शित की. भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती प्रदान करने में सुषमा स्वराज का योगदान सराहनीय था.
– एलेक्जेंड्रे जिएग्लर, भारत में फ्रांस के राजदूत
बांग्लादेश की अच्छी दोस्त
बांग्लादेश ने अपना एक अच्छा मित्र खो दिया है. सुषमा स्वराज बांग्लादेश की अच्छी दोस्त थीं. उन्होंने भारत-बांग्लादेश की संबंधों को एक नयी ऊंचाई प्रदान करने में सराहनीय योगदान दिया.
– शेख हसीना, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री
असाधारण व्यक्तित्व
सुषमा स्वराज एक असाधारण महिला और नेता थीं, जिन्होंने जनता की सेवा में अपना जीवन लगा दिया. मुझे अपनी भारत यात्राओं के दौरान उनसे मिलने का अवसर मिला और मैं हमेशा उन्हें याद रखूंगी.- मारिया फर्नांडो एस्पिनोसा,
संयुक्त राष्ट्र, महासभा अध्यक्ष
अविस्मरणीय योगदान
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से दुख हुआ है. चीन-भारत संबंधों के लिए किये गये उनके अविस्मरणीय योगदान की सराहना करता हूं.
– सन वेइडोंग, भारत में चीन के राजदूत
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