बिंदेश्वरी दुबे की पुण्यतिथि पर विशेष : शक्ति का उपयोग जनता की भलाई के लिए हो
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Jan 2019 6:27 AM
विज्ञापन
शिवाशीष चौबे महात्मा गांधी और पंडित नेहरू से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गये थे आज भी जब उद्योग जगत में मजदूर यूनियन, श्रमिकों की मांग, आदर्शवादी चरित्र और परिपाटी की बात आती है, तब स्वतः ही स्व. बिंदेश्वरी दुबे का वर्णन प्रमुखता से होता है. स्व. दुबे श्रमिकों के हमदर्द, उदारवादी एवं सर्वमान्य […]
विज्ञापन
शिवाशीष चौबे
महात्मा गांधी और पंडित नेहरू से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गये थे
आज भी जब उद्योग जगत में मजदूर यूनियन, श्रमिकों की मांग, आदर्शवादी चरित्र और परिपाटी की बात आती है, तब स्वतः ही स्व. बिंदेश्वरी दुबे का वर्णन प्रमुखता से होता है.
स्व. दुबे श्रमिकों के हमदर्द, उदारवादी एवं सर्वमान्य विचारक थे. श्रमिक आंदोलन से बिहार के मुख्यमंत्री तथा श्रम मंत्री, भारत सरकार बनने तक का सफर दुबे जी की दृढ़ इच्छाशक्ति, त्याग एवं ईमानदारी का उदाहरण है. वे छात्र जीवन में ही महात्मा गांधी और पंडित नेहरू से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े और इसके पश्चात जनमानस की सेवा हेतु जीवन समर्पित करते हुए जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी तक का साथ दिया.
बिंदेश्वरी दुबे (14 जनवरी, 1921 – 20 जनवरी, 1993) एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (कानून एवं न्याय तथा श्रम एवं रोजगार), इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. इंदिरा जी की सलाह पर बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने और अपने अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान लोकसभा चुनाव में शत प्रतिशत और विधानसभा चुनाव में 91 प्रतिशत कांग्रेस के पक्ष में परिणाम के साथ तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री बने.
मुख्यमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल आदर्श के रूप में दर्ज है. जब इन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाये जाने की राजनीति हुई, तब नेता प्रतिपक्ष कर्पूरी ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष स्व. राजीव गांधी से दुबे जी को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाये जाने के लिए व्यक्तिगत तौर पर अनुरोध किया था. इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि विरोधी भी इनकी खूबियों, ईमानदार चरित्र और निष्काम कर्म से प्रभावित होकर इनकी प्रशंसा मुक्त कंठ से करते रहे हैं.
बिंदेश्वरी दुबे ने स्वतंत्रता आंदोलन के ही दौरान 1944 में जेल से छूटने के बाद बेरमो में हिंद स्टिफ माइंस में नौकरी की. वे कोलियरियों में प्रबंधन के समक्ष मजदूरों के शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने लगे.
सर्वप्रथम उन्होंने ट्रेड यूनियन की शुरुआत एक ब्रिटिश मैनेजर द्वारा चलाई जा रही सर लिन्सन पैकिन्सन एंड कंपनी से शुरू की. तत्पश्चात उस समय के बड़े मजदूर नेता बिंदेश्वरी सिंह ने आम सभा में जनता द्वारा चुने जाने पर उन्हें कोलियरी मजदूर संघ की शाखा का अध्यक्ष नियुक्त किया. इसके पश्चात यह निरंतर मजदूर हितों के लिए लगे रहे और समय काल में बिहार इंटक के अध्यक्ष बने.
इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ, जो पहले कोलियरी मजदूर संघ कहलाता था, के दुबे निर्विवाद नेता थे. 1950 और 60 के दशक में संघ के संगठन मंत्री, मंत्री, उपाध्यक्ष और फिर राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद 1970 के दशक में अध्यक्ष भी बने और अंतिम सांस तक (20 जनवरी, 1993) इस पद पर रहे. 24 अक्तूबर, 1962 को दुबे जी की अध्यक्षता में डीवीसी कोलियरी में केंद्रीय श्रम विभाग के पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी आरएल मालवीय के हस्तक्षेप पर ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगा दी गयी. ऐसा किसी सरकारी कोलियरी में पहली बार हुआ था.
1962-63 में ही पद्मा महाराज की ढोरी कोलियरी में भी बिंदेश्वरी दुबे की पहल पर ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर दिया गया. वे जीवनपर्यंत यूनियन के माध्यम से संदेश देते रहे कि समाज को चलाने में श्रम और श्रमिकों का सर्वोच्च महत्व है. जनप्रतिनिधियों को इनका संदेश होता था कि, जनता द्वारा प्राप्त विश्वास और शक्ति का उपयोग निजी या अपने परिवार के उत्थान के लिए न करते हुए, जनता की भलाई के लिए शत प्रतिशत होना चाहिए.
(लेखक स्व बिंदेश्वरी दुबे के नाती हैं)
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










