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अंधविश्वास ने बनाया बड़ा बाजार, बिहार में जयपुर से आते हैं ज्यादातर रत्न

Updated at : 19 Jun 2018 8:42 AM (IST)
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अंधविश्वास ने बनाया बड़ा बाजार, बिहार में जयपुर से आते हैं ज्यादातर रत्न

जब पूरी दुनिया ऊपर वाले के भरोसे चल रही है तो भला बाजार कैसे न चले. भगवान के नाम से भाग्योदय का यह बाजार काफी बड़ा है. इन सब के साथ हर जगह पॉजिटिव एनर्जी लाने और प्रोग्रेस के दरवाजे खोलने के दावे करने वाले सामानों से बाजार पटा पड़ा है. ग्रह-नक्षत्र जिंदगी में दुश्वारियां […]

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जब पूरी दुनिया ऊपर वाले के भरोसे चल रही है तो भला बाजार कैसे न चले. भगवान के नाम से भाग्योदय का यह बाजार काफी बड़ा है. इन सब के साथ हर जगह पॉजिटिव एनर्जी लाने और प्रोग्रेस के दरवाजे खोलने के दावे करने वाले सामानों से बाजार पटा पड़ा है. ग्रह-नक्षत्र जिंदगी में दुश्वारियां ला रहे हैं तो उन्हें कंट्रोल करने के उपाय भी बाजार में मौजूद हैं. सूरज नाराज हो या शनि वक्री हर किसी को रास्ते पर लाया जा सकता है. यह सब काम करते हैं छोटे-छोटे रंगीन पत्थर. बाजार में इनका कोई फिक्स रेट नहीं होता है. जैसा कस्टमर वैसा रेट. हाल यह है कि रोड के किनारे पांच-दस रुपये में भी कलर पत्थर बेचने वाले इससे किस्मत बदल जाने का दावा करते हैं. वहीं यही दावा बड़े शो रूम में पत्थर बेचने वाले भी करते हैं.

रंगीन रत्नों का करोबार
शहर में भगवान के नाम पर तरह-तरह के सामानों की खूब बिक्री होती है. अंधविश्वास और भाग्य पर भरोसा रखने की चाहत ने इसे बड़े बाजार का शक्ल दे दिया है. इसकी वजह से तो मार्केट में हर वक्त जबरदस्त बूम है. इसका नजारा देखना है तो शहर के किसी कोने में चले जाइए. हर तरफ आपको ऐसे सामान से सजे दुकान नजर आ जाएंगे. सामानों की कीमत भी खूब वसूली जाती है. हर धर्म के देवता के चित्र और मूर्तियों का बड़ा बाजार है. इसके साथ पूजा उपासना से जुड़े सामान की बिक्री भी खूब हो रही है. भगवान के चित्रों से सजे सामान आसानी से मुंह मांगी कीमत पर बेचे जा रहे हैं.

खरीदारी करते वक्त रखें खास ख्याल
बोरिंग रोड के एक रत्न शॉप के कर्मी पवन कुमार ने बताया कि खरीदारी करते वक्त कई सारे बिंदुओं का ख्याल रखना चाहिए. मसलन दुकान प्रमाणिक और प्रतिष्ठित हो. वहां की विश्वसनीयता हो और जांच की सुविधा उपलब्ध हो. दर सार्वजनिक की गयी हो और रिटर्न करने का भी विकल्प हो. यदि यह बुनियादी व्यवस्था हो तो आप उस दुकान से खरीदरी कर सकते हैं.

रत्न कहीं से भी लें, जांच जरूर कराएं
बाकरगंज में बिहार के एक मात्र रत्न जांच केंद्र जेम टेस्टिंग सेंटर के ऑनर रंधीर कुमार कहते हैं कि कोई भी रत्न खरीदें तो परेशान नहीं हो. खरीदने के बाद आप हमारे पास चले आइए. यहां 150 रुपये की दर में केवल 10 से 15 मिनट में आपको रत्न की असलीयत बता दी जायेगी. हमारे पास अत्याधुनिक मशीनें हैं. रत्न को कहीं से भी खरीदीये लेकिन किसी अच्छे जांच केंद्र पर इसकी जांच जरूर कराएं.

न रत्नों का कोई मूल्य तय और न ही बन सका है मानक, रहें होशियार

साइड इफेक्ट: पांच रुपये से 10 हजार प्रति रत्ती तक मिलते हैं
बिहारी साव लेन में ग्रह रत्नों का सबसे बड़ा कारोबार है. यहां की दुकानों का संचालन करने वाले नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि ग्रह रत्नों के कारोबार में किसी भी रत्न की कोई तय दर नहीं होती है. अभी तक दर का कोई मानक नहीं तय है. रत्न आपको पांच रुपये प्रति रत्ती की दर से लेकर दस हजार रुपये प्रति रत्ती मिलेंगे. कई बार दर ग्राहकों पर भी निर्भर करता है. ग्राहकों में भी सस्ते दर में खरीद की प्रवृत्ति के कारण धोखा होने की संभावना होती है. मोती, नीलम और पुखराज सबसे महंगे रत्नों में आते हैं.

जयपुर से आते हैं ज्यादातर रत्न
बिहार में जयपुर से ज्यादातर रत्न आते हैं. फेरी वाले कारोबारी से लेकर आयात निर्यात से जुड़े कारोबारी इस धंधे में लंबे समय से हैं. रत्नों के विक्रेता कहते हैं कि राजस्थान के कई शहरों से यह कारोबार होता हैं. जोधपुर से लेकर जयपुर और अन्य शहरों में इसके कारोबारी हैं जो बिहार में डिलिवरी करते हैं. राजस्थान की राजधानी विश्व स्तर पर ग्रह रत्नों की सबसे बड़ी मंडी के रूप में जानी जाती है जहां से विदेशों में भी सप्लाई होती है.

150 रुपये में होती है जांच
आपको यह जानना चाहिए कि राजधानी में रत्नों को जांचने के लिए केंद्र भी है. यदि आपको थोड़ी सी भी गलतफहमी हो या फिर अविश्वास हो तो आप रत्नों की जांच करा सकते हैं. ठाकुरबाड़ी मार्केट, डीएस कांपलेक्स के अपोजिट बाकरगंज में जेम टेस्टिंग सेंटर में यह सुविधा है. वहां आपको लैबोरेट्री की जांच रिपोर्ट दी जायेगी. 15 मनट में आपको स्टोन का नाम, वजन, शेप और कट, डाइमेंशन, कलर, ट्रांसपेरेंसी, स्पेक्ट्रोस्कोपिक व्यू, स्पेसिफिक ग्रेविटी, रेफरैक्टिव इंडेक्स, माइक्रोस्कॉपिक व्यू, हार्डनेस, ग्रुप के साथ कमेंट भी दिया जायेगा.

तकनीक के साथ बढ़े सिंथेटिक रत्न
प्राचीन समय से ही ग्रह रत्न मनुष्यों द्वारा प्रयोग में लाये जा रहे हैं. अभी प्रौद्योगिकी में वृद्धि के साथ रत्न भी ड्यूप्लिकेट आ रहे हैं. आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रयोग आज कल इतने उन्नत हैं कि परंपरागत तरीकों से सिंथेटिक रत्नों को पहचानना बहुत मुश्किल है. उन्हें पहचानने के लिए नयी तकनीक की आवश्यकता होती है. बिहार में रत्न व्यापार दिनों दिन बढ़ रहा है लेकिन एक बड़ी बाधा यह थी कि कोई वैज्ञानिक संगठन नहीं था जो रत्न पत्थरों का परीक्षण, प्रमाणन और प्रमाणीकरण कर सकता हो. लेकिन 2012 के आखिरी महीने में बिहार में जेम टेस्टिंग सेंटर (जीटीसी) खुला है जहां परीक्षण प्रयोगशाला है और वहां लोगों को रत्नों के बारे में तथ्यों के बारे में जानने के लिए जागरूक करने की कोशिश की जा रही है.

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