गुमला में भारतमाला प्रोजेक्ट का विरोध, ग्रामीणों ने मुंशी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :11 May 2026 6:06 PM (IST)
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Gumla News

भारतमाला सड़क परियोजना के विरोध के दौरान ग्रामीणों के बीच घिरे शिवालया कंपनी के मुंशी. फोटो: प्रभात खबर

Gumla News: गुमला के लट्ठा बरटोली गांव में भारतमाला सड़क परियोजना का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया. सड़क निर्माण शुरू कराने पहुंचे शिवालया कंपनी के मुंशी की ग्रामीणों ने पिटाई कर दी. ग्रामीण जमीन देने को तैयार नहीं हैं और निर्माण कार्य रोकने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: झारखंड के गुमला जिले के लट्ठा बरटोली गांव में भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है. सोमवार को हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचे शिवालया कंपनी के मुंशी की ग्रामीणों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना जबरन सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिसका वे लगातार विरोध कर रहे हैं.

सड़क निर्माण शुरू कराने पहुंची थी कंपनी

मिली जानकारी के अनुसार, भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए सोमवार को शिवालया कंपनी की गाड़ियां लट्ठा बरटोली गांव पहुंचीं. जैसे ही निर्माण कार्य की तैयारी शुरू हुई, ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां जुट गए और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन सड़क निर्माण के लिए नहीं देना चाहते हैं. उनका आरोप है कि कंपनी प्रशासन की मदद से जबरन निर्माण कार्य शुरू कराना चाहती है. इसी बात को लेकर गांव के लोगों में भारी नाराजगी है.

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मुंशी को घेरकर की पिटाई

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी के मुंशी को घेर लिया. देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और लोगों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि मुंशी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया. इस दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए. घटना के बाद किसी तरह वह वहां से जान बचाकर भागा. बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई. हालांकि, स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा काफी ज्यादा था.

महिलाओं ने भी दिखाया उग्र रूप

इस विरोध-प्रदर्शन में गांव की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. महिलाओं ने सड़क निर्माण कार्य का जमकर विरोध किया और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण से उनकी खेती और जमीन प्रभावित होगी, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है. महिलाओं ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर उचित फैसला नहीं होता, तब तक वे किसी भी हालत में सड़क निर्माण नहीं होने देंगी.

पहले भी धानरोपनी कर जताया था विरोध

ग्रामीणों का विरोध पिछले कई दिनों से जारी है. रविवार को भी गांव के लोगों ने सड़क निर्माण स्थल पर धानरोपनी कर और हल जोतकर अपना विरोध दर्ज कराया था. ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन उनकी खेती का मुख्य आधार है और वे इसे किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते. ग्रामीण लगातार प्रशासन और कंपनी से बातचीत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. इसी कारण लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

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प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

घटना के बाद प्रशासन के सामने स्थिति को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. फिलहाल गांव के लोग सड़क निर्माण स्थल पर डटे हुए हैं और निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है. ग्रामीणों ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनकी सहमति के बिना सड़क निर्माण नहीं होने दिया जाएगा. अब सवाल यह उठ रहा है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा और ग्रामीणों की मांगों का समाधान कैसे निकाला जाएगा. फिलहाल पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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