सतर्कता जरूरी, ताकि भटक न जाएं आपके बच्चे

Updated at : 17 May 2016 8:43 AM (IST)
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सतर्कता जरूरी, ताकि भटक न जाएं आपके बच्चे

मां-बाप आज बच्चों को कैरियर बनाने के लिए दूसरे शहरों में भेज रहे हैं. मगर कई बार बच्चे पढ़ाई के नाम पर मिली इस आजादी का नाजायज फायदा भी उठाते हैं, जो भटकाव में ले जाता है. माता-पिता बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए घर से दूर भेजते हैं. उनकी पढ़ाई में कोई कसर नहीं […]

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मां-बाप आज बच्चों को कैरियर बनाने के लिए दूसरे शहरों में भेज रहे हैं. मगर कई बार बच्चे पढ़ाई के नाम पर मिली इस आजादी का नाजायज फायदा भी उठाते हैं, जो भटकाव में ले जाता है.
माता-पिता बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए घर से दूर भेजते हैं. उनकी पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन कहां चूक हो जाती है कि बच्चे भटक जाते हैं? युवाओं के दिलो-दिमाग में बस गया है कि आधुनिकता का मतलब है आजादी. वे खुले आसमान में उड़ना चाहते हैं. उनके दिमाग में बस एक ही बात रहती है- ‘हां मैं आजाद हूं’. उनकी जीवनशैली बदल चुकी है. वे लग्जीरियस लाइफ के आदी होते जा रहे हैं. टेलीविजन, फिल्मी दुनिया, पेज 3, रइसों की दुनिया में बनते-बिगड़ते आयाम को रोल मॉडल मान बैठते हैं.
छलावे से छलनी होती जिंदगी की तरफ उनका ध्यान नहीं जाता. भौतिकवाद में बढ़ता विश्वास और किसी भी कीमत पर अपना स्वार्थ पूरा करने की चाह चरम सीमा पर होती है. आगे बढ़ना है, मगर धैर्य खत्म होता जा रहा है. लिव इन रिलेशनशिप को फैशन की तरह अपना रहे हैं, जो चिंता का विषय है. फ्रेंडशिप, गैजेट लव में भावनात्मक संबंधों से कटते जा रहे हैं.
यह उम्र ही ऐसी होती है कि माता-पिता की पकड़ ढीली हुई नहीं कि बच्चे भटक कर दूसरी ही राह पर चल पड़ते हैं. पढ़ाई-कैरियर सब खत्म कर लेते हैं. हाथ आती है तो सिर्फ हताशा. जब कोई अनहोनी हो जाती है तब पछतावे के सिवाय कुछ हाथ नहीं आता. कम उम्र में नशे की लत, टीनएज प्रेग्नेंसी, कोई गंभीर अपराध जैसी बातें सामने आती हैं.
युवा होते बच्चों को चाहिए कि मां-बाप की बात को ‘जनरेशन गैप’ कह कर मजाक न उड़ाएं, अन्यथा भविष्य में उनके लिए भारी पड़ सकता है. अगर युवा खुद को गुड लुकिंग, स्मार्ट, डैसिंग समझते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं, लेकिन इसे बनाये रखने के लिए व्यवहारिकता को भी नजरअंदाज न करें. उनके साथ माता-पिता हर मुद्दे पर खुल कर चर्चा करें.
विश्वास में लेकर समझाएं
माता-पिता की अपनी दलीले होती हैं कि उनके युवा होते बच्चे उनकी बात नहीं मानते. वैसे भी अब वह समय भी नहीं रहा कि माता-पिता सारा दिन उन्हें उपदेश देते रहें या हमेशा उनके कर्तव्य का एहसास दिलाएं. पर जरूरत है खामोश रह कर भी गौर करने की. वे किस तरह की एक्टिविटी में हैं, कैसे दोस्तों की संगत में हैं, अपना समय कहां बिता रहे हैं.
आज के बच्चे अपना निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं. इसके लिए उन्हें डांटे या रोके-टोके नहीं. उन्हें अपनी दुनिया बनाने दें, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से उनकी सुरक्षा पर पूरा ध्यान दें. अगर वे पार्टी में जाना चाहें तो उन्हें रोकने की बजाये आत्मरक्षा के टिप्स दें कि हंसी-मजाक में उन्हें नशा पिला कर कोई गलत न कर दे. अगर उन पर अंकुश लगायेंगे तो वे प्रतिक्रिया में झूठ भी बोल करते हैं. अगर अपने विश्वास में लेकर एहतियात बरतने के लिए बतायेंगे, तो उनमें समझ एवं जिम्मेदारी आयेगी.
कुछ जरूरी बातें
– घर से दूर बच्चों पर बराबर नजर बनाये रखें. उनसे हमेशा संपर्क में रहें. -किशोरों को गलतियों के लिए डांटने की बजाय बताएं कि आपने इस उम्र में क्या-क्या गलतियां कीं और उनसे क्या सीखा. -अपने युवा होते बच्चे को एहसास दिलाएं कि आप उनके सिर्फ मां-बाप ही नहीं, बल्कि अच्छे दोस्त भी हैं. तब वे खुल कर आपसे किसी भी विषय पर बात कर सकते हैं.
इससे न सिर्फ जेनेरेशन गैप कम कर सकते हैं, बल्कि उन्हें सही और गलत के फर्क से परिचित करा सकते हैं. -बच्चों की गलतियों पर तुरंत प्रतिक्रिया न करें, धैर्य बनाये रखें. उन्हें बताएं कि गलतियां सभी से होती हैं, उसे सुधारा जा सकता है. -सेक्स, प्रेम जैसे संबंधों पर उनके मन में कोई गलत धारणा न बनने दें.
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