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दुनिया की सबसे बड़ी ''आर्मी'' होगी छोटी, 3 लाख सैनिकों को कम करेगा चीन

Updated at : 03 Sep 2015 10:42 AM (IST)
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दुनिया की सबसे बड़ी ''आर्मी'' होगी छोटी, 3 लाख सैनिकों को कम करेगा चीन

बीजिंग : दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी में से तीन लाख सैनिकों की छुट्टी की जायेगी. चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने आज घोषणा की है कि 23 लाख सैनिकों वाली विश्व की सबसे बडी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में से तीन लाख सैनिक कम किये जाएंगे. शी ने यह घोषणा दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के […]

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बीजिंग : दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी में से तीन लाख सैनिकों की छुट्टी की जायेगी. चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने आज घोषणा की है कि 23 लाख सैनिकों वाली विश्व की सबसे बडी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में से तीन लाख सैनिक कम किये जाएंगे. शी ने यह घोषणा दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के खिलाफ हासिल की गई जीत की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित परेड में संबोधन के दौरान की. 145 अरब डॉलर के वार्षिक रक्षा बजट के साथ संचालित होने वाली पीएलए का आकार छोटा करने के प्रयास दरअसल इसलिए किये जा रहे हैं क्योंकि वह बल को नये हथियारों और तकनीक के जरिए अभूतपूर्व ढंग से आधुनिक बना रहे है.

पीएलए का रक्षा बजट अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आता है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का संख्याबल वर्ष 1980 में 45 लाख था. वर्ष 1985 में इसके संख्याबल में पहली बार परिवर्तन करते हुए इसे 30 लाख कर दिया गया था और इसके बाद इसे 23 लाख कर दिया गया. तीन लाख सैनिकों की कटौती का यह कदम शी द्वारा चलाये जा रहे व्यापक भ्रष्टाचार रोधी अभियान की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है. शी देश के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ सत्ताधारी कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अध्यक्ष और सेना के प्रमुख भी हैं.

सेना के लगभग 40 उच्च अधिकारी सेना के अभूतपूर्व पुनर्निर्माण में भ्रष्टाचार रोधी जांच का सामना कर रहे हैं. इन अधिकारियों में केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के दो पूर्व उपाध्यक्ष शामिल हैं. वर्ष 2013 में प्रभार संभालने के बाद शी ने प्रायोगिक प्रशिक्षण पर ज्यादा जोर दिया है, जिसमें युद्ध जैसी असली परिस्थितियों में अभ्यास शामिल हैं. सेना ने आधुनिक हथियार हासिल कर लिये हैं, जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें, आधुनिक विमान, विमान वाहक और जमीनी स्तर के हथियार शामिल हैं.

शी सेना को युद्ध जीतने के लिए तैयार देखना चाहते हैं. सेना का यह पुनर्निर्माण एक ऐसे समय पर भी हो रहा है, जबकि चीन दक्षिणी चीनी सागर में समुद्री विवादों को लेकर कई पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापक गतिरोध में फंसा हुआ है. इन देशों को अमेरिका का समर्थन है. इसके अलावा पूर्वी चीनी सागर में जापान के साथ भी इसका गतिरोध है. जमीनी स्तर पर चीन का भारत और भूटान के साथ सीमा विवाद है. हालांकि 12 अन्य देशों के साथ यह अपने सीमा विवाद सुलझा चुका है.

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