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डिटेंशन सेंटर पर असम का वो सच, जिसे पीएम मोदी ने झूठ कहा था

Updated at : 25 Dec 2019 11:49 AM (IST)
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डिटेंशन सेंटर पर असम का वो सच, जिसे पीएम मोदी ने झूठ कहा था

<figure> <img alt="असम, डिटेंशन सेंटर" src="https://c.files.bbci.co.uk/DE7F/production/_110295965_board.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Dilip Sharma/BBC</footer> </figure><p>"मुझे नहीं मालूम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में क्यों कहा कि भारत में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है. आप देख सकते है यहां माटिया में भारत के सबसे बड़े डिटेंशन सेंटर निर्माण हो रहा है. आप चाहे तो यहां काम रहे लोगों […]

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<figure> <img alt="असम, डिटेंशन सेंटर" src="https://c.files.bbci.co.uk/DE7F/production/_110295965_board.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Dilip Sharma/BBC</footer> </figure><p>&quot;मुझे नहीं मालूम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में क्यों कहा कि भारत में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है. आप देख सकते है यहां माटिया में भारत के सबसे बड़े डिटेंशन सेंटर निर्माण हो रहा है. आप चाहे तो यहां काम रहे लोगों से पूछ सकते है. ये विशाल भवन अवैध विदेशी नागरिकों को रखने के लिए बनाया जा रहा है और इसके लिए फंड (पैसा) भी केंद्रीय गृह मंत्रालय दे रहा है.&quot; </p><p>ये कहना है असम के ग्वालपाड़ा ज़िले के माटिया गांव में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता शाहजहां अली का.</p><p>दरअसल, दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि भारत में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है और उन्होंने इसे अफ़वाह बताया था. </p><p>हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के दावे के विपरीत असम के माटिया गांव में ढाई हेक्टेयर ज़मीन में ये देश का पहला और सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है.</p><h1>डिटेंशन सेंटर का निर्माण कार्य</h1><p>इस डिटेंशन सेंटर का निर्माण कार्य देख रहे साइट इंचार्ज रॉबिन दास ने बीबीसी से कहा, &quot;मैं साल 2018 के दिसंबर से इस डिटेंशन सेंटर के निर्माण का काम-काज देख रहा हूं. इसी माटिया गांव में बीते साल दिसंबर से इस डिटेंशन सेंटर का निर्माण कार्य शुरू हुआ था. इस डिटेंशन सेंटर में तीन हज़ार लोगों को रखने का इंतज़ाम किया जा रहा है.&quot; </p><p>&quot;यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सेल बनाए गए हैं. हमने डिटेंशन सेंटर का 70 फ़ीसदी काम पूरा कर लिया है. बिना किसी छुट्टी के क़रीब 300 मज़दूर इस निर्माण कार्य को पूरा करने में लगे है. इस निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2019 की डेडलाइन मिली थी.&quot; </p><p>&quot;लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि हम 31 मार्च 2020 तक इस विशाल भवन के निर्माण से जुड़ा सारा काम पूरा कर लेंगे. दरअसल, बारिश के दिनों में होने वाली परेशानी के चलते काम थोड़ा धीमा पड़ गया था.&quot;</p><p>इस डिटेंशन सेंटर के निर्माण पर होने वाले ख़र्च से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए रॉबिन दास ने कहा, &quot;इसके निर्माण में कुल 46 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएंगे जो केद्रीय गृह मंत्रालय दे रहा है.&quot; </p><figure> <img alt="असम, डिटेंशन सेंटर" src="https://c.files.bbci.co.uk/1334D/production/_110296687_robindassiteincharge.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Dilip Sharma/BBC</footer> <figcaption>डिटेंशन सेंटर का निर्माण कार्य देख रहे साइट इंचार्ज रॉबिन दास</figcaption> </figure><h1>’दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डिटेंशन'</h1><p>साइट इंचार्ज दास दावा करते हैं कि अमरीका में मौजूद डिटेंशन सेंटर के बाद ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर होगा. इसके अंदर अस्पताल और ठीक गेट के बाहर प्राइमरी स्कूल से लेकर सभागार और बच्चों और महिलाओं की विशेष देखभाल के लिए तमाम सुविधाएं होगी.</p><p>फिलहाल असम की अलग-अलग छह सेंट्रल जेलों में बने डिटेंशन सेंटरों में 1133 घोषित विदेशी लोगों को रखा गया है. </p><p>ये जानकारी संसद में गृह राज्य मंत्री जीके रेड्डी ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के सवाल के जवाब में जुलाई में दी थी, ये 25 जून तक का आंकड़ा है.</p><p>माटिया गांव के बिल्कुल पास रहने वाले आजिदुल इस्लाम जब भी इस तरफ़ से गुज़रते हैं, वो ऊंची दीवारों से घिरे इस डिटेंशन सेंटर को देख कर डर जाते हैं. </p><p>वो कहते हैं, &quot;मैं इसी इलाक़े में बड़ा हुआ हूं, लेकिन मैंने इतनी विशाल बिल्डिंग कभी नहीं देखी. इंसानों को अगर इसके भीतर क़ैद करके रखेंगे तो डर तो लगेगा ही. ये सच है कि असम में अवैध नागरिकों की समस्या काफ़ी गंभीर है लेकिन जो व्यक्ति विदेशी घोषित हुआ हो उसे डिटेंशन सेंटर में रखकर इतना ख़र्च करने के बजाए उसके अपने देश भेज देना चाहिए.&quot;</p><figure> <img alt="असम, डिटेंशन सेंटर" src="https://c.files.bbci.co.uk/1816D/production/_110296689_detentioncenter.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Dilip Sharma/BBC</footer> </figure><h1>विदेशी नागरिक</h1><p>24 साल की दीपिका कलिता इसी निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर में एक मज़दूर के तौर पर शुरू से काम कर रही हैं. उन्हें पता है कि यहां किन लोगों को रखा जाएगा. </p><p>वो कहती है, &quot;यहां उन लोगों को रखा जाएगा जिनका नाम एनआरसी में नहीं आया है या फिर जो वोटर नहीं हैं. मैं यहां शुरू से मज़दूरी कर रही हूँ. हम ग़रीब हैं, यहां मज़दूरी करके पेट पाल रहें है. कई और महिलाएं भी यहां काम करती हैं. ठेकेदार रोज़ाना के 250 रुपए मज़दूरी देता है. मेरा नाम एनआरसी में आया है लेकिन मुझे नहीं मालूम यहां कितने लोगों को रखा जाएगा.&quot;</p><p>इसी डिटेंशन सेंटर में मज़दूरी करने वाले 30 साल के गोकुल विश्वास का नाम एनआरसी में है लेकिन वो यह जानते हैं कि जिन लोगों को विदेशी नागरिक घोषित किया गया है उन्हें इसी जगह क़ैद करके रखा जाएगा. </p><p>गोकुल कहते हैं, &quot;मैं यहां पिछले कुछ दिनों से मज़दूरी करता हूं. यहां मुझे रोज़ाना 500 रुपए मिलते हैं. यह डिंटेशन सेंटर की बिल्डिंग बन रही है. यहां विदेशी लोगों को रखा जाएगा. काम करते समय कई बार यह सोचकर डर जाता हूं कि अगर मेरा नाम एनआरसी में नहीं आता तो मुझे भी इस जेलखाने में रहना पड़ता.&quot;</p><figure> <img alt="असम, डिटेंशन सेंटर" src="https://c.files.bbci.co.uk/4CD5/production/_110296691_matia.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Dilip Sharma/BBC</footer> </figure><h1>परिवार बिखर जाएगा…</h1><p>दरअसल, गोकुल ने अपने कई साथी मज़दूरों से सुना है कि इस डिटेंशन सेंटर के निर्माण कार्य में मज़दूरी करने वाले कइयों के नाम एनआरसी में नहीं हैं. </p><p>इस डिटेंशन सेंटर के ठीक बाहर चाय और खाने-पीने की एक छोटी सी होटल चलाने वाले अमित हाजोंग अपनी पत्नी ममता का नाम एनआरसी में शामिल नहीं किए जाने से काफ़ी परेशान हैं.</p><p>अमित अपनी परेशानी बयान करते हुए कहते हैं, &quot;मैं पास के 5 नंबर माटिया कैंप में अपने परिवार के साथ रहता हूं. मेरे पूरे परिवार का नाम एनआरसी में आया है. बेटे का नाम है. मां का नाम है. मेरा नाम आया है लेकिन मेरी पत्नी ममता का नाम नहीं आया है. इस बात को लेकर हम बहुत टेंशन में हैं.&quot; </p><p>&quot;हम पति-पत्नी यह छोटी-सी चाय की दुकान चलाते हैं. इससे हमारा गुज़ारा हो रहा है. दिन भर इस दुकान में काम करते हैं, इसलिए कुछ सोच नहीं पाते. लेकिन जब रात को घर जाते हैं तो इन बातों से काफ़ी चिंता होती है. रोज़ाना आंख के सामने इस विशाल बिल्डिंग को बनते देख रहे हैं.&quot; </p><p>&quot;अगर मेरी पत्नी को पकड़कर डिटेंशन सेंटर में डाल दिया तो हमारा परिवार बिखर जाएगा. पत्नी के बिना बच्चों को कैसे पालूंगा. बेटा पांच साल का है और बेटी 2 साल की है. जब-जब बात दिमाग़ में आती है तो मैं डर जाता हूं.&quot;</p><figure> <img alt="असम, डिटेंशन सेंटर" src="https://c.files.bbci.co.uk/9AF5/production/_110296693_mamtahajongwithherhusband.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Dilip Sharma/BBC</footer> <figcaption>इस डिटेंशन सेंटर के ठीक बाहर चाय और खाने-पीने की एक छोटी सी होटल चलाने वाले अमित हाजोंग अपनी पत्नी ममता का नाम एनआरसी में शामिल नहीं किए जाने से काफी परेशान हैं</figcaption> </figure><h1>प्रधानमंत्री का बयान</h1><p>इस साल 31 अगस्त को नेशनल सिटिज़न रजिस्टर यानी एनआरसी की जो आख़िरी लिस्ट जारी हुई थी उसमें 19 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं किया गया हालांकि इस एनआरसी को लेकर सत्तारूढ़ प्रदेश भाजपा बिल्कुल ख़ुश नहीं है. </p><p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में संसद के भीतर में पूरे देश में एनआरसी लागू करने की बात कही थी. यानी उस समय फिर से असम में एनआरसी का काम किया जाएगा.</p><p>जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में कहा, &quot;जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की संतान हैं. भाइयों और बहनों, उनसे नागरिकता क़ानून और एनआरसी दोनों का कोई लेना-देना नहीं है. देश के मुसलमानों को ना डिटेंशन सेंटर में भेजा जा रहा है, ना हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेंटर है. भाइयों और बहनों, ये सफेद झूठ है, ये बद-इरादे वाला खेल है, ये नापाक खेल है. मैं तो हैरान हूं कि ये झूठ बोलने के लिए किस हद तक जा सकते हैं.&quot;</p><p>सामाजिक कार्यकर्ता शाहजहां कहते है, &quot;जो डिटेंशन सेंटर भारत सरकार के पैसों से बन रहा हो उसके बारे में प्रधानंमंत्री ऐसा कैसे बोल सकते है? यहां आने वाले सबको पता है कि यह डिटेंशन सेंटर बन रहा है जो एशिया का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर होगा.&quot; </p><p><strong>(</strong><strong>बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सक</strong><strong>ते.)</strong></p>

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