दीपोत्सव पर लक्ष्मी-गणेश का आह्वान
Updated at : 27 Oct 2019 2:19 AM (IST)
विज्ञापन

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जानेवाला दीपोत्सव विशेष रूप से लक्ष्मीजी और गणेशजी की अाराधना का पर्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपावली पर अन्य देवताओं की अपेक्षा मां लक्ष्मी और श्रीगणेश की पूजा को ही क्यों प्राथमिकता दी जाती है? आइए जानें, आज दीपावली पर माता लक्ष्मी […]
विज्ञापन
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जानेवाला दीपोत्सव विशेष रूप से लक्ष्मीजी और गणेशजी की अाराधना का पर्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपावली पर अन्य देवताओं की अपेक्षा मां लक्ष्मी और श्रीगणेश की पूजा को ही क्यों प्राथमिकता दी जाती है? आइए जानें, आज दीपावली पर माता लक्ष्मी और श्रीगणेश की पूजा के महत्व के बारे में.
दीपावली में लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की अाराधना की परंपरा है. श्री गणेश बुद्धि के देवता हैं, जिनकी दो पत्नियां रिद्धि-सिद्धि और दो पुत्र शुभ-लाभ हैं. लक्ष्मीजी धन-वैभव का प्रतिनिधित्व करती हैं अौर गणेशजी बुद्धि-विवेक के प्रतीक हैं. दीपावली में धन वृद्धि की कामना के साथ लक्ष्मीजी और बुद्धि एवं विवेक प्राप्ति के लिए गणेशजी की स्तुति की जाती है.
धन के सही उपयोग के लिए विवेक का होना आवश्यक है. इसलिए दीपावली में लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की भी पूजा की जाती है. कहते हैं बिना बुद्धि-ज्ञान के केवल धन का होना व्यर्थ है. धन का होना तभी सार्थक है, जब उसका सोच-समझकर सदुपयोग किया जाये. गणेशजी को संपूर्ण विद्या और बुद्धि का स्वामी कहा गया है. लक्ष्मीजी के साथ गणेश पूजन का एक बड़ा आधार यह है कि धन के साथ बुद्धि सदा बनी रहे.
लक्ष्मी पूजा का महत्व
हम सभी मां लक्ष्मी की धन की देवी के रूप में अाराधना करते हैं. लक्ष्मी जी की कृपा से धन-ऐश्वर्य व वैभव की प्राप्ति होती है. धन-वैभव और सौभाग्य प्राप्ति के लिए दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है. कार्तिक अमावस्या को धन की देवी लक्ष्मी की पूजा और स्तुति कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. कहा जाता है कि धन की देवी मां लक्ष्मी इस दिन घर में प्रवेश करती हैं.
गणेश : ऋद्धि-सिद्धि दाता
कोई भी शुभ कार्य शुरू करते समय की जानेवाली पूजा में सबसे पहले गणेशजी का स्मरण किया जाता है. प्रत्येक पूजा में गणेशजी को प्रथम स्थान दिया गया है. भगवान गणेश विघ्नों का नाश करनेवाले और ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता मानेजाते हैं. गणेशजी बुद्धि के भी देवता हैं. इस वजह दीपावली समेत से हर शुभ कार्य का शुभारंभ विघ्ननाशक गणेशजी के पूजन से ही होता है.
पौराणिक कथाएं
दीपावली में गणेश-लक्ष्मी की पूजा एक साथ करने की परंपरा को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. शास्त्रों में लक्ष्मी जी को धन और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. कहते हैं कि एक बार लक्ष्मी जी को अभिमान हो गया. विष्णु जी उनके अभिमान को खत्म करना चाहते थे. उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा- स्त्री तब तक पूर्ण नहीं होती, जब तक वह मां न बन जाये. लक्ष्मी जी की कोई संतान नहीं थी. विष्णु जी की बात सुन वह बहुत निराश हुईं.
तब देवी पार्वती के पास गयीं और उनके दो पुत्रों में से एक को गोद लेने का अनुरोध किया. पार्वती जी जानती थीं कि लक्ष्मी जी एक स्थान पर अधिक समय नहीं रहतीं. इसलिए वह बच्चे की देखभाल नहीं कर पायेंगी. लेकिन उनके दर्द को समझते हुए पुत्र गणेश को उन्हें सौंप दिया. लक्ष्मी जी बहुत प्रसन्न हुईं और कहा कि वह गणेश का पूरा ध्यान रखेंगी.
साथ ही कहा कि सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी की पूजा करते समय पहले गणेश की पूजा की जायेगी, तभी मेरी पूजा संपन्न होगी. मान्यता है कि तभी से दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की भी पूजा होती है. अन्य कथा के अनुसार, भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त कर इसी दिन अयोध्या लौटे थे. उनके आगमन की खुशी में पूरे अयोध्या को दीपों से सजाया गया था. तभी से दीपावली का त्योहार मनाया जाता है.
ऐसे करें दीपावली पूजन
दीपावली पर्व पर की जानेवाली भगवान गणेश और लक्ष्मीजी की पूजा के लिए एक साफ थाली में रोली, चावल, केसर, इत्र, कपूर, धूप, मौली, शुद्ध घी का दीपक, धान की खील, बताशे, फल, मिठाई, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, लाल फूलों की माला, खासतौर पर कमल का फूल, कुछ खुले फूल और दूर्वा होना चाहिए.
पूजा के लिए मिट्टी के 11 या 21 छोटे दीये, एक बड़ा दीपक और एक चौमुखा दीपक, कलश स्थापना के लिए मिट्टी का एक कलश और कलश पर रखने के लिए एक नारियल होना चाहिए.
माता लक्ष्मी के लिए वस्त्र और शृंगार का सामान, लक्ष्मीजी और गणेशजी को स्नान कराने के लिए पंचामृत लेना चाहिए.
पूजा के लिए लक्ष्मी माता की मूर्ति लें, जिसमें गणेशजी भी साथ हों. पूजा की एक चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा भी लें. चौकी पर गणेशजी के दायीं ओर लक्ष्मीजी की प्रतिमा रखें.
पूजा शुरू करने से पहले पूजा की चौकी के पास रंगोली बनाएं और चौकी के चारों कोनों में दीप जलाएं. इसके बाद चौकी पर कच्चे चावल रख कर गणेशजी और लक्ष्मीजी की प्रतिमा को विराजित करें.
गणेशजी विवेक के देवता हैं और लक्ष्मी जी संपदा की देवी. संपत्तिवान की अपेक्षा विवेकवान होना अधिक महत्वपूर्ण है. इसलिए लक्ष्मी पूजन से पहले गणेशजी की स्तुति और पूजा करें.
इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा शुरू कर उन्हें जल-पुष्प, कुमकुम अर्पण करें. उनकी प्रतिमा के आगे दीप प्रज्ज्वलित कर मां को शृंगार सामग्री और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें.
भोग लगा कर गणेशजी और लक्ष्मीजी की आरती करें. पूजा में श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त का पाठ भी कर सकते हैं. पूजा संपन्न होने के बाद मां लक्ष्मी-गणेशजी से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांग कर कृपा बनाये रखने की प्रार्थना करें.
गणेशजी के दाहिने विराजें लक्ष्मीजी
लक्ष्मी-गणेश पूजा के समय गणेशजी को सदा लक्ष्मीजी की बायीं ओर स्थापित करें. मान्यता है कि आदिकाल से पत्नी को ‘वामांगी’ कहा गया है और सदैव बायां स्थान पत्नी को ही दिया जाता है. अत: पूजा करते समय लक्ष्मी-गणेश को इस प्रकार स्थापित करें कि लक्ष्मीजी सदा गणेशजी के दाहिनी ओर ही रहें, तभी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




