क्या होगा अगर कर्मचारियों की हाई-टेक निगरानी की परिपाटी बन जाए?

<figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/16C10/production/_108000239_0707ebc8-199d-4a46-a4ed-f24f3e5b72d6.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>2019 में ज़्यादातर लोगों के लिए एक स्थायी नौकरी अब दूर का ख्वाब हो चुकी है. </p><p>हायर और फ़ायर वाली गिग इकॉनमी तेज़ी से पैर पसार रही है. एक अनुमान के मुताबिक़ अमरीका में 5.7 करोड़ लोग और ब्रिटेन में 11 लाख लोग अल्पकालिक नौकरियां कर […]
<figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/16C10/production/_108000239_0707ebc8-199d-4a46-a4ed-f24f3e5b72d6.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>2019 में ज़्यादातर लोगों के लिए एक स्थायी नौकरी अब दूर का ख्वाब हो चुकी है. </p><p>हायर और फ़ायर वाली गिग इकॉनमी तेज़ी से पैर पसार रही है. एक अनुमान के मुताबिक़ अमरीका में 5.7 करोड़ लोग और ब्रिटेन में 11 लाख लोग अल्पकालिक नौकरियां कर रहे हैं. </p><p>इसमें और तेज़ी आने वाली है. 2035 तक हममें से ज़्यादातर लोग लंबी अवधि के क़रार के बिना नौकरियां कर रहे होंगे और इंटरनेट से जुड़े अरबों उपकरणों (IoT) के ज़रिये हमारी हर हरकत पर नज़र रहेगी. </p><p>भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को रेखांकित करने वाली रॉयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स, मैन्युफ़ैक्चरर्स एंड कॉमर्स (आरएसए) की एक रिपोर्ट में इसका ख़ाका खींचा गया है, लेकिन यह पहले से ही हक़ीक़त बन रही है. </p><p>एक ऑनलाइन रिटेलर की पूर्व कर्मचारी सारा मैकिंटोश कहती हैं, "शिफ्ट शुरू होने और ख़त्म होने के समय मुझे (सॉफ्टवेयर में) लॉग इन करना पड़ता था और हर ब्रेक के बारे में बताना पड़ता था, यहां तक कि टॉयलेट जाने के बारे में भी." </p><p>"वे गिनेंगे कि मैंने उनके सिस्टम पर कितना काम किया, फिर मेरे काम के घंटे से ब्रेक निकालकर उसमें भाग देंगे और देखेंगे कि मैंने दिन का टारगेट पूरा किया है या नहीं." </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-39088245?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">आपका ही फ़ोन करता है आपकी जासूसी, आख़िर कैसे?</a></li> <li><a href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/06/150604_isi_phone_tap_rd?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">आईएसआई ने चार माह में 25,000 फ़ोन टैप किए</a></li> </ul><figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/CFD0/production/_108000235_3f92ecbc-d08c-4ccd-8a45-6c5189165765.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>काम पर जासूसी</h1><p>ट्रेडस यूनियन कांग्रेस (टीयूसी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ब्रिटेन के 56% श्रमिकों को लगता है कि काम पर उनकी जासूसी होती है. </p><p>उनके इंटरनेट इस्तेमाल, कीस्ट्रोक्स और वेब कैमरे की निगरानी होती है. पहनने योग्य उपकरणों और चेहरे पहचानने की तकनीक का इस्तेमाल करके उनके लोकेशन और पहचान की जांच की जाती है. </p><p>ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस की रिपोर्ट में एक कंस्ट्रक्शन मज़दूर का उदाहरण दिया गया है, जिसे अंगूठा लगाने के बाद काम मिला है. </p><p>उसके साथ कोई क़रार नहीं हुआ. किसी प्रक्रिया में समय नहीं लगा, लेकिन यह उसकी निजता का उल्लंघन है. </p><p>रॉयल सोसाइटी की रिपोर्ट में 2035 तक चार स्थितियों की कल्पना की गई है. इनमें से एक को "सटीक अर्थव्यवस्था" कहा गया है. </p><p>लेखकों ने 2035 इसलिए चुना क्योंकि यह लोगों की कल्पना में थोड़ा दूर लगता है, लेकिन यह समय इतना पास भी है कि इसकी संभावनाओं के बारे में आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है. </p><p>RSA में अर्थव्यवस्था के निदेशक असीम सिंह कहते हैं, "2035 परिचित सा होगा, लेकिन अलग होगा." </p><p>उनका कहना है कि रिपोर्ट के चार परिदृश्य इसलिए डिजाइन किए गए हैं ताकि यह देखा जा सके कि भविष्य किधर जा सकता है. </p><p>सटीक अर्थव्यवस्था का परिदृश्य होने की संभावना अन्य तीन परिदृश्यों से अधिक नहीं है, लेकिन यह सबसे ज़्यादा परेशान करने वाला है. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-39221308?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ऐसे होती है आपके फ़ोन और लेपटॉप की जासूसी</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-39088245?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">आपका ही फ़ोन करता है आपकी जासूसी, आख़िर कैसे?</a></li> </ul><figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/11DF0/production/_108000237_a70c27e5-5c71-4bee-9829-b48332a6f6ff.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>गिग इकॉनमी 2035 </h1><p>सटीक अर्थव्यवस्था परिदृश्य में कंपनियां सेंसरों से जुटाए गए रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल संसाधनों के कुशल आवंटन में कर सकेंगी. </p><p>स्वास्थ्य और खुदरा क्षेत्र में 2035 तक गिग इकॉनमी पैटर्न सामान्य बात हो जाएगी, ऐसे में कंपनियां मांग के हिसाब से श्रम रणनीतियां बना सकेंगी. </p><p>इसके अलावा सेंसर्स के विस्तार से वे कर्मचारियों की हर गतिविधि का विश्लेषण भी कर सकेंगी. </p><p>खुदरा क्षेत्र की दुकानों में सेंसर्स से ग्राहकों की संख्या के बारे में सूचना इकट्ठा की जाएगी. पहने जा सकने वाले उपकरणों से स्टाफ़ की हरकतों पर नज़र रखी जा सकेगी. </p><p>डेटा के आधार पर कर्मचारियों को स्टार रेटिंग दी जाएगी और मैनेजर उनका इस्तेमाल कर्मचारियों को पुरस्कृत करने या दंडित करने में कर सकेंगे. </p><p>सिंह का कहना है कि टाइमशीट और निगरानी उपकरणों के ज़रिये गोदामों और कॉल सेंटरों में काम करने वाले लोगों पर नज़र रखने का काम शुरू हो चुका है.</p> <ul> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131024_us_spying_german_chancellor_calls_ar?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अमरीका पर मर्केल के फ़ोन कॉलों की जासूसी का आरोप</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-40337220?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">पॉकेट में पड़ा मोबाइल फोन बना जासूस</a></li> </ul><figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/3778/production/_108000241_b51fff1e-cc69-4c11-a55b-8e030cc0e5d2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>हर घंटे का लॉग </h1><p>बेथिया स्टोन एक पीआर एजेंसी में काम करती हैं. वहां टाइमशीट सॉफ्टवेयर के सहारे हर 15 मिनट, 30 मिनट और एक घंटे के ब्लॉक का लॉग तैयार किया जाता है. </p><p>इसका नतीजा यह हुआ है कि कर्मचारी पहले से ज़्यादा ओवरटाइम करने लगे हैं और माहौल "चिंताजनक और तनावपूर्ण" हो गया है. </p><p>स्टोन ने छात्र रहते हुए भी इस निगरानी का अनुभव किया था जब वह एक सुपरमार्केट में काम करती थी. </p><p> "मुझे हर मिनट एक निश्चित संख्या में चीज़ों को स्कैन पड़ता था. यदि वह संख्या घट जाए तो अंडर परफॉर्मेंस माना जाता था और अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती थी." </p><p>सिंह का कहना है कि इस तरह की निगरानी बढ़ती जा रही है. "नौकरियां घट रही हैं और श्रमिक एक अस्थायी काम से दूसरे अस्थायी काम में जा रहे हैं. नियोक्ता उनसे और अधिक की उम्मीद कर रहे हैं." </p><p>"यह सिर्फ़ काम के घंटे का मामला नहीं है. यह निजता, ख़ुशी, स्वायत्तता और मशीनीकृत दुनिया में ख़ुद को इंसान के रूप में महसूस करने के सामने चुनौती है." </p><p><strong>कुछ कर्मचारी </strong><strong>ख़ुश </strong><strong>हैं </strong></p><p>रिपोर्ट के मुताबिक़, निगरानी की इस व्यवस्था को उन श्रमिकों का समर्थन भी मिल सकता है जिनको लगता है कि इससे कामचोर सहकर्मियों पर लगाम लगेगी, प्रदर्शन के आधार पर उनको ज़्यादा भुगतान किया जाएगा और उनके लिए आगे बढ़ने के नये मौक़े खुलेंगे. </p><p>सिंह कहते हैं, "इस अर्थव्यवस्था का चरम लक्ष्य 1984 उपन्यास के परिदृश्य से मेल खाता है जिसमें एक ऐसी दुनिया की बात है जहां काम की दुनिया, राजनीतिक और सामाजिक दुनिया एक दूसरे से जुड़े हैं और पूरी तरह नियंत्रित हैं." </p><p>उनको लगता है कि अगर हम अनुमति देते हैं तो तकनीक इस प्रक्रिया की रफ़्तार बढ़ा सकती है. </p> <ul> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/01/140127_snowden_industrial_espionage_ra?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कंपनियों की जासूसी कर रहा है अमरीका- स्नोडेन</a></li> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131027_merkel_spying_sb?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">दस साल से हो रही थी मर्केल की जासूसी</a></li> </ul><figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/8598/production/_108000243_86bf2766-cdda-494f-b888-fd0ebba951a3.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>कौन जीता कौन हारा </h1><p>गिग इकॉनमी की डिजाइन नियोक्ताओं को मांग के आधार पर कर्मचारियों को समायोजित करने की आज़ादी देती है. </p><p>श्रमिक अल्प अवधि में अपनी पसंद का काम चुन सकते हैं. सैद्धांतिक तौर पर सुनने में यह भले ही अच्छा लगे, लेकिन इसके नुक़सान भी हैं. </p><p>एबरडीन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर कीथ बेंडर का कहना है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की निष्ठा खो देती हैं. </p><p>दूसरी नौकरी नहीं होने पर श्रमिकों को शून्य घंटे के क़रार करने को मजबूर किया जाता है जिसमें नौकरी की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती. </p><p>रिपोर्ट के मुताबिक़ फ़िलहाल शून्य-घंटे के अनुबंधों में ख़राब भुगतान किया जाता है, लेकिन भविष्य में विशेष प्लेटफॉर्म तैयार होंगे. </p><p>गिग इकॉनमी में ध्रुवीकरण होगा. ऊंची रेटिंग वाले लोगों को उनकी पसंद के काम मिलेंगे, जबकि दूसरे निराश-हताश श्रमिकों को हतोत्साहित करने वाले कामों में झोंक दिया जाएगा. </p><p>मांग वाले श्रमिकों- जैसे नर्स या डॉक्टर- को फ़ायदा होगा क्योंकि वे असामान्य घंटों में काम के ज़्यादा पैसे ले सकेंगे. </p><p>नियोक्ता की लगातार निगरानी में अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए कुछ श्रमिक दिमाग़ी क्षमता बढ़ाने वाली दवाइयां भी ले सकते हैं. </p> <ul> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/11/131102_india_leak_security_nn?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">जासूसी से बचने को भारत विकसित कर रहा है निगरानी तंत्र-</a></li> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/09/110917_phone_hacking_ia?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">फ़ोन हैकिंग में गोपनीयता क़ानून का सहारा</a></li> </ul><figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/C92C/production/_108000515_b3a931c0-76ff-485e-af11-934e2a7353b7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><h1>बूढ़े और जवान </h1><p>युवा श्रमिकों के लिए आगे बढ़ना और करियर की सीढ़ी पर तेज़ी से चढ़ना आसान होगा, लेकिन ऐसा पुराने और कम लचीले सहकर्मियों की क़ीमत पर होगा. </p><p>बेंडर पूछते हैं कि क्या बूढ़े लोग हार जाएंगे. वह कहते हैं, "रुढ़िवादी सोच तो यही है कि पुरानी पीढ़ी तकनीक और नई पीढ़ी के साथ नहीं चल पाएगी. लेकिन एक तर्क यह भी है कि नये लोग निजता को पिछली पीढ़ी जितनी अहमियत नहीं देते, इसलिए वे भी जोखिम में रहेंगे." </p><p>बूढ़े हों या जवान, बेंडर मानते हैं कि अधिक संपन्न लोग अस्थायी कार्य स्थितियों में अपने हितों का बचाव कर पाएंगे क्योंकि उनके पास अधिक नक़दी है. </p><p>सिंह इससे सहमत हैं. उनका कहना है कि हम "निगरानी असमानता" की दोहरी प्रणाली का भी जोखिम उठा रहे हैं. </p><p>जिनके पास साधन हैं वे बेहतर स्थितियों की मांग कर सकते हैं, लेकिन जिनके पास साधन नहीं हैं वे पीड़ित होंगे. </p><p>इस प्रकार संभावना यह है कि कई श्रमिक कम भुगतान वाली नौकरियों के लिए लड़ने के लिए छोड़ दिए जाएंगे. </p><h1>प्रतिभा पलायन </h1><p>बेंडर कहते हैं, "अगर हम व्यापक हो गिग इकॉनमी की जड़ तक जाएं तो हमें मौलिक रूप से पुनर्विचार करना होगा." </p><p>उदाहरण के लिए, नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) और सेहत की देखरेख करने वाली दूसरी एजेंसियों के पास लोगों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं सुलझाने के लिए ज़्यादा संसाधन होने की संभावना होगी, क्योंकि रोज़गार की सुरक्षा नहीं होना तनावपूर्ण होगा. </p><p>पीआर कर्मचारी स्टोन कहती हैं कि हालांकि किसी ने भी उनके काम के घंटे को लेकर उनकी आलोचना नहीं की, लेकिन वह जानती हैं कि उनकी निगरानी की जा रही है. यही तनावपूर्ण है. </p><p>"दिमाग़ में यह चलता रहता है कि आपके सीनियर यह न सोचें कि आप कम काम कर रहे हैं." निगरानी से दफ़्तरों में भरोसा भी टूटता है. </p><figure> <img alt="निगरानी" src="https://c.files.bbci.co.uk/1174C/production/_108000517_eaac9244-00e6-4053-807a-1129388d054e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>निजता का उल्लंघन </h1><p>सेल्स टीम की एडमिन सहायक कार्ली थॉम्पसेट ने जो ईमेल और संदेश अपने सहकर्मी को भेजे, उसे उनके नियोक्ता ने भी पढ़ लिए. </p><p>वह कहती हैं, "इससे हमारे और मैनेजरों के संबंध बिगड़ गए क्योंकि हमें लगा कि हमसे बच्चों की तरह सलूक किया जा रहा था." </p><p>ऑफ़लाइन निगरानी भी जारी रही. "यदि हम खड़े होते या एक-दूसरे से बातें कर रहे होते तो हम पर हमेशा नज़र रखी जाती थी. ऐसा लगता था जैसे हम जेल में हों." </p><p>थियोडोसिउ कहते हैं, "इस तरह की निगरानी का एक ऑर्वेलियन (मुक्त समाज विरोधी) पहलू है क्योंकि कर्मचारियों की हर गतिविधि की निगरानी और उसका विश्लेषण हो सकता है." </p><p>"उन पर कर्मचारियों का नियंत्रण नहीं होता और वे नहीं जानते कि उनकी सूचनाएं नियोक्ता किस तरह मनमाने ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं." </p><p>वह चेतावनी देते हैं कि लगातार निगरानी के कारण कर्मचारी दफ़्तर से अपने जीवन के किसी भी पहलू को नियंत्रित करना बंद कर देंगे, जिससे तनाव बढ़ने का ख़तरा रहेगा. </p><p>इस तरह की कार्यस्थितियां से कर्मचारियों का मानसिक और शारीरिक दोनों नुक़सान होगा. </p><p>रॉयल एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग की वाइस प्रेसिडेंट नाओमी क्लाइमर कहती हैं, "वैसे तो कर्मचारियों की निगरानी के पक्ष में भी कुछ सकारात्मक तर्क दिए जाते हैं, जैसे सुरक्षा और अच्छे प्रदर्शन की पहचान, लेकिन यह अक्सर इस तरह लागू किया जाता है जिससे यह कर्मचारियों की स्वायत्तता और गरिमा को कम करता है और तनाव बढ़ाता है." </p><p><strong>सामाजिक </strong><strong>क़रार </strong></p><p>गिग इकॉनमी को पहले से ही ग़रीबों को और क़मजोर करने का दोषी ठहराया जाता है. </p><p>अत्यधिक निगरानी की तकनीक आ जाने से आख़िरी नतीजा सरकारों, श्रम संगठनों और संघों पर निर्भर करेगा कि वे जोखिम में पड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए कैसा नियामक ढांचा तैयार करते हैं. </p><p>सिंह का कहना है कि हमें नये सामाजिक अनुबंधों या 21वीं सदी के सुरक्षा तंत्र की ज़रूरत है, जो सभी को समृद्ध करने और आगे बढाने में सहायक हो. </p><p>"कल्याणकारी योजनाओं को और बड़ा और साहसिक बनाना होगा, जितना 7 दशक पहले (ब्रिटिश सुधारक) विलियम बेवरिज ने कल्याणकारी राज्य बनाते समय सोचा था."</p><p>वैसा ही जैसे "1984" में विंस्टन स्मिथ बिग ब्रदर से लड़ते हैं. </p><p>लीड्स यूनिवर्सिटी बिज़नेस स्कूल में अर्थशास्त्र के प्रमुख डेविड स्पेंसर का मानना है कि अत्यधिक निगरानी का विरोध होगा और इसका प्रभाव सीमित रह जाएगा. "आख़िर में, हमारे पास विकल्प होगा कि तकनीक का विकास कैसे हो." </p><p>सिंह कुछ उदाहरण देते हैं. "हर नियोक्ताओं को सामूहिक रूप से यह कहना चाहते हैं कि गोदाम के कर्मचारियों को टैग करना ठीक नहीं है. हमें ज़ोर देकर कहना चाहिए कि निगरानी के इस युग में मानव अधिकार क़ानून पर फिर से विचार करना चाहिए." </p><p>"हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि हमारी आवाज़ सुनी जाए. हमें स्वचालन और मशीनी अक़्ल पर विचार-विमर्श के लिए मंच चाहिए." </p><p>"हमें ख़राब परिपाटियों पर चर्चा करके उनको दूर करने की ज़रूरत है और सरकार और व्यापार को अपने साथ लाने की आवश्यकता है." </p><p>आज़ादी का मतलब ग़ुलामी नहीं है. हम बिग ब्रदर को सब कुछ देखने से रोक सकते हैं, अगर हम सतर्क रहें.</p><p><strong>(</strong><a href="https://www.bbc.com/worklife?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बीबीसी वर्कलाइफ़</a><strong> पर मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ने के लिए </strong><a href="https://www.bbc.com/worklife/article/20190705-we-were-constantly-watched-it-felt-like-we-were-in-prison?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">यहां क्लिक</a><strong> करें. आप बीबीसी </strong><strong>वर्कलाइफ़</strong><strong> को</strong><a href="https://www.facebook.com/BBCCapital">फ़ेसबुक</a><strong> और </strong><a href="https://twitter.com/BBC_Capital">ट्विटर</a><strong> पर फ़ॉलो कर सकते हैं )</strong></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>
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