राहुल से पहले ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने भी की थी वायनाड पर राज करने की कोशिश

Updated at : 21 Apr 2019 2:17 PM (IST)
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राहुल से पहले ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने भी की थी वायनाड पर राज करने की कोशिश

तिरुवनन्तपुरम : लोकसभा चुनाव में इस बार राहुल गांधी के वायनाड से भी किस्मत आजमाने के कारण जहां यह क्षेत्र सुर्खियों में है वहीं इस क्षेत्र का जुड़ाव ब्रिटेन के एक पूर्व प्रधानमंत्री और वाटरलू की लड़ाई के नायक से भी रहा है. ‘वाटरलू युद्ध’ के नायक वेलेस्ली राजनीति में आने से पहले ब्रिटिश सेना […]

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तिरुवनन्तपुरम : लोकसभा चुनाव में इस बार राहुल गांधी के वायनाड से भी किस्मत आजमाने के कारण जहां यह क्षेत्र सुर्खियों में है वहीं इस क्षेत्र का जुड़ाव ब्रिटेन के एक पूर्व प्रधानमंत्री और वाटरलू की लड़ाई के नायक से भी रहा है. ‘वाटरलू युद्ध’ के नायक वेलेस्ली राजनीति में आने से पहले ब्रिटिश सेना में थे.

वायनाड व भारत से 1805 में वापस जाने के बाद ही उन्हें ‘ड्यूक ऑफ वेलिंगटन’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था. वह 1828 और फिर 1834 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी बने. सेना के कमांडर के तौर पर उनका नाम वाटरलू की लड़ाई के नायक के तौर पर भी उद्धृत है. इस लड़ाई में उन्होंने ब्रिटेन की सेना का नेतृत्व किया था जिसने फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट पर जीत हासिल की थी.

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार ब्रिटिश कमांडर पूरी मशक्कत करने के बावजूद केरल के विद्रोही राजा वर्मा पजहस्सी राजा को काबू करने में नाकाम रहे थे। पजहस्सी राजा ने ईस्ट इंडिया कम्पनी को भी काफी परेशान किया था. दस्तावेजों के अनुसार वेलेस्ली (1769-1852) को मैसूर के शासक टीपू सुल्तान और वायनाड के राजा द्वारा बढ़ती आक्रामकताओं का दमन करने के लिए मालाबार, दक्षिण केनरा और मैसूर के औपनिवेशिक बलों का कमांडर नियुक्त किया गया था. इन्होंने उनके खिलाफ गुरिल्ला युद्ध की रणनीति भी अपनाई थी. कोट्टायम शाही परिवार के राजा ने वायनाड पर दावा किया और उस पर अपना कब्जा बनाए रखा था.

‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ ने हालांकि उनके दावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था क्योंकि यहां की उच्च गुणवत्ता वाले काली मिर्च, हल्दी, इलायची और अन्य मसालों के एक समृद्ध भंडार में उनकी विशेष रुचि थी. इसके बाद लंबे संघर्ष के बाद सात अप्रैल 1800 में अपने साथी सैनिक लेफ्टिनेंट कर्नल किर्कपैट्रिक को लिखे एक पत्र में वेलेस्ली ने वायनाड और उसके लोगों की बड़ी आलोचना की.

वायनाड के जटिल भूगोल पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने उसे पूरी जगह को "जंगल" करार दिया. जटिल भूगोल के कारण ब्रिटिश सैनिकों के लिए सैन्य अभियान मुश्किल बना गया था. वेलेस्ली ने पत्र में यहां के मूलनिवासियों को ‘‘बर्बर और क्रूर” भी बताया था. ‘केरल इतिहास समिति’ के महासचिव ने बताया कि राजा के ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के हाथों पराजित होने से पहले ही वेलेस्ली को अपने देश लौटना पड़ा था. इसके बाद पजहस्सी राजा का 1805 में निधन हो गया था.

इतिहासकारों के एक वर्ग का कहना है कि ब्रिटिश सेना के जवानों ने उनकी हत्या की थी. लेकिन कुछ अन्य लोगों का दावा है कि राजा ने औपनिवेशिक बल द्वारा वायनाड पर कब्जा किये जाने से पहले आत्महत्या कर ली थी. गौरलतब है कि वायनाड लोकसभा सीट पर 23 अप्रैल को मतदान होगा। राहुल गांधी इस बार उत्तर प्रदेश के अमेठी के अलावा यहां से भी चुनाव लड़ रहे हैं.

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