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झूठी खबरों के खिलाफ बीबीसी के अभियान का होगा आगाज

Updated at : 09 Nov 2018 12:08 PM (IST)
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झूठी खबरों के खिलाफ बीबीसी के अभियान का होगा आगाज

लंदन : ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) गलत सूचना और झूठी खबरों के खिलाफ एक नया अभियान शुरू करेगी. वैश्विक मीडिया साक्षरता को बढ़ाने के खास मकसद वाले इस काम में भारत सहित दूसरे देशों में कार्यशालाएं और बहस मुबाहिसे आयोजित किए जाएंगे. ‘दि बियोंड फेक न्यूज प्रोजेक्ट’ नाम का यह अभियान आधिकारिक रूप से सोमवार […]

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लंदन : ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) गलत सूचना और झूठी खबरों के खिलाफ एक नया अभियान शुरू करेगी. वैश्विक मीडिया साक्षरता को बढ़ाने के खास मकसद वाले इस काम में भारत सहित दूसरे देशों में कार्यशालाएं और बहस मुबाहिसे आयोजित किए जाएंगे. ‘दि बियोंड फेक न्यूज प्रोजेक्ट’ नाम का यह अभियान आधिकारिक रूप से सोमवार को शुरू हो रहा है .

इसमें भारत और केन्या में परिचर्चा, तकनीकी हल निकालने के लिए हैकाथॉन और भारत, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, यूरोप, अमेरिका एवं मध्य अमेरिका में फैले बीबीसी नेटवर्कों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे. ‘दि बियोंड फेक न्यूज’ मीडिया साक्षरता कार्यक्रम भारत एवं केन्या में कार्यशालाओं के आयोजन के साथ पहले ही दस्तक दे चुका है. इसका लक्ष्य ब्रिटेन में गलत सूचनाओं से निपटने की दिशा में काम करना है.

ब्रिटेन के स्कूलों में डिजिटल मीडिया साक्षरता कार्यशालाएं पहले से चल रही हैं. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ग्रुप के निदेशक जेमी एंगस ने कहा, ‘‘साल 2018 में मैंने प्रण किया था कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ग्रुप वैश्विक ‘फेक न्यूज’ के खतरे पर महज जुबानी खर्च से आगे बढ़ेगा और इसका हल निकालने के लिए ठोस कदम उठाएगा. हमने भारत एवं अफ्रीका में जमीनी स्तर पर वास्तविक कार्रवाई में निवेश किया है.”
उन्होंने कहा, ‘‘ऑनलाइन तरीके से साझा करने पर गहन शोध खर्च से लेकर वैश्विक स्तर पर मीडिया साक्षरता कार्यशालाओं के आयोजन एवं विश्व के देशों में होने वाले कुछ महत्वपूर्ण चुनावों को देखते हुए बीबीसी रियल्टी चेक को लाने की वचनबद्धता के साथ इस साल हम नेतृत्वकारी वैश्विक आवाज के तौर पर अपने रास्ते बना रहे हैं ताकि समस्याओं की पहचान हो सके और हमारी महत्त्वाकांक्षाओं का हल निकाला जा सके. बीबीसी ने व्यापक शोध किया है कि उपयोगकर्ता गलत सूचनाओं को किस प्रकार और क्यों साझा करते हैं. इसके लिए भारत, केन्या एवं नाइजीरिया में इन लोगों ने अपने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स तक पहुंच प्रदान की. ऐसा पहले नहीं हुआ था.
इस शोध के सभी निष्कर्षों को अगले सप्ताह बियोंड फेक न्यूज सत्र की शुरूआत के साथ सार्वजनिक किया जाएगा. इस सत्र में एक वृत्तचित्र ‘फेक मी’ शामिल होगा, जो यह बताता है कि सोशल मीडिया से मिल रही जानकारी के समुचित होने की दिशा में कितने युवा लोग प्रयास करते हैं. इसमें रूस के गलत सूचना अभियान, फिलीपींस में गलत सूचनाएं फैलाने में फेसबुक का इस्तेमाल पर रिपोर्ट को शामिल किया गया है. साथ ही विश्व की कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों से यह बातचीत भी है कि झूठी खबर पर काबू पाने में उनकी भूमिका क्या है.
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