UPSC परीक्षा: पलामू के रचित राज थर्ड टॉपर,रांची की नैंसी को 36वां स्थान

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2013 के नतीजे घोषित, झारखंड से कई सफल मेदिनीनगर : पलामू के रचित राज ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में पूरे भारत में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. रचित का पूरा परिवार मेदिनीनगर के चर्च रोड में रहता है. पिता प्रभुनारायण पांडेय वनांचल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में अधिकारी […]
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2013 के नतीजे घोषित, झारखंड से कई सफल
मेदिनीनगर : पलामू के रचित राज ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में पूरे भारत में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. रचित का पूरा परिवार मेदिनीनगर के चर्च रोड में रहता है. पिता प्रभुनारायण पांडेय वनांचल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में अधिकारी हैं. रचित की प्रारंभिक शिक्षा मेदिनीनगर में ही हुई है. सेक्रेड हर्ट स्कूल से 10 वीं तक की पढ़ाई की. उसके बाद राजस्थान के पिलानी में बिड़ला सीनियर सेकेंडरी स्कूल से +2 किया. वेल्लोर के बीआइटी से बायो टेक में स्नातक किया. रचित की चाची रेखा पांडेय के मुताबिक रचित शुरू से ही मेधावी रहा है. वह क्लास में टॉप रहता था. शत-प्रतिशत स्कॉलरशिप पर उसे एमबीए में दाखिला भी मिला था.
चूंकि उसका लक्ष्य सिविल सर्विस में जाने का था, इसलिए उसने एमबीए की पढ़ाई छोड़ दी. रचित ने एक माह पहले भारतीय वन सेवा की परीक्षा में भी सफल हुए हैं. इसमें रचित का देश भर में 23 वां स्थान था.
पलामू के लिए गौरव की बात : रचित के चाचा निर्मल पांडेय उर्फ दुखन पांडेय का कहना है कि यह पलामू के लिए गौरव की बात है. रचित बचपन से ही मेधावी था और लोगों की उम्मीद थी कि वह बेहतर करेगा. आज उसने परिवार और पलामू का नाम बढ़ाया है.
सरप्राइज जैसा लगा : रचित राज
रचित अपनी सफलता पर काफी खुश है. फिलहाल वह अपने पिता प्रभुनारायण पांडेय, मां अनु पांडेय व बड़े भाई ऋषभ राज के साथ दिल्ली में हैं. दूरभाष पर प्रभात खबर से रचित ने कहा कि उम्मीद थी कि उनका सलेक्शन होगा, लेकिन ऑल इंडिया में उनका रैंक तीसरा होगा, इसकी आशा नहीं थी. रिजल्ट आने के बाद जब पता चला कि रैंक तीसरा है, तो यह उनके लिए सरप्राइज जैसा लगा.
मेहनत के साथ स्मार्ट वर्क करना जरूरी : रचित का कहना है कि कड़ी मेहनत के साथ-साथ स्मार्ट वर्क करना जरूरी है. शुरू से ही उनका लक्ष्य सिविल सर्विस में जाना था. इस लक्ष्य को निर्धारित कर वह निरंतर मेहनत में लगे थे. इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता,पिता,घरवालों के साथ-साथ शिक्षकों को दिया है. रचित का कहना है कि आप कड़ी मेहनत करेंगे, तो ईश्वर भी आशीर्वाद देंगे. जहां तक पलामू की बात है तो सफलता के लिए कोई स्थान मायने नहीं रखता. सफलता आने के पहले यह नहीं पूछती कि आप किस इलाके से हो, वहां आपका मेहनत बोलता है.
स्मार्ट वर्क दिखता है, तब सफलता मिलती है.
कारण भी बताया : बातचीत में रचित ने यह भी बताया कि आखिर उन्होंने लक्ष्य सिविल सर्विस को ही क्यों बनाया. रचित का कहना है कि देश में अच्छी नीति तैयार होती है, लेकिन उसकी क्रियान्वयन की जिम्मेवारी ब्यूरोक्रेटस पर होती है. बेहतर गवर्नेस स्थापित हो, इसके लिए वह सक्रियता के साथ काम करें. क्योंकि इस मामले में उनकी राय स्पष्ट है कि यदि नौकरशाह बेहतर करेंगे, तो निश्चित तौर पर सभी का समर्थन उसे मिलेगा. क्योंकि अब बहुत कुछ बदलाव आया है.
रांची की नैंसी सहाय को 36वां स्थान
रांची : संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में रांची की नैंसी सहाय ने 36वां स्थान प्राप्त किया है. नैंसी योगदा सत्संग कॉलेज के प्रोफेसर प्रकाश सहाय व शिक्षिका राजलक्ष्मी सहाय की पुत्री हैं. पुनदाग के वरुण रंजन ने 38वां स्थान प्राप्त किया है. कांके रोड के शशांक शेखर को देश भर में 60वां रैंक मिला है. इनके पिता अनिल कुमार सिन्हा पतरातू में प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी हैं. चतरा के निशांत ने इस परीक्षा में 648वां स्थान पाया है.जबकि दुमका के डॉ अतीश कुमार को 948वां स्थान मिला है. इस परीक्षा में रांची में आइजी रहे एमवी राव की पुत्री एम दीपिका ने भी सफलता पायी है. इन्हें 135वां स्थान मिला है.
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