कोलियरियों में आउटसोर्सिंग कंपनियों के बल पर हो रहा कार्य, आधे वेतन पर काम करने को मजबूर हैं ठेका मजदूर

झारखंड स्थित कोल इंडिया की तीन सहायक कंपनियों बीसीसीएल, सीसीएल व इसीएल की बात करें, तो कागज पर या कोल कंपनियाें के रिकॉर्ड में कुल 17,216 ठेका मजदूर कार्यरत हैं, जबकि हकीकत में 25-30 हजार से भी अधिक ठेका मजदूरों से काम लिया जा रहा है.
धनबाद, मनोहर कुमार : विभिन्न कोलियरियों में अब आउटसोर्सिंग कंपनियों के बल पर काम हो रहा है. इनमें स्थानीय दबंग, नेता और बाबुओं की मिलीभगत से कई अनियमितता बरती जा रही है. ये कंपनियां ठेका मजदूरों से काम कराती हैं, पर उनका जम कर शोषण होता है. कागज पर तय मानक (संख्या) के अनुसार मजदूर रखे जाते हैं, पर हकीकत में स्थानीय दबंग, नेता और बाबुओं को खुश करने के लिए भारी संख्या में मजदूर रख लिये जाते हैं. जानकारों के अनुसार यह सब खेल कागजों पर होता, खदान में उतने मजदूर काम करते नहीं दिखते. ऐसे कागजी मजदूरों के पैसे का बंदरबांट स्थानीय दबंग, बाबू व नेताओं के जेब में भी जाता है. यही कारण है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों में कार्यरत शत-प्रतिशत ठेका मजदूरों को आजतक हाइपावर कमेटी (एचपीसी) की अनुशंसा के मुताबिक वेतन व सुविधाएं नहीं मिल पायी हैं.
झारखंड स्थित कोल इंडिया की तीन सहायक कंपनियों बीसीसीएल, सीसीएल व इसीएल की बात करें, तो कागज पर या कोल कंपनियाें के रिकॉर्ड में कुल 17,216 ठेका मजदूर कार्यरत हैं, जबकि हकीकत में 25-30 हजार से भी अधिक ठेका मजदूरों से काम लिया जा रहा है. एक आकलन के अनुसार आउटसोर्सिंग के 40 प्रतिशत से अधिक ठेका मजदूरों को एचपीसी की अनुशंसा के मुताबिक वेज व सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. आउटसोर्सिंग व ठेका मजदूरों की बदौलत आज 70-80 फीसदी कोयले का उत्पादन हो रहा है. जानकारों के अनुसार आउटसोर्सिंग का काम लेने के लिए निजी कंपनी के लोग हाइ पावर कमेटी (एचपीसीसी) की अनुशंसा से संबंधित वेतन देने से संबंधित पत्र निविदा पेपर में लगाकर कोल कंपनियों से बढ़ा हुआ पैसा (वेज एक्सलेशन) भी ले लेते है. जानकारों के अनुसार इस पैसे की बंदरबांट कर ली जाती है.
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कहीं मजबूरी, तो कही दबंगों से मिलीभगत के कारण आउटसोर्सिंग कंपनियां मान लेती हैं नाजायज मांग
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ठेका मजदूरों ने सच बोला तो काम से हटाने की दी जाती है धमकी
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फॉर्म-बी व सी रजिस्टर में नहीं बनती सभी की हाजिरी, आइएमइ व वीटीसी ट्रेनिंग से रहते हैं वंचित
बीसीसीएल के कुसुंडा एरिया के ऐना में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी मेसर्स आरके ट्रांसपोर्ट में 279 ठेका मजदूर काम कर रहे हैं. इसके अलावा गोंदुडीह की आउटसोर्सिंग कंपनी हिल टॉप में 135 व एनजीकेसी में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनी मेसर्स यूसीसी-बीएलएल (जेवी) में करीब 115 ठेका मजदूर काम कर रहे हैं. इस तरह इन तीन आउटसोर्सिंग परियोजनाओं में कागज पर करीब 529 ठेका मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि हकीकत में यहां करीब 1000 ठेका मजदूरों से काम लिया जा रहा है. कुछ ऐसा ही हाल है बीसीसीएल में संचालित अन्य आउटसोर्सिंग परियोजना का.
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पावर कमेटी की अनुशंसा के मुताबिक वर्तमान में अकुशल को 1,007 रुपये, अर्धकुशल को 1,045 रुपये, कुशल को 1,084 रुपये व अतिकुशल ठेका कर्मियों को 1,122 रुपये प्रतिदिन के मुताबिक वेतन भुगतान होना चाहिए. परंतु वर्तमान में 60 प्रतिशत ठेका कर्मियों को एचपीसी के मुताबिक, जबकि 40 प्रतिशत ठेका कर्मियों को 8 से 15 हजार के बीच भुगतान किया जाता है.
आउटसोर्सिंग में तीन कैटेगरी के ठेका मजदूरों से काम लिया जाता है. एक जो माइनिंग में काम करते हैं. इन्हें एचपीसी की अनुशंसा के मुताबिक वेतन दिया जाता है. दूसरे वैसे मजदूर होते हैं जो ड्यूटी पर आते तो हैं, पर हाजिरी बना कुछ देर रह घर लौट जाते हैं. तीसरे श्रेणी में वैसे मजदूर हैं जो सिर्फ हाजिरी बनाने आते हैं या फिर उनकी हाजिरी घर से ही बन जाती हैं.
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हाइपावर कमेटी (एचपीसी) ने चार श्रेणी में ठेका मजदूरों को बांट प्रतिदिन 1007 रु, 1045 रु, 1084 रुपये व 1122 रुपये की दर से भुगतान की अनुशंसा की थी. भूमिगत खदान वालों को 10 % भत्ता का भी प्रावधान है, परंतु अबतक नहीं मिला.
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सीएमपीएफ व सीएमपीएस की सुविधा, बोनस एक्ट के अनुसार बोनस भुगतान व ओपीडी तथा इंडोर चिकित्सा सुविधा सबको मिलनी है, पर नहीं मिली.
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वर्ष 2016 में ठेका मजदूरों को 8.33 फीसदी बोनस की घोषणा की गयी थी. महाप्रबंधक स्तर के अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, पर सभी ठेका मजदूरों को नहीं मिला.
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By Prabhat Khabar News Desk
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