वीआइपी लोगों के आवासों पर नहीं होगा मनमाना खर्च, बन रही है नियमावली

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 15 Mar 2020 1:58 AM

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सरकार ने सरकारी आवासों पर होनेवाले अनाप-शनाप खर्च पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाया है. इस तरह अब यहां अति विशिष्ट लोगों के आवासों पर अनावश्यक अधिक खर्च नहीं किया जा सकेगा. मंत्री, विधायक और अफसर कोई भी अपनी मर्जी से आवासों पर मनमाना खर्च नहीं करा सकेंगे

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मनोज लाल, रांची : सरकार ने सरकारी आवासों पर होनेवाले अनाप-शनाप खर्च पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाया है. इस तरह अब यहां अति विशिष्ट लोगों के आवासों पर अनावश्यक अधिक खर्च नहीं किया जा सकेगा. मंत्री, विधायक और अफसर कोई भी अपनी मर्जी से आवासों पर मनमाना खर्च नहीं करा सकेंगे. आवासों पर सारा काम नियम के मुताबिक ही होगा. इतना ही नहीं, नीचे से लेकर ऊपर तक किस टाइप के आवास पर कितना खर्च होगा, यह भी नये नियम में रहेगा.

उससे अधिक की राशि खर्च नहीं की जा सकेगी. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद यह तय किया जा रहा है कि किस टाइप के आवास पर कितना खर्च किया जाये. इ टाइप, एफ टाइप से लेकर मंत्री-विधायकों व अफसरों के आवासों की मरम्मत के लिए राशि तय की जा रही है. सरकार इसे लेकर नया नियम बनाने जा रही है. उस नियम के मुताबिक ही सारे काम होंगे. जल्द ही इसे कैबिनेट की बैठक से स्वीकृत कराया जायेगा.

टाइम फ्रेम होगी मरम्मत : साधारण मरम्मत का कार्य जरूरत के मुताबिक कराया जायेगा. अचानक जरूरत पड़ने पर किसी के भी आवास की मरम्मत का कार्य कराया जायेगा. वार्षिक मरम्मत के लिए खर्च का दायरा भी तय किया जा रहा है. हर साल आवासों में क्या मरम्मत के कार्य कराने हैं, इसकी सूची व राशि दोनों तय की जायेगी. वहीं विशेष मरम्मत के कार्य हर पांच साल में कराये जायेंगे. हर पांच साल में नयी सरकार व नये मंत्री आयेंगे, इसे देखते हुए तय समय में विशेष मरम्मत के कार्य कराये जा सकेंगे. इसकी राशि भी तय की जा रही है.

इंजीनियरों पर दबाव नहीं डाला जा सकेगा : नये नियम के लागू हो जाने पर अब अति विशिष्ट लोगों की ओर से आवासों पर मनमाना खर्च नहीं कराया जा सकेगा. इंजीनियरों पर काम कराने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकेगा. नये नियम की वजह से सब पर अंकुश लगेगा.

इनके आवासों के मामले में नया नियम लागू नहीं होगा : नया नियम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के अावासों के मामले में लागू नहीं होगा. मुख्यमंत्री की अनुमति लेकर इनके आवासों पर खर्च कराया जा सकेगा.

  • खर्च पर अंकुश लगाने के लिए उठाया कदम

  • नये नियम का प्रस्ताव जल्द जायेगा कैबिनेट

  • सारे सरकारी आवासों की मरम्मत के

  • लिए तय हो जायेगी राशि व समय सीमा

सीएम ने खर्च का हिसाब मांगा : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पांच साल के दौरान वीआइपी लोगों के आवासों पर हुए खर्च का हिसाब मांगा है. उन्होंने भवन निर्माण विभाग से पूरा खर्च का ब्योरा देने को कहा है. सरकार को यह सूचना मिली थी कि कुछ महत्वपूर्ण लोगों के आवासों की मरम्मत और साज-सजावट के नाम पर आवश्यकता से अधिक खर्च किये गये हैं. कई अफसरों के आवासों पर सरकार की बड़ी राशि खर्च हुई है. रिपोर्ट आने पर सरकार आगे की कार्रवाई करेगी.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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