लोहरदगा : नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में आदिवासी संगठनों की आक्रोश रैली, पीड़िता रिम्स रेफर

Updated at : 30 Apr 2023 5:24 PM (IST)
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लोहरदगा : नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में आदिवासी संगठनों की आक्रोश रैली, पीड़िता रिम्स रेफर

लोहरदगा के कुड़ू क्षेत्र में नाबालिग को अगवा कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में रविवार को आदिवासी संगठनों ने आक्रोश रैली निकाली. इस दौरान आरोपियों को फांसी देने और पीड़िता को बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की गयी. इधर, पीड़िता की हालत नाजुक होने पर उसे रिम्स रेफर किया गया.

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कुड़ू (लोहरदगा), अमित कुमार राज : लोहरदगा के कुड़ू थाना क्षेत्र के एक गांव में आदिवासी नाबालिग लड़की के साथ दो युवकों द्वारा अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म और पीड़िता की हालत नाजुक होने से नाराज आदिवासी संगठनों ने आक्रोश रैली निकाली. राजी पड़हा बेल बेंजामिन लकड़ा तथा अप बेल बंसत उरांव के नेतृत्व में लोगों ने इस घटना की तीव्र निंदा करते हुए आरोपियों को फांसी की मांग की.

क्या है मामला

तीन दिन पहले कुड़ू थाना क्षेत्र के एक गांव की लगभग 13 साल की नाबालिग आदिवासी लड़की शादी समारोह में शामिल होने आयी है. इस गांव के दो युवक नसीम खान और मकसूद पवरियां ने नाबालिग का अगवा कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. इस हादसे में लड़की की हालत नाजुक हो गई थी तथा इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया गया.

राजी पड़हा भवन से शुरू हुई रैली

इस घटना से नाराज आदिवासी संगठनों ने विरोध रैली निकाली. रविवार को राजी पड़हा भवन से शुरू हुई रैली इंदिरा गांधी चौक होते हुए ब्लाक मोड़, बाईपास रोड होते हुए बस स्टैंड, थाना चौक के बाद राजी पड़हा भवन पहुंच खत्म हुआ.

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आदिवासी समाज के लोगों पर लगातार बढ़ रहा अत्याचार

इस मौके पर आदिवासी नेता बंसत उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज पर विशेष समुदाय द्वारा लगातार अत्याचार किया जा रहा है. नाबालिग से लेकर महिलाएं सुरक्षित नहीं है. राज्य सरकार आदिवासियों पर अत्याचार रोकने में नाकाम है. आदिवासियों पर अत्याचार नहीं रूका, महिलाएं तथा बेटियों को सुरक्षा नहीं मिली, तो राज्य सरकार के खिलाफ आदिवासी समाज सड़क से लेकर सदन तक आक्रोश मार्च निकालेगा तथा राज्य सरकार के सभी मंत्रियों से लेकर विधायकों का घेराव करेगा.

फांसी की सजा दिलाने की मांग

आक्रोश रैली में शामिल आदिवासी संगठनों ने पीड़ित का सरकारी खर्चे पर बेहतर इलाज कराने और आरोपियों को फास्ट ट्रैक में सुनवाई करते हुए फांसी की सजा दिलाने की मांग की गयी. इस रैली में आदिवासी छात्र संघ के अवधेश उरांव के अलावा बेंजामिन लकड़ा, जतरू उरांव, सुखदेव उरांव, मंगरा उरांव, वसंत उरांव, गोरेंद्र उरांव, एतवा उरांव, गोवर्धन उरांव, संतोष उरांव, इंद्रनाथ उरांव, सुकरा उरांव, श्याम सुन्दर उरांव,महेंद्र उरांव, राजू उरांव, मंगरा उरांव, सोमा उरांव, बबलू उरांव, दशरथ उरांव, ठूपा उरांव, संजय भगत, बिहारी उरांव, शंकर उरांव, नारायण उरांव, प्रदीप भगत, दिनेश उरांव, प्रमोद उरांव, गोविंद उरांव, दुबराज उरांव, चरवा उरांव, संगीता उरांव , सावित्री उरांव,सुनीता उरांव, बसंती उरांव, सुको उरांव, कलावती उरांव, नेहा उरांव, जयंती उरांव तथा अन्य आदिवासी संगठनों के लोग शामिल थे .

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