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शर्मनाक व आपराधिक कृत्य

Updated at : 06 Jul 2023 8:02 AM (IST)
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शर्मनाक व आपराधिक कृत्य

Engineering student physical assaulted

प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह दोषी को सजा दिलाये और पीड़ित को इंसाफ और सुरक्षा. समाज का हर व्यक्ति समान है और सबके बुनियादी हक समान हैं.

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मध्य प्रदेश के सीधी जिले की एक घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है. एक आदिवासी युवक पर पेशाब करते एक व्यक्ति का वीडियो वायरल होने के बाद जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई और अभियुक्त को आधी रात को गिरफ्तार कर लिया गया. सीधी जिले के कुबरी गांव की यह घटना पुरानी बतायी जा रही है. पुलिस ने घटना के छह दिन बाद यह वीडियो बरामद किया जो चार जुलाई की शाम को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. देखते-देखते इसकी चर्चा होने लगी. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसका संज्ञान लिया और कार्रवाई के आदेश दिये. पुलिस ने रात करीब दो बजे अभियुक्त प्रवेश शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी को ऐसी सजा दी जायेगी, जो हर किसी के लिए एक सबक साबित होगी.

अभियुक्त के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर अत्याचार रोकने के लिए 1989 के बने अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. मामले को राजनीतिक रंग देने की भी कोशिशें हुई हैं. प्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने अभियुक्त की एक तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि वह बीजेपी से संबद्ध है. मगर बीजेपी ने इसका खंडन किया है. मुख्यमंत्री चौहान ने इस बारे में स्पष्ट कहा कि अपराधियों की कोई जाति, धर्म या पार्टी नहीं होती, एक अपराधी बस अपराधी होता है. मुख्यमंत्री का ऐसा बयान देना और पुलिस का इस मामले में तत्पर कार्रवाई कर अभियुक्त को गिरफ्तार कर लेना एक सही कदम है. ऐसे आपराधिक मामलों को मानवता के अलावा किसी भी और नजर से नहीं देखा जाना चाहिए.

आधुनिक और सभ्य समाज में ऐसी घटनाओं की कोई जगह नहीं है और हर तबके को इसका कड़े शब्दों में विरोध करना चाहिए. इस घटना में बस दो पक्ष हैं. एक, जो विवश और लाचार है, और दूसरा जिसे अपनी ताकत का गुमान है. किसी भी समझदार शख्स के लिए यह निर्णय करना कठिन नहीं है कि सही कौन है और गलत कौन. सत्ता और शासन की यह जिम्मेदारी है कि वह दोषी को सजा दिलाये और पीड़ित को इंसाफ और सुरक्षा. समाज का हर व्यक्ति समान है और सबके बुनियादी हक समान हैं. संविधान निर्माताओं ने इसे महसूस कर इसे एक कानूनी शक्ल दी थी. कार्यपालिका और न्यायपालिका उसकी रक्षा करती है. मगर, कमजोर के साथ अन्याय को रोकना और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार की रक्षा पूरे समाज का दायित्व है. समाज के सम्मिलित प्रयासों से ही मध्य प्रदेश जैसी घटनाओं की पुनरावृति पर पूर्ण विराम लगाया जा सकता है.

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