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Prabhat Khabar Impact: कोनार नहर में पानी आते ही किसानों में दिखी खुशी, अब खेतों में होगी सिंचाई

Updated at : 15 Dec 2022 5:18 PM (IST)
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Prabhat Khabar Impact: कोनार नहर में पानी आते ही किसानों में दिखी खुशी, अब खेतों में होगी सिंचाई

प्रभात खबर में समाचार प्रकाशित होने का असर हुआ है. गिरिडीह के कोनार नहर में एक बार फिर पानी आने से क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर खुशी देखी गयी. इसके पहले रघुवर सरकार में भी इस नहर में पानी छोड़ा गया था, लेकिन तकनीकी परेशानी के कारण तत्काल इसे बंद कर दिया गया था.

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Prabhat Khabar Impact: एक लंबे समय से गिरिडीह के कोनार नहर (Konar Canal) में पानी छोड़ा गया. इससे रबी फसल लगाने वाले किसानों में खुशी है. मालूम हो कि प्रभात खबर ने ‘591.62 करोड़ खर्च करने के बाद भी खेतों में नहीं पहुंचा पानी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद अधिकारियों की नींद खुली और नहर में पानी खोला गया. पानी डुमरी विधानसभा क्षेत्र तक पहुंच गया है.

1977 में कोनार नहर सिंचाई परियोजना की हुई शुरुआत

बता दें कि बगोदर क्षेत्र के लोगों की मांग पर वर्ष 1977 में तत्कालीन बिहार सरकार ने कोनार नहर सिंचाई परियोजना (Konar Canal Irrigation Project) शुरू की थी. वर्ष 1990 में बिहार सरकार ने काम बंद कर दिया. झारखंड बनने के बाद काम शुरू हुआ. नहर का काम अभी तक 84 प्रतिशत ही पूरा हुआ है. पानी नहीं छोड़े जाने से बच्चे इसमें खेलते थे. कुछ वर्ष पूर्व रघुवर दास की सरकार के दौरान नहर में पानी छोड़ गया था, लेकिन चूहा ने पूरा मामला गड़बड़ा दिया. पानी छोड़ते ही नहर से पानी लिक करने लगा. इसके बाद पानी रोक दिया गया. यह पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया.  किसानों में एक बार फिर मायूसी छा गयी. इधर, दोबारा पानी छोड़ते ही किसान खुश हो गये. उन्हें अब यह लगने लगा है कि जल्द ही उनके खेतों तक पानी पहुंचेगा. इससे वह सालों भर खेती कर सकेंगे.

11 करोड़ की लागत से काम हुआ था शुरू

वर्ष 1977 में तत्कालीन बिहार सरकार ने तीन विधानसभा बगोदर ,मांडू व डुमरी के सैकड़ों राजस्व गांवों के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए कोनार नहर सिंचाई परियोजना की शुरुआत की थी. शुरुआत में इसकी लागत 11 करोड़ रुपये थी. पूरे तामझाम के साथ काम शुरू हुआ. लेकिन, 1990 में जब लालू प्रसाद यादव की सरकार बिहार में बनी, तो इस योजना पर रोक लगा दी गयी. 1977 में बिहार के जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह ने इस योजना का शुरुआत की, तो काफी संख्या में मजदूर-किसान नहर की खुदाई में लग गये. उन्हें यह आशा थी कि सिंचाई की सुविधा मिलने से वह बेहतर ढंग से खेती कर सकेंगे और परिवार का भरण-पोषण ठीक से होगा

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45 वर्ष में 84 प्रतिशत काम हुआ है पूरा

आज स्थिति यह है कि नहर की खुदाई का 84 प्रतिशत काम पूरा हुआ है. इसकी कई शाखाएं आज भी अधूरी हैं. झारखंड गठन के बाद सरकार ने इस महत्वपूर्ण योजना को प्राथमिकता के साथ शुरू करायी. इस पर अभी तक 591.62 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. इस संबंध में विभाग के अधिकारी बताते हैं कि 62955.60 हेक्टर भूमि पर कोनार नहर सिंचाई परियोजना से पटवन होगी. विश्वास के साथ क्षेत्र के किसान उत्साहित थे जब तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नहर में पानी छोडा. दो-चार महीने के अंदर ही बगोदर थाना क्षेत्र के डोरियो गांव के समीप नहर का मेढ़ टूट गया. इससे बगोदर ही नहीं पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चा होने लगी. विभाग ने टूटे हुए मेढ़ की मरम्मत करवायी. क्षेत्र में लोग धान, गेहूं, आलू समेत अन्य खरीफ एवं रबी की फसल मानसून और अपने बलबूते कर रहे हैं. नहर पूरी तरह सूखा गया था.

रिपोर्ट : रामानंद सिंह, बगोदर, गिरिडीह.

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Samir Ranjan

लेखक के बारे में

By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

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