एनई होरो की पुण्यतिथि: जयपाल सिंह मुंडा के बाद संभाली थी झारखंड आंदोलन की कमान

एनई होरो ने राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई. 1967 में वे कोलेबिरा विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने. 1968 में तत्कालीन बिहार सरकार में योजना एवं जनसंपर्क मंत्री एवं 1969 में शिक्षा मंत्री बने.
तोरपा (खूंटी) सतीश शर्मा: मृदुभाषी, शालीन, सिद्धांतवादी व आंदोलनकारी ये कुछ शब्द हैं जो एनई होरो पर फिट बैठते हैं. एनई होरो यानी निरल एनेम होरो झारखंड आंदोलन के अगुवा नेताओं में से एक थे. सोमवार 11 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि है. उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा के बाद झारखंड आंदोलन की कमान संभाली तथा इसे अंजाम तक पहुंचाया. आंदोलन के दौरान इन्होंने नारा दिया था-कैसे लोगे झारखंड, लड़ के लेंगे झारखंड. एनई होरो की अगुवाई में यह नारा गांव, शहर, क़स्बा सभी जगह गुंजा और झारखंड आंदोलन को मजबूती प्रदान किया. झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन करने वाले गांधीवादी नेताओं में एनई होरो का नाम शुमार है. एनई होरो का जन्म खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड के गोविंदपुर में 31 मार्च 1925 को हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा बुरजू (मुरहू ) से हुई. इसके बाद संत कोलंबस कॉलेज हजारीबाग से स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद छोटानागपुर लॉ कॉलेज से क़ानून की पढ़ाई की. उन्होंने गोस्नर हाईस्कूल (रांची) में बतौर शिक्षक काम करना शुरू किया था.
मंत्री, सांसद व विधायक रहे
एनई होरो ने राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई. 1967 में वे कोलेबिरा विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने. 1968 में तत्कालीन बिहार सरकार में योजना एवं जनसंपर्क मंत्री एवं 1969 में शिक्षा मंत्री बने. इस दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई काम किये. स्व. होरो दो बार खूंटी लोकसभा से सांसद रहे. इसके अलावा वे 1977 से 2000 तक लगातार तोरपा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे.
झापा का कांग्रेस में विलय का किया विरोध
एनई होरो ने अपने राजनितिक जीवन में कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. 1962 में झारखंड पार्टी के अध्यक्ष जयपाल सिंह मुंडा थे. उन्होंने झारखंड पार्टी के कांग्रेस में विलय की घोषणा की तब एनई होरो ने जयपाल सिंह मुंडा के इस फैसले का विरोध किया. वे स्वयं आगे आये पार्टी की कमान संभाली तथा झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को आगे बढ़ाया.
एनोस एक्का का भी किया था विरोध
2005 में उनकी ही पार्टी झारखंड पार्टी के विधायक एनोस एक्का ने राज्य की एनडीए सरकार को समर्थन देने की घोषणा की थी. उस वक्त भी एनई होरो ने अपने विधायक का विरोध किया था तथा सरकार से समर्थन वापस लेने को कहा था.
कोयल कारो परियोजना के विरुद्ध लड़ी लंबी लड़ाई
एनई होरो कोयल कारो जैसी बड़ी परियोजना के विरोधी थे. उनका कहना था कि ऐसी परियोजना से लोगों का भला नहीं होगा. जीवनपर्यंत उन्होंने इस परियोजना का विरोध किया.
चाहते थे वृहत झारखंड
एनई होरो वृहत झारखंड के हिमायती थे. वे चाहते थे कि बिहार, बंगाल, और ओडिसा के आदिवासी इलाकों को मिलाकर वृहत झारखंड बने. उसके लिए उन्होंने 12 मार्च 1973 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को एक मेमोरेंडम भी सौंपा था.
पत्र पत्रिकाओं का करते थे संपादन
एनई होरो को पत्र पत्रिकाओं से विशेष लगाव था. वे कई पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी करते थे. उन्होंने हिंदी साप्ताहिक झारखंड टाइम्स, मुंडारी पत्रिका जगर साड़ा तथा मरसल का संपादन भी किया था.
गोविंदपुर में आज दी जायेगी श्रद्धांजलि
एनई होरो के पुत्र तथा अबुआ झारखंड पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष रिलन होरो होरो साहब की राजनितिक विरासत को आगे बढ़ाने में लगे हैं. उन्होंने बताया कि सोमवार को गोविंदपुर में होरो साहब को श्रद्धांजलि दी जायेगी. इस दौरान उनके परिजन व पार्टी के कार्यकर्त्ता उपस्थित रहेंगे.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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