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पश्चिम बंगाल : राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को किया तलब

Updated at : 03 Feb 2024 5:24 PM (IST)
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पश्चिम बंगाल : राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को किया तलब

राज्य सूची में शामिल कुल 179 पिछड़े वर्ग की जातियों में से 118 जातियां मुस्लिम हैं . वर्ष 2011 से पहले पिछड़े वर्ग की राज्य सूची मे शामिल कुल पिछड़ी जातियों की संख्या 108 थीं, जिसमें से 53 जातियां मुस्लिम थीं. वर्ष 2011 के बाद 71 पिछड़ी जातियों को पिछडे वर्ग की राज्य सूची शामिल किया गया.

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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य सरकार (State Government) के 87 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक संबंधी ताजा आंकड़े मांगे गये, जिसकी जानकारी आयोग को आज तक नहीं दी गयी. अब आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है. इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने सुनवाई करने का निर्णय लिया है और पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव को आठ फरवरी को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए सम्मन जारी किया है. राज्य में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को दो भागों (कैटेगरी-ए और कैटेगरी-बी) में विभाजित किया गया है. कैटेगरी-ए में अति पिछड़ी जातियां शामिल हैं, जिसमें कुल 81 जातियां हैं. इनमें से 73 मुस्लिम जातियां हैं. कैटेगरी-बी में कुल 98 पिछड़ी जातियां हैं, जिसमें से 45 मुस्लिम हैं.

ओबीसी के आरक्षण को 22 प्रतिशत करने में कोई कानूनी बाधा नहीं

अति पिछड़ी (कैटेगरी-ए) और पिछड़ी (कैटेगरी-बी) को मिलाकर कुल 179 जातियां हैं, जिसमें से 118 जातियां मुस्लिम हैं. इससे पहले, पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की अति पिछड़ी (कैटेगरी-ए) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया और पिछड़ी (कैटेगरी-बी) के लिए सात प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया. पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग का कुल आरक्षण का प्रतिशत 45 प्रतिशत है, जिसमें से अनुसूचित जाति को 22 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को छह और ओबीसी को 17 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. मंडल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने 21 मार्च 2023 को अनुशंसा की थी कि ओबीसी के आरक्षण को 17 प्रतिशत बढ़ाकर 22 प्रतिशत करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है.

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राज्य सूची मे शामिल कुल पिछड़ी जातियों की संख्या 108 थीं

ऐसे में ओबीसी के आरक्षण को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत किया जाये . गत वर्ष 14 अप्रैल को पिछड़ा वर्ग कल्याण, पश्चिम बंगाल सरकार ने आयोग को अपने लिखित उत्तर में बताया है कि राज्य सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है. राज्य सरकार ने 87 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए शपथपत्र दिया था. 87 जातियों में से लगभग 73 जातियां मुस्लिम हैं. पश्चिम बंगाल की राज्य सूची में शामिल कुल 179 पिछड़े वर्ग की जातियों में से 118 जातियां मुस्लिम हैं . वर्ष 2011 से पहले पिछड़े वर्ग की राज्य सूची मे शामिल कुल पिछड़ी जातियों की संख्या 108 थीं, जिसमें से 53 जातियां मुस्लिम थीं. वर्ष 2011 के बाद 71 पिछड़ी जातियों को पिछडे वर्ग की राज्य सूची शामिल किया गया, जिसमें से 65 मुस्लिम हैं.

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ओबीसी की राज्य सूची में शामिल उन जातियों की सूची अभी उपलब्ध नहीं

वर्ष 2023 को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अवगत कराया है कि आज की स्थिति के अनुसार अति पिछड़ी (कैटेगरी-ए) के लिए 30,49,220 ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं. और पिछड़ी जाति (कैटेगरी-बी) के लिए 31,21,038 ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं. सिविल सेवा के पदों पर नियुक्त किये गये और उच्च शिक्षा में प्रवेश प्राप्त ओबीसी उम्मीदवारों की जातिवार सूची उपलब्ध नहीं है. पश्चिम बंगाल के ओबीसी की राज्य सूची में शामिल उन जातियों की सूची अभी उपलब्ध नहीं है, जोकि पहले हिंदू थीं व बाद में मुस्लिम बनी हैं. जबकि पश्चिम बंगाल राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की कई सलाहों में धर्मांतरण का उल्लेख है.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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