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आगरा में 22 साल की कानूनी लड़ाई के बाद शख्स ने जीता गोल्ड, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के खिलाफ सुनाया फैसला

Updated at : 22 Apr 2023 3:11 PM (IST)
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आगरा में 22 साल की कानूनी लड़ाई के बाद शख्स ने जीता गोल्ड, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के खिलाफ सुनाया फैसला

आगरा में एक शख्स ने 22 साल की अदालती लड़ाई के बाद गोल्ड जीता है. राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बड़ी पेय कंपनी को मथुरा के 52 वर्षीय श्याम लवानिया को 50 ग्राम 22 कैरेट सोना देने का आदेश दिया है.

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Agra : उत्तर प्रदेश के आगरा में एक शख्स ने 22 साल की अदालती लड़ाई के बाद गोल्ड जीता है. राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बड़ी पेय कंपनी को मथुरा के 52 वर्षीय श्याम लवानिया को 50 ग्राम 22 कैरेट सोना देने का आदेश दिया है. जैसा कि उसने 2001 में खरीदे गए कोल्ड ड्रिंक की बोतल के ढक्कन के नीचे देने का वादा किया था. दरअसल, लवानिया एक छोटा सा भोजनालय चलाते हैं. वे 28 अप्रैल को अपने बेटे के जन्मदिन की पार्टी के लिए कोल्ड ड्रिंक की बोतलें खरीदी थीं. जिसमें एक बोतल पर इनाम की घोषणा की गई थी.

लवानिया ने खुदरा विक्रेता, थोक व्यापारी और कंपनी से अपने जीते हुए इनाम की मांग का दावा किया, मगर सभी प्रयास असफल हुए. इसके बाद वह मामले को जिला उपभोक्ता फोरम में ले गए. जहां फोरम ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और कंपनी को उन्हें पुरस्कार के रूप में सोना देने का आदेश दिया. कोल्ड ड्रिंक कंपनी ने जिला स्तरीय उपभोक्ता निकाय के फैसले को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी.

आयोग ने लगाया कंपनी पर 5 हजार का जुर्माना

लेकिन राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 11 अप्रैल 2023 को कंपनी को 30 दिनों के भीतर सोना देने का आदेश दिया है. इसी के साथ आयोग ने कंपनी पर आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान के लिए 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. आयोग ने आदेश सुनाते हुए कहा कि यह बहुत जरूरी है क्योंकि कंपनियां उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए ऐसी योजनाओं का उपयोग करती हैं. लेकिन बाद में लाभ देने में आनाकानी करतीं हैं. जबकि यह गलत है और उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है.

वहीं लावनिया ने बताया कि इस मुकदमे को जीतने के लिए सबूतों के रूप में खरीदे गए कोल्ड ड्रिंक्स के 1,980 रुपये का बिल शामिल था, जिसे उन्होंने पास के एक दुकान से खरीदा था. इसके साथ ही थोक व्यापारी से 30 अप्रैल, 2001 को मिलने के लिए आगरा गए थे, उस दौरान का टिकट रखी थी. कंपनी ने आयोग के समक्ष तर्क दिया था कि यह प्रस्ताव 30 अप्रैल, 2001 तक ही वैध था और लवानिया समय अवधि के भीतर पुरस्कार के रूप में सोना प्राप्त करने में असफल रहे हैं.

यह लंबा और थका देने वाली कानूनी लड़ाई थी- लवानिया

लवानिया ने बताया कि वो केवल 8वीं तक पढ़ाई किए हैं, उन्होंने आगे कहा कि कानून में मेरी गहरी दिलचस्पी है और मैं एक उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों के बारे में जानता था. इसलिए मैंने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. यह लंबा और थका देने वाली कानूनी लड़ाई थी. पुख्ता सबूत के बावजूद, मुझे कंपनी द्वारा किए गए गलत काम को साबित करने के लिए 100 से अधिक सुनवाई में शामिल होना पड़ा है.

मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे इस मुकदमें में आगे की लड़ाई लड़ने से रोकने की कई बार कोशिश की, इसे समय और पैसे की बर्बादी बताया लेकिन मैं चलता रहा. उनके बेटे आकाश ने बताया कि जिला अदालत के फैसले के बाद, कंपनी के अधिकारियों ने मामले को अदालत से बाहर निपटाने के लिए मेरे पिता से कई बार संपर्क किया, लेकिन मेरे पिता ने इनकार कर दिया था.

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Sandeep kumar

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By Sandeep kumar

Sandeep kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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