Kanpur News: हैलट अस्पताल में जीवन रक्षक दवाएं हुईं खत्म, मात्र चार दिन का बचा आईवी फ्लूड का स्टाक
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 30 Sep 2023 2:16 PM
कानपुर के हैलट अस्पताल में एक बार फिर से दवाओं का संकट घर गया है. हर मरीज के लिए जरूरी नार्मल स्लाइन समेत आईवी फ्लूड का स्टाक मात्र चार दिन का शेष बचा है.
कानपुर. GSVM मेडिकल कॉलेज से सम्बंधित हैलट अस्पताल में एक बार फिर से दवाओं का संकट घर गया है. हर मरीज के लिए जरूरी नार्मल स्लाइन समेत आईवी फ्लूड का स्टाक मात्र चार दिन का शेष बचा है. जबकि भर्ती हर मरीजों को लगने वाला एंटीबायोटिक मेट्रोनिडाजोल, ऑगमेंटिन और हेपेटाइटिस बी की दवाएं खत्म हो चुकी हैं. और तो और हैलट में जीवनरक्षक दवाएं एड्रीनलीन और कैल्शियम ग्लूकोनेट तक खत्म हो गई हैं.
इस हफ्ते आईवी फ्लूड का जल्द इंतजाम नहीं हुआ तो मरीजों का इलाज करना ही डॉक्टरों के लिए मुश्किल हो जाएगा. हालांकि, शासन ने दवा खरीद की नीति में हाल ही में बदलाव कर दिया है. लेकिन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के लिए उल्टा पड़ गया है. इसलिए शासन से नीति में स्पष्टता के दिशा-निर्देश मांगे गए हैं ताकि दवाओं की खरीद की जा सके.
बता दें कि हैलट अस्पताल में हर दिन दो सौ मरीज इमरजेंसी में भर्ती होते हैं. चौदह सौ मरीज पहले से भर्ती रहते हैं, जिनमें हर मरीज को कई-कई आईवी फ्लूड और गंभीर मरीजों को एंटीबायोटिक व जीवनरक्षक दवाएं और इंजेक्शन लगाए जाते हैं. रोज की दो हजार बोतल आईवी फ्लूड की खपत है. यूपी मेडिकल कारपोरेशन ने इसका स्टाक दिया नहीं और उलझी दवा खरीद नीति ने हैलट प्रशासन के हाथ बांध दिए हैं, ऐसे में वह खुद से खरीद नहीं कर सकते हैं.
इसी तरह मेट्रोनिडाजोल का स्टाक भी खत्म हो गया है. कारपोरेशन ने इसे भी सप्लाई में नहीं दिया. हैलट प्रशासन ने प्राचार्य के निर्देश पर 6 हजार वायल खरीदे थे पर वार्ड-3 में दो मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर उनका प्रयोग भी रोक दिया गया है. रही बात हेपेटाइटिस बी की तो इसे असाध्य रोग माना जाता है. इसलिए हैलट हर रोगी को इसकी एक महीने की दवा देता है पर उसकी दवा भी खत्म हो गई है. हेपेटाइटिस बी की दवा न कारपोरेशन ने दी और न ही हैलट खरीद सका.
Also Read: यूपी में एक दर्जन आईएएस अधिकारियों के हुए तबादले, कई जिलों के डीएम और सीडीओ बदले, देखें लिस्ट
पूरे मामले में हैलट अस्पताल के अधीक्षक प्रो. आरके सिंह का कहना है कि कारपोरेशन मांग के अनुरूप दवाएं सप्लाई नहीं कर पा रहा है. दस से ज्यादा दवाएं स्टाक में खत्म हो गई हैं और खरीद नीति में बदलाव के बाद भी दवाएं खरीद नहीं पा रहे हैं, ऐसे में प्राचार्य की ओर से शासन से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं. आईवी फ्लूड का संकट हो गया है.
शासन ने जीएसवीएम समेत सभी मेडिकल कॉलेजों में दवा खरीद की नीति में बदलाव कर अब उसमें साफ किया है कि दवा के वार्षिक बजट से मेडिकल कॉलेज 80 फीसद दवाएं खरीद सकेंगे. पहले यही नीति 20 और 80 फीसद रही लेकिन उन्हीं की खरीद होगी जो कारपोरेशन की 295 की सूची में न हो. हालत यह है कि कॉलेजों को कारपोरेशन समय पर दवाएं दे नहीं पा रहा है. इसलिए यह नीति बदली गई पर उसमें बड़ा पेच यह फंसा है कि मेडिकल कॉलेजों को केजीएमयू की रेट कांट्रैक्ट पर 80 फीसद दवाएं खरीदना हैं पर जीएसवीएम के रेट कांट्रैक्ट का क्या होगा?
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










