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पश्चिम बंगाल : अब कैदियों को मुक्त संशोधनागार में रखने की बनायी जा रही है योजना

Updated at : 02 Jan 2024 1:19 PM (IST)
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Sitamarhi News :

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मुक्त संशोधनागार में रहने वाले कैदी पूरे दिन आम आदमी की तरह जीवन- यापन करते हैं और फिर शाम को वे अपने बिल्डिंग में लौट आते हैं. उनके साथ परिजनों को भी रहने की इजाजत होती है.

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पश्चिम बंगाल के संशोधनागारों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं, जिसकी वजह से वहां कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में 60 संशोधनागार हैं, जहां करीब 21 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है. लेकिन यहां के संशोधनागारों में वर्तमान समय में 28 हजार से अधिक कैदी बंद हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की सात केंद्रीय संशोधनागारों में से चार में क्षमता से काफी अधिक कैदियों को रखा गया है. परिणामस्वरूप, वहां अब कैदियों की संख्या नहीं बढ़ायी जा सकती. जो कैदी वहां रह रहे हैं, उनको भी रहने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए संबंधित विभाग अब मुक्त संशोधनागारों में कैदियों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं. विभाग का मानना है कि इससे केंद्रीय संशोधनागारों में कैदियों की संख्या कुछ हद तक कम की जा सकेगी.

क्या है मुक्त संशोधनागार

संशोधनागार विभाग के सूत्रों के अनुसार, मुक्त संशोधनागार चारों ओर से दीवार से घिरा हुआ, एक निर्दिष्ठ स्थल है, जहां कैदी खुलेआम घूम सकते हैं. आप वहां समय बिता सकते हैं और विभिन्न चीजें कर सकते हैं. इस प्रकार के संशोधनागारों में कैदियों को रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक एक बिल्डिंग में रखा जाता है और फिर सुबह छह बजे से उन्हें बिल्डिंग से निकाल कर खुले आसमान के नीचे बाहर कर दिया जाता है. इससे कैदी वहां किसी भी पेशे से जुड़ सकते हैं. मुक्त संशोधनागार में रहने वाले कैदी पूरे दिन आम आदमी की तरह जीवन- यापन करते हैं और फिर शाम को वे अपने बिल्डिंग में लौट आते हैं. उनके साथ परिजनों को भी रहने की इजाजत होती है.

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किन कैदियों को मिलती है यहां रहने की अनुमति

जिन कैदियों की सजा की सीमा लगभग पूरी हो चुकी है और वह कुछ महीने में रिहा होने वाले हैं, उनको ही मुक्त संशोधनागार में रहने की अनुमति दी जाती है. इन कैदियों की पहचान पुलिस से बातचीत कर की जाती है और फिर इसका निर्णय एक बोर्ड करता है. अब 200 कैदियों को रायगंज, लालगोला, मेदिनीपुर और दुर्गापुर में स्थित मुक्त संशोधनागारों में भेजा जा रहा है. बोर्ड की सिफारिश के आधार पर, संशोधनागार विभाग ने इन 200 कैदियों को खुली सुधार सुविधाओं में भेजने का फैसला किया है.

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राज्य के संशोधनागारों में बंद हैं क्षमता से अधिक कैदी

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, दमदम सेंट्रल करेक्शनल होम में 3607 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन एक मई 2022 के अनुसार, वहां 3,691 कैदी बंद थे. वहीं, मेदिनीपुर सेंट्रल करेक्शनल होम में 1284 कैदियों को रखने की व्यवस्था है, जबकि यहां 1594 कैदी हैं. जलपाईगुड़ी सेंट्रल करेक्शनल होम में 867 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन यहां लगभग दोगुना 1525 कैदी बंद थे. इसके अलावा बर्दवान केंद्रीय सुधार गृह में भी क्षमता से अधिक कैदी हैं. बताया गया है कि राज्य में दुर्गापुर, लालगोला, रायगंज और मेदिनीपुर में मुक्त संशोधनागार हैं.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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