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कानपुर: केडीए को लगा हाईकोर्ट से झटका, जमीन आवंटित नहीं करने पर 5 लाख का जुर्माना

Updated at : 30 May 2023 10:16 PM (IST)
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कानपुर: केडीए को लगा हाईकोर्ट से झटका, जमीन आवंटित नहीं करने पर 5 लाख का जुर्माना

कानपुर में जवाहर विद्या समिति को भूखंड पर भौतिक कब्जा न देना और लगातार केस को उलझाए रखना केडीए को महंगा पड़ा है. हाईकोर्ट ने केडीए द्वारा उपभोक्ता फोरम द्वारा दिए गए आदेश पर स्टे के लिए की गई अपील को न सिर्फ खारिज किया बल्कि पांच लाख का जुर्माना भी लगाया है.

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Kanpur : किदवई नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत जूही में जवाहर विद्या समिति को भूखंड पर भौतिक कब्जा न देना और लगातार केस को उलझाए रखना केडीए को महंगा पड़ा है. हाईकोर्ट ने केडीए द्वारा उपभोक्ता फोरम द्वारा दिए गए आदेश पर स्टे के लिए की गई अपील को न सिर्फ खारिज किया बल्कि पांच लाख का जुर्माना भी लगाया है.

इस जुर्माने को केडीए द्वारा 7 दिनों के अंदर जवाहर विद्या समिति को बैंक ड्रॉफ्ट के माध्यम से भुगतान करना है. हाईकोर्ट ने यह भी कहा यह कि उपभोक्ता फॉर्म द्वारा दिए जा रहे प्लाट कब्जे के आदेश की केडीए अवहेलना कर रहा था. यह धृष्ठता है.

अब तक का केडीए पर सबसे बड़ा जुर्माना

उपभोक्ता फोरम के आदेश की अवहेलना करने के आरोप में कोर्ट द्वारा केडीए वीसी के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया था. 27 मई को केडीए वीसी को स्वरूप नगर पुलिस को गिरफ्तार कर उपभोक्ता फोरम में पेश करना था. केडीए द्वारा गिरफ्तारी के वारंट पर स्टे की अपील दाखिल की गई थी. जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया.

इसके साथ ही केडीए पर अवहेलना करने के आरोप में 5 लाख का जुर्माना भी लगाया. हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति अनीश गुप्ता की दो सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया. आदेश में बेंच ने केडीए से कहा कहा कि 20 साल तक जिस समिति ने कानूनी लड़ाई लड़कर जीत हासिल की हो उसे आप अभी भी टहला रहे हैं. हाईकोर्ट ने उपभोक्ता फोरम द्वारा दिए गए आदेश को बरकरार रखा. मालूम हो कि कानपुर विकास पर अब तक यह सबसे बड़ा जुर्माना लगा है.

यहां जाने पूरा मामला

केडीए ने 19 जनवरी 1984 को जवाहर विद्या समिति को जूही कला डब्ल्यू ब्लॉक में 5138 वर्ग गज प्लॉट लीज पर देने के लिए आवंटित किया था. लीज 99 साल की रखी गई. एक चौथाई रकम नियम के मुताबिक केडीए ने उसी समय जमा करा ली थी मगर कब्जा नहीं दिया. इसके खिलाफ समिति ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया. 19 दिसंबर 2003 को फोरम ने आदेश दिया कि रजिस्ट्री करके 2 माह के भीतर कब्जा दे दिया जाए.

केडीए ने राज्य उपभोक्ता फोरम में अपील की. वहां से भी अपील खारिज हुई और उल्टे 5000 का जुर्माना केडीए पर लगा. केडीए ने राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में अपील की. वहां से भी अपील खारिज हुई. फिर केडीए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 15 दिसंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने भी केस खारिज कर दिया.

इसके बाद तत्कालीन केडीए उपाध्यक्ष आरके सिंह ने 23 जनवरी 2021 को रीट रजिस्टर्ड कर दी. कब्जा लेटर तो दिया मगर भौतिक कब्जा नहीं दिया. समिति ने फिर जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली. वहां से कई नोटिस और सम्मन हुए मगर केडीए ने गंभीरता से नहीं लिया.

आखिरकार 27 अप्रैल 2023 को फोरम ने वीसी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए इंस्पेक्टर स्वरूप नगर को आदेश दिया कि केडीए वीसी को पेश करें. इसी आदेश के खिलाफ केडीए हाईकोर्ट भी गया था. जहां से केडीए पर पांच लाख जुर्माना लगाया गया. जिसे केडीए को 7 दिनों में समिति के खाते में भेजना है.

रिपोर्ट: आयुष तिवारी

https://www.youtube.com/watch?v=bGCLTu_rkLc

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