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मुंबई में नहीं चलेगी काली-पीली रंग वाली टैक्सी, 60 साल से करा रही थी लोगों को सफर

Updated at : 30 Oct 2023 11:56 AM (IST)
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Petrol Diesel Taxi Ban

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महाराष्ट्र सरकार ने साल 2008 में कैब के लिए प्रयोग में लाई जा रही गाड़ियों की उम्र सीमा 25 साल निर्धारित की थी, जिसे 2013 में घटाकर 20 साल कर दिया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में इन काली-पीली टैक्सियों का रजिस्ट्रेशन 1990 में किया गया था.

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मुंबई : भारत की औद्योगिक राजधानी मुंबई में काली-पीली टैक्सी से सफर करने वाले लोगों के लिए बेहद जरूरी खबर है. इस औद्योगिक नगरी में देश के किसी भी प्रांत और नगर का आदमी इस काली-पीली टैक्सी सेवा का इस्तेमाल करता होगा. शहर में प्रीमियर पद्मिनी टैक्सी की पहचान काले-पीले रंग से ही है. यह करीब 60 साल से इस शहर में रहने वाले या सैर-सपाटे के लिए आने वाले लोगों को अपनी सेवाएं देती आ रही है, लेकिन अब इसके खुद का सफर समाप्त होने वाला है. इसका कारण यह बताया जा रहा है कि मुंबई परिवहन विभाग ने इन काली-पीली टैक्सियों को शहर भर में बंद करने का फैसला किया गया है.

60 साल का सफर होगा समाप्त

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई परिवहन विभाग ने महानगर में चल रही टैक्सियों को हटाने का आदेश जारी किया है. यह आदेश उन टैक्सियों को हटाने के लिए जारी किया गया है, जिनके रजिस्ट्रेशन को 20 साल या उससे ज्यादा हो चुके हैं. परिवहन विभाग के इस आदेश के बाद इन काली-पीली टैक्सियों का मुंबई शहर में 60 सालों का सफर समाप्त हो जाएगा और यह अब इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगी.

30 अक्टूबर के बाद गैर-कानूनी हो जाएगी पद्मिनी

मीडिया की रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने साल 2008 में कैब के लिए प्रयोग में लाई जा रही गाड़ियों की उम्र सीमा 25 साल निर्धारित की थी, जिसे 2013 में घटाकर 20 साल कर दिया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में इन काली-पीली टैक्सियों का रजिस्ट्रेशन 1990 में किया गया था और अबतक ये 20 साल की समय सीमा को पार कर चुकी हैं. इस वजह से इन्हें सड़कों से हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. इन्हें 30 अक्टूबर 2023 से चलाना गैरकानूनी हो जाएगा.

मुंबई में 60 हजार था पद्मिनी का मॉडल

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 में मुंबई की बेस्ट अथॉरिटी ने डबल डेकर डीजल बसों को भी बंद किया है. पुरानी टैक्सियों के बंद होने से नई टैक्सियों और ऐप आधारित सर्विस को जगह मिलेगी. टैक्सी टैक्सी यूनियन ने बंद होने वाली प्रीमियर पद्मिनी टैक्सी को याद के तौर पर प्रदर्शनी में लगाने या म्यूजियम में रखने की सलाह दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 अक्टूबर 2023 से मुंबई में 40,000 से ज्यादा काली-पीली टैक्सियां बंद हो जाएंगी. 1990 के दशक में केवल मुंबई की सैकड़ों पर ऐसी 60,000 टैक्सियां चल रही थीं.

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1964 में पेश की गई थी पद्मिनी

मीडिया की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में प्रीमियर पद्मिनी पहली दफा साल 1964 में लॉन्च किया गया था, जो फिएट की 1100 डिलाइट मॉडल थी. इटली की वाहन निर्माता कंपनी की इस कार को भारत में ऑटोमोबाइल निर्माता ‘प्रीमियर’ बना रही थी. 1970 के दौर में इसका नाम बदलकर ‘प्रीमियर प्रेजिडेंट’ रख दिया गया था. इसे बाद में प्रसिद्ध भारतीय रानी पद्मिनी के नाम पर ‘प्रीमियर पद्मिनी’ रख दिया गया.

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काली-पीली टैक्सी के नाम से मुंबई में प्रसिद्ध हुई पद्मिनी

एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2001 में इस मॉडल का प्रोडक्शन बंद होने तक इसे ‘पद्मिनी’ के नाम से ही जाना जाता था. मुंबई में इस टैक्सी को काला और पीला रंग दिया गया. इसके बास से यह ‘काली-पीली’ टैक्सी के नाम से ख्याती मिली. कई फिल्मों में दर्शकों के सामने मुंबई शहर की झलक दिखाने के लिए काली-पीली रंग वाली टैक्सी और डबल डेकर बस को शॉट में दिखाया गया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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