Jharkhand News: चतरा में किसानों का 245 क्विंटल धान सड़ा, FCI केंद्र के बाहर पड़े अनाज को पशु बना रहे निवाला

चतरा के मयूरहंड ब्लॉक अंतर्गत FCI धान अधिप्राप्ति केंद्र के बाहर किसानों का 245 क्विंटल धान सड़ गया है. पिछले 10 महीने से खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है. इससे किसानों को 5 लाख रुपये का नुकसान का अंदेशा है. वहीं, इस मामले पर सभी चुप्पी साधे हुए हैं.
Jharkhand News (दीनबंधू, पिंटू कुमार राणा, चतरा) : झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत मयूरहंड प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित लेम्प्स गोदाम FCI धान अधिप्राप्ति केंद्र के बाहर 10 माह (फरवरी, 2021) से खुले आसमान के नीचे रखा हुआ किसानों का 245 क्विंटल धान सड़कर बर्बाद हो गया. जिससे किसानों को 5 लाख का नुकसान हुआ. इस विषय पर FCI विभाग, जिले के वरीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं.
धान उठाव के प्रति किसी का ध्यान नहीं है. किसानों ने कई बार धान उठाव को लेकर डीसी समेत विधायक किशुन कुमार दास, सांसद सुनील कुमार सिंह व श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण मंत्री सत्यानंद भोगता को आवेदन देकर उठाव की मांग किया. धान उठाव के लिए धरना- प्रदर्शन व अनशन भी किया. बावजूद अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी किसानों के धान का उठाव नहीं हुआ.
किसानों ने गत 10 फरवरी से 31 मार्च तक केंद्र में धान क्रय का एसएमएस प्राप्ति के बाद पहुंचाया था. मायूस किसानों ने निराश होकर आंदोलन करना छोड़ दिया. जिसके कारण किसानों का धान बरसात के बारिश में सड़कर बर्बाद हो गया. बेकार पड़ा धान को आखिरकार मवेशियों ने अपना चारा बना लिया है. बेकार हुए सैकड़ों क्विंटल धान को हर दिन मवेशी हजम कर रहे हैं.
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मयूरहंड प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित FCI धान अधिप्राप्ति केंद्र के बाहर पुष्पा देवी का 48 क्विंटल अनाज पड़ रहा. इसके अलावा सत्येंद्र साव का 16 क्विंटल, सचिन कुमार साव का 16 क्विंटल, लखनी देवी का 42 क्विंटल, कमली देवी का 55 क्विंटल, उपेंद्र सिंह का 18 क्विंटल व अनिता देवी का 50 क्विंटल धान सड़कर बर्बाद हुआ है. बता दें 20 रुपये प्रति किलो की दर से होना था भुगतान.
इस मामले में किसान मालेश्वर सिंह ने कहा कि पत्नी पुष्पा देवी के नाम से बने आईडी पर 48 क्विंटल धान SMS प्राप्ति के बाद 10 फरवरी को धान अधिप्राप्ति केंद्र ले गये थे. केंद्र के बाहर सड़ा व बिखरा हुआ धान के दाने को देखकर कलेजा फटने लगता है.
वहीं, सत्येंद्र साव ने कहा कि एक बेटा-बेटी की तरह खेत से लेकर खलिहान तक मेहनत करके धान के एक-एक दाना को पैदा किये.16 क्विंटल धान केंद्र में जमा किये, लेकिन FCI विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण अधिप्राप्ति केंद्र के बाहर खुले आसमान के नीचे रखा हुआ. शशि सिंह ने कहा कि पत्नी के आईडी पर 50 क्विंटल धान एक मार्च को क्रय केंद्र परिसर में ले गये. बावजूद धन का उठाव नहीं हुआ. जिसका भुगतान किसानों को FCI करेगी, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ.
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FCI धनबाद जोन के डीएम हरि सिंह मीणा ने बताया कि जिन-जिन किसानों का जितनी भी धान की क्षतिपूर्ति हुई है. उनकी मुआवजा व भरपाई किया जायेगा. धान उठाव में लापरवाही बरतने वाले परचेज ऑफिसर व डिपू इंचार्ज से उक्त क्षतिपूर्ति की भरपाई कराया जायेगा. इसके लिये प्रयासरत हूं.
Posted By : Samir Ranjan.
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