झारखंड हाईकोर्ट ने क्यों कहा- मंत्री आलमगीर आलम व पंकज मिश्रा के खिलाफ आरोप पत्र दायर न होना चिंता का सबब

Updated at : 10 Dec 2022 7:05 AM (IST)
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झारखंड हाईकोर्ट ने क्यों कहा- मंत्री आलमगीर आलम व पंकज मिश्रा के खिलाफ आरोप पत्र दायर न होना चिंता का सबब

न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि बरहरवा टोल विवाद में 10 लोगों को नामजद और एक अज्ञात को अभियुक्त बनाया गया था. इसमें राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा का भी नाम शामिल था.

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संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा टेंडर डालने से रोकने के लिए धमकी देने का आरोप पहली नजर में सही प्रतीत होता है. कोर्ट के लिए यह चिंता का विषय है. ऐसा प्रतीत होता है कि झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को बचाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर नहीं किया गया. शंभुनंदन कुमार की याचिका पर सुनवाई के बाद जारी आदेश में झारखंड हाइकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने इस बात का उल्लेख किया है.

न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि बरहरवा टोल विवाद में 10 लोगों को नामजद और एक अज्ञात को अभियुक्त बनाया गया था. इसमें राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा का भी नाम शामिल था. इन दोनों पर गंभीर आरोप लगाये गये थे. हालांकि न्यायालय में पेश दस्तावेज से पहली नजर मे यह प्रतीत होता है कि आमलगीर आलम और पंकज मिश्रा को आरोपमुक्त कर दिया गया.

सिर्फ आठ लोगों को ही दोषी मानते हुए उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया. आलमगीर आलम और पंकज मिश्रा के खिलाफ आरोप पत्र दायर नहीं किया जाना चिंता का विषय है. याचिकादाता के अधिवक्ता की ओर से यह कहा गया कि बरहरवा टोल प्लाजा का बहुत महत्व है. दूसरे राज्यों जैसे बिहार, बंगाल जानेवाली गाड़ियों को इसी टोल प्लाजा से होकर गुजरना होता है.

न्यायालय ने कोर्ट में पेश दस्तावेज के आलोक में कहा है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति के लिए सार्वजनिक हित के काम करने की जरूरत होती है. मंत्री के रूप में संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति पर टेंडर डालने से रोकने के लिए धमकी देने का आरोप कोर्ट के लिए चिंता का विषय है. कोर्ट ने यह पाया कि इस इस याचिका पर सुनवाई के लिए इडी का पक्ष सुनना जरूरी है.

विवाद की जांच सीबीआइ से कराने की मांग

शंभु नंदन ने बरहरवा टोल प्लाजा विवाद की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की थी, इस पर राज्य सरकार ने आपत्ति दर्ज करायी थी. सरकार की ओर से पेश दलील में यह कहा गया था कि पुलिस द्वारा इस मामले की जांच के बाद आलमगीर आलम और पंकज मिश्रा को आरोप मुक्त करते हुए आठ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया जा चुका है.

इडी को बरहरवा टोल प्लाजा विवाद की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है. साहिबगंज के एसपी की ओर से भी सरकार द्वारा दी गयी इस दलील का समर्थन किया गया. साथ ही याचिका को रद्द करने का अनुरोध किया गया था. हालांकि अदालत ने राज्य सरकार सहित अन्य द्वारा याचिका खारिज करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया.

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