झारखंड सरकार के दो मंत्री और दो डीसी की सक्रियता भी नहीं आयी काम, इलाज के अभाव में बच्चे की मौत

Updated at : 24 Oct 2022 11:19 AM (IST)
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झारखंड सरकार के दो मंत्री और दो डीसी की सक्रियता भी नहीं आयी काम, इलाज के अभाव में बच्चे की मौत

सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर से रिम्स तक सरकारी अव्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण 11 वर्षीय बच्चे सलखू सोरेन की जान चली गयी. राज्य सरकार के दो मंत्रियों, दो जिलों के उपायुक्त, दो रिटायर डीएसपी और पत्रकारों की सक्रियता भी मासूम को इलाज नहीं दिला सकी.

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Saraikela Kharsavan: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर से रिम्स (रांची) तक सरकारी अव्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण 11 वर्षीय बच्चे सलखू सोरेन की जान चली गयी. राज्य सरकार के दो मंत्रियों, दो जिलों के उपायुक्त, दो रिटायर डीएसपी और पत्रकारों की सक्रियता भी मासूम को इलाज नहीं दिला सकी. आखिरकार 10 दिनों तक बीमारी से लड़ते हुए राजनगर के सालगढिया गांव के सलखू सोरेन ने दम तोड़ दिया.

10 दिन पहले हुई थी परेशानी

सलखू की 10 दिन पहले शौच प्रक्रिया बंद हो गयी थी. दर्द के साथ उसका पेट फूलने लगा. परिजन उसे हाता (जमशेदपुर) में पूर्व सिविल सर्जन एके लाल के नर्सिंग होम ‘तारा अस्पताल’ ले गये. वहां डॉक्टरों ने हालत देख हाथ खड़े कर दिये. परिजन उसे 21अक्तूबर को राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गये. वहां से एमजीएम जाने की सलाह दी गयी. एमजीएम में रिम्स ले जाने की सलाह दी गयी. सलखू का पिता बोडो सोरेन गरीब हैं. बेटे को रिम्स ले जाने के लिए पैसे नहीं थे. मंत्री चंपई सोरेन के प्रयास से एंबुलेंस की व्यवस्था कर रिम्स लाया गया. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व सांसद डॉ अजय कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता व डीसी जमशेदपुर को ट्वीटर पर टैग कर सहयोग की अपील की.

राजनगर सीएचसी में एंबुलेंस होती तो, बच जाती जान!

परिजनों का कहना है कि राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस होती, तो सलखू को 3-4 दिन पहले एमजीएम ले गया होता. सलखू के पिता लालकार्डधारी हैं. इसके बाद भी आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिला.

रिम्स में मिली बाहर से जांच कराने की सलाह

परिजन बच्चा को लेकर 22 अक्तूबर की शाम रिम्स पहुंचे. सलखू को डॉ अभिषेक रंजन की निगरानी में भर्ती कराया गया. वहां साईं मानवसेवा ट्रस्ट के सदस्य ऐहतेशाम आलम खुद पहुंचे थे. रिम्स में सलखू को अल्ट्रासाउंड से लेकर ब्लड टेस्ट बाहर कराने की सलाह दी. कहा गया कि ऑपरेशन के लिए टेस्ट बाहर से करायें, क्योंकि अस्पताल में देर से रिपोर्ट मिलेगी. परिजनों के पास पैसे नहीं थे. पिता बेटे के लिए इधर-उधर भटकते हुए पैसे का इंतजाम में जुटे रहे. इस बीच 23 अक्तूबर को सलखू की मौत हो गयी.

सीएचसी प्रभारी ने रात में कहा- एंबुलेंस अगले दिन मिलेगी

बताया गया कि 21 अक्तूबर की रात सलखू दर्द से तड़प रहा था. परिजन आर्थिक तंगी के कारण एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कर पा रहे थे. इसकी जानकारी सीएचसी प्रभारी डाॅ. जगन्नाथ हेंब्रम को फोन कर दी. उन्होंने अगले दिन सुबह एंबुलेंस देने की बात कही. 22 अक्तूबर की सुबह किसी तरह चंदा जुटाकर परिवार के लोग जमशेदपुर के सदर अस्पताल गये.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

परिजनों ने एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा था. उन्हें कहा गया कि आधा घंटा इंतजार करें. उनलोगों ने कहा कि हमलोग गाड़ी का इंतजाम कर लिये हैं.

-डॉ जगन्नाथ हेम्ब्रम, प्रभारी, राजनगर

देर रात बच्चे को कार्डियेक अरेस्ट आया. दो बार सीपीआर देने के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका. लापरवाही का आरोप निराधार है.

-डॉ अभिषेक रंजन

विभागाध्यक्ष, शिशु रोग, रिम्स

पीडियेट्रिक सर्जरी विभाग को निर्देश दिया गया था, इसलिए सब अलर्ट थे. इलाज और व्यवस्था में कहां चूक हुई है, इसकी जांच की जायेगी.

– डॉ हिरेंद्र बिरुआ, अधीक्षक, रिम्स

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